बिहार में एक तरफ किसान बाढ़ से परेशान हैं तो दूसरी तरफ कम बारिश के कारण कई जिलों में सूखे जैसे हालात हैं। इसको लेकर नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने सरकार पर हमला बोला है। उन्होंने बाढ़ और सूखा प्रभावित किसानों को 15-15 हजार रुपये मुआवजा देने की मांग की है। प्रेस वार्ता में तेजस्वी ने कहा कि भाजपा के नेताओं में इतनी हिम्मत नहीं है कि वे गृह मंत्री और प्रधानमंत्री से बिहार को राष्ट्रीय आपदा घोषित करने की मांग करें। बिहार के साथ सिर्फ सौतेला व्यवहार किया जा रहा है।
तेजस्वी ने केंद्र सरकार पर भेदभाव का आरोप लगाते हुए कहा, 'गुजरात में नाले में पानी आ जाता है तो उसे राष्ट्रीय आपदा घोषित कर दिया जाता है। वहां हजारों करोड़ का पैकेज दे दिया जाता है लेकिन बिहार हर साल बाढ़ और सूखे से परेशान होता है। लाखों किसान बर्बाद हो जाते है, फिर भी बिहार को राष्ट्रीय आपदा घोषित नहीं किया जाता। बिहार से ही भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। बिहार से कई बड़े नेता और कई केंद्रीय मंत्री हैं लेकिन किसी में इतनी हिम्मत नहीं है कि वे प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के सामने बिहार के हक की बात करें।' तेजस्वी ने आरोप लगाया कि सभी रबर स्टैंप बने हुए हैं। उन्हें सिर्फ प्रधानमंत्री के जन्मदिन पर दिया-बाती जलाने से फुर्सत नहीं है।
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तेजस्वी का कृषि मंत्री पर आरोप
नेता प्रतिपक्ष ने कहा, 'केंद्रीय कृषि मंत्री बिहार आए थे। उन्होंने बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा किया लेकिन सूखे से प्रभावित जिलों के किसानों से मिलने नहीं पहुंचे। सरकार को बाढ़ और सूखे दोनों को एक साथ देखना चाहिए। बाढ़ प्रभावित इलाकों में चल रहे कम्युनिटी किचन भी सरकार ने दो-चार दिन में बंद कर दिए। बाढ़ पीड़ित लोगों के पास खाने के लिए कुछ नहीं है लेकिन सरकार को इसकी चिंता नहीं है। सरकार सिर्फ इवेंट में व्यस्त है। किसान सबसे ज्यादा परेशान हैं। बाढ़ में उनकी फसल डूब गई और सूखे वाले इलाकों में धान की रोपनी भी नहीं हो पाई। किसान कर्ज में डूब गए हैं लेकिन सरकार को किसानों की कोई सुध नहीं है।'
तेजस्वी ने कहा, 'कोविड के समय पीएम केयर फंड में जो पैसे जमा हुए थे उसमें से बिहार को आपदा के समय कितना पैसा मिला यह सरकार को बताना चाहिए। बिहार के लोग भी पीएम केयर फंड में पैसा देते हैं लेकिन जब बिहार पर आपदा आती है तो केंद्र मदद नहीं करता। 2015 में जब महागठबंधन की सरकार थी तब बजट का 4 प्रतिशत पैसा आपदा के लिए तय किया गया था। सरकार को बताना चाहिए कि वह 4 प्रतिशत पैसा कहां खर्च हो रहा है। आपदा के पैसे का हिसाब देना चाहिए।'
तेजस्वी ने आरोप लगाया कि सरकार सिर्फ प्रधानमंत्री के जन्मदिन पर दिया-बाती जलाने में 100 करोड़ रुपये खर्च कर देती है। 100 करोड़ रुपये में दीया जलाया जा रहा है लेकिन किसानों को 15 हजार रुपये देने के लिए सरकार के पास पैसा नहीं है।
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किसानों को 15 हजार देने की मांग
नेता प्रतिपक्ष ने कहा, 'बिहार के साथ केंद्र सरकार सौतेला व्यवहार कर रही है। बिहार हर साल बाढ़ और सूखे से परेशान होता है। लाखों हेक्टेयर फसल बर्बाद हो जाती है और सैकड़ों गांव डूब जाते हैं लेकिन केंद्र से कोई मदद नहीं मिलती।'
उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी कई बार बिहार को विशेष राज्य का दर्जा देने और राष्ट्रीय आपदा घोषित करने की मांग कर चुकी है लेकिन भाजपा के नेता इस पर चुप हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें बिहार के किसानों की चिंता नहीं है।
तेजस्वी ने कहा कि उनकी मांग है कि सरकार तुरंत बाढ़ और सूखा प्रभावित किसानों को 15-15 हजार रुपये की सहायता दे। किसानों का कर्ज माफ करे, फसल के नुकसान का आकलन कर मुआवजा दे और कम्युनिटी किचन फिर से शुरू करें।
