बिहार के समस्तीपुर जिले के विभूतिपुर से बेहद दर्दनाक खबर सामने आई है। एक सरकारी स्कूल पर 5 साल से सूखा खड़ा विशाल बरगद का पेड़ गिर जाने के चलते तीन मासूम छात्राओं की मौत हो गई। हादसे के बाद पूरे गांव में मातम पसरा है और तीनों परिवारों में कोहराम मचा है। हादसा इतना भयावह था कि दो बच्चियों ने मौके पर ही दम तोड़ दिया जबकि तीसरी ने बेगूसराय के निजी अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ा।
हादसा विभूतिपुर थाना क्षेत्र के खास टभका दक्षिण पंचायत के वार्ड 9 स्थित उत्क्रमित मध्य विद्यालय चकविदौलिया में हुआ। जिस वक्त यह हादसा हुआ, उस वक्त परिसर में करीब 300 बच्चे मौजूद थे। सभी बच्चे लंच कर चुके थे। गनीमत रही कि पेड़ लंच के दौरान नहीं गिरा, नहीं तो हादसा और भी बड़ा हो सकता था और कई बच्चों की जान जा सकती थी।
पानी पीने गई थीं लड़कियां
मिली जानकारी के अनुसार, स्कूल में रोज की तरह पढ़ाई चल रही थी। दोपहर में सभी बच्चों ने लंच किया। लंच के बाद तीनों छात्राएं पानी पीने और शौचालय के लिए नल के पास गई थीं। यह नल पेड़ के पास ही स्थित है। तभी 4-5 साल से सूखा खड़ा विशाल बरगद का पेड़ अचानक भरभराकर स्कूल की छत और नल पर गिर गया। पेड़ गिरते ही चीख-पुकार मच गई। बच्चे इधर-उधर भागने लगे। शिक्षक भी दौड़कर मौके पर पहुंचे। पेड़ के नीचे तीनों छात्राएं दब गई थीं। ग्रामीणों और शिक्षकों ने कड़ी मशक्कत के बाद उन्हें बाहर निकाला। तब तक पायल कुमारी उर्फ अनन्या और सपना कुमारी की मौके पर ही मौत हो चुकी थी। तीसरी छात्रा गुलनाज खातून गंभीर रूप से घायल थी। उसे तुरंत बेगूसराय के निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के दौरान उसने भी दम तोड़ दिया।
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मृतकों की पहचान वार्ड 13 निवासी अमरजीत ठाकुर की बेटी पायल कुमारी उर्फ अनन्या (कक्षा-5), वार्ड 10 निवासी राम कुमार महतो की बेटी सपना कुमारी (कक्षा-4) और वार्ड 10 निवासी मो. ताजिम की 8 वर्षीय बेटी गुलनाज खातून (कक्षा-2) के रूप में हुई है। तीनों बच्चियां पढ़ने में होशियार थीं और रोजाना स्कूल आती थीं।
विवाद के चक्कर में नहीं कटा पेड़
इस हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि 4-5 साल से सूखा पेड़ स्कूल परिसर में क्यों खड़ा था और उसे क्यों नहीं काटा गया। प्रधानाध्यापक मनोज कुमार चौधरी ने बताया कि पेड़ 4-5 साल से सूखा था। इसे कटवाने के लिए कई बार विभाग और स्थानीय लोगों से कहा गया था, लेकिन आपसी विवाद के कारण नहीं कट सका।ग्रामीणों ने बताया कि पेड़ को लेकर दो पक्षों में विवाद था। एक पक्ष पेड़ काटने की बात कह रहा था तो दूसरा पक्ष इसका विरोध कर रहा था। इसी विवाद में पेड़ नहीं कट सका और आज तीन मासूमों की जान ले ली। ग्रामीणों ने कहा कि अगर समय रहते पेड़ काट दिया गया होता तो आज तीनों बच्चियां जिंदा होतीं।
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ग्रामीणों ने बताया कि विद्यालय परिसर में अभी भी दो और सूखे पेड़ खड़े हैं, जिनसे खतरा बना हुआ है। कभी भी वे भी गिर सकते हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन से जांच कर उन्हें तुरंत हटाने की मांग की है, ताकि भविष्य में इस तरह का हादसा दोबारा न हो।
प्रधानाध्यापक ने कहा कि हादसे के वक्त परिसर में करीब 300 बच्चे मौजूद थे। अगर पेड़ 15 मिनट पहले गिरता, जब सभी बच्चे MDM कर रहे थे और उसी जगह बैठे थे, तो हादसा और भी बड़ा हो सकता था। भगवान का शुक्र है कि बच्चे वहां से हट गए थे, नहीं तो 50 से ज्यादा बच्चों की जान जा सकती थी। सूचना पर रोसड़ा एसडीओ पूजा कुमारी, एसडीपीओ संजय कुमार सिन्हा, बीडीओ सुनील कुमार, सीओ चंद्रशेखर और थानाध्यक्ष सुनील कुमार झा मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने घटनास्थल का जायजा लिया और ग्रामीणों से पूरी जानकारी ली। बीडीओ ने बताया कि दो मृत छात्राओं के परिजन को तत्काल 20-20 हजार की सहायता दी गई है, तीसरी के परिजन को भी सहायता दी जाएगी।
