उत्तराखंड में 30 अक्टूबर को बद्रीनाथ के दर्शन कर लौट रहे 1 पायलट समेत 5 लोगों की हेलीकॉप्टर क्रैश में मौत हो गई। यह हादसा चमोली के जोशीमठ के पास हुआ था। हेलीकॉप्टर दोपहर 1:14 बजे बद्रीनाथ से देहरादून के सहस्त्रधारा हेलीपैड के लिए उड़ा था। करीब एक घंटे बाद जोशीमठ घाटी पार करते हुए उसका संपर्क टूट गया और वह पहाड़ी से टकरा गया। इस हादसे में पायलट कैप्टन हिमांशु समेत सभी छह लोगों की जान चली गई। इस हादसे के बाद अब कई सवाल उठने लगे हैं।

 

30 अक्टूबर को गिरा हेलीकॉप्टर ट्रांस भारत एविएशन प्राइवेट लिमिटेड का था। उसका रजिस्ट्रेशन VT-HCX था और वह AS350 B3 मॉडल था। यह कंपनी पहले से ही रडार पर थी। हादसे के दिन इलाके में भारी से बहुत भारी बारिश और बर्फबारी के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया था। इससे एक दिन पहले 29 अक्टूबर को शाम 5:44 बजे एक प्रेस विज्ञप्ति जारी की गई थी, जिसमें पूरी सतर्कता बरतने और मौसम खराब होने की स्थिति में यात्रियों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के निर्देश दिए गए थे। ऐसे में एक बड़ा सवाल उठता है कि इन चेतावनियों के बावजूद हेलीकॉप्टर उड़ानें जारी क्यों रहीं? 

 

30 अक्टूबर को हुए हादसे की वजह अभी साफ नहीं है लेकिन उस दिन इलाक में बारिश थी और विजिबिलिटी कम थी। इसके अलावा, उस दिन मौसम विभाग ने इलाके में खराब मौसम की पूर्व चेतावनी देते हुए 48 घंटे का ऑरेंज अलर्ट जारी किया था। यह अलर्ट भारी से बहुत भारी बारिश और बर्फबारी के लिए था। अधिकारियों के मुताबिक खराब मौसम की वजह से बचाव कार्य में भी दिक्कत आई। इसलिए आशंका जताई जा रही है कि बादल और कम दृश्यता हादसे की वजह रही होगी। जांच जारी है।  

 

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चेतावनी के बाद भी जारी रही उड़ानें

एक और चौंकाने वाली बात यह है कि हादसे के एक दिन पहले आपदा प्रबंधन सचिव विनोद कुमार सुमन की अध्यक्षता में हुई एक बैठक के बाद, 29 अक्टूबर को शाम 5:44 बजे एक प्रेस विज्ञप्ति जारी की गई थी, जिसमें पूरी सतर्कता बरतने और मौसम खराब होने की स्थिति में यात्रियों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के निर्देश दिए गए थे। इसके साथ मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) ने भी 30 अक्टूबर की सुबह 8:01 बजे जारी एक संदेश में इन चिंताओं को दोहराया था। इसमें अधिकारियों को सलाह दी गई थी कि ऑरेंज अलर्ट को देखते हुए ऊंचाई वाले इलाकों में पर्यटकों की आवाजाही को कंट्रोल किया जाए।

 

ऐसे में एक बड़ा सवाल उठता है कि इन चेतावनियों के बावजूद हेलीकॉप्टर उड़ानें जारी क्यों रहीं? उड़ानों की अनुमति किसने दी? क्या उत्तराखंड नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण (UCADA) ने जरूरी पाबंदियां लागू की थीं? असुरक्षित हो सकने वाले हालात के बावजूद कमर्शियल उड़ानों को जारी रखने की अनुमति क्यों दी गई? 

पहले से रडार पर थी हेलीकॉप्टर सेवा देने वाली कंपनी

लोकसभा में 6 अगस्त 2026 को दिए जवाब (अतारांकित प्रश्न 3039) में नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल ने बताया कि DGCA ने 2025 में पहाड़ों और दुर्गम इलाकों में उड़ने वाले 8 हेलीकॉप्टर ऑपरेटरों का विशेष ऑडिट किया। इस लिस्ट में पहले नंबर पर ट्रांस भारत एविएशन प्राइवेट लिमिटेड का नाम है। इसमें ऑडिट की कमियां भी गिनाई गई थीं। 8 हेलीकॉप्टर ऑपरेटरों का विशेष ऑडिट में पायलटों की ड्यूटी-समय सीमा की निगरानी न होना, उड़ान नियमों के सर्कुलर OC 02/2023 का पूरा पालन न होना और रख-रखाव का काम बंद करने की तय प्रक्रिया न होना शामिल हैं। 

 

बता दें कि 15 जून 2025 को केदारनाथ के गौरीकुंड हादसे (आर्यन एविएशन प्राइवेट लिमिटेड का हेलीकॉप्टर) के बाद ट्रांस भारत एविएशन प्राइवेट लिमिटेड  के दो पायलटों के लाइसेंस 6 महीने के लिए निलंबित कर दिया गया था, उस दौरान पायलट खराब विजिबिलिटी और घने बादल होने के बावजूद उड़ान भरते पाए गए थे। 

उत्तराखंड में कितने हेलीकॉप्टर हादसे?

यह हादसा 2025 की चारधाम यात्रा के दौरान हुए हेलीकॉप्टर हादसों के बाद हुआ है। 8 मई 2025 को खरसाली और झाला के बीच हेलीकॉप्टर दुर्घटना में छह लोगों की मौत हुई थी। इसके बाद 15 जून 2025 को गौरीकुंड के पास आर्यन एविएशन का हेलीकॉप्टर हादसे का शिकार हो गया था। इसमें सात लोगों की जान गई थी। 2025 की चारधाम यात्रा के दौरान करीब 45 दिनों में हेलीकॉप्टर से जुड़ी पांच दुर्घटनाएं हुई थीं।

 

जून 2025 में हुए हादसे की जांच में विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (AAIB) ने कई वजहों का जिक्र किया। रिपोर्ट के मुताबिक, तेजी से नीचे आते बादलों के कारण पायलट को रास्ता साफ दिखाई देना बंद हो गया था। इसके बावजूद वह उसी रास्ते पर आगे बढ़ता रहा। इसके अलावा केदारनाथ घाटी में पायलट का अनुभव भी कम था।

 

जुलाई 2025 में नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने संसद को बताया था कि 2020 से देश में 12 हेलीकॉप्टर हादसे हुए। इनमें से 7 उत्तराखंड में हुए थे। इन हादसों में देशभर में 30 लोगों की मौत हुई, जिनमें 21 लोग उत्तराखंड के थे। 

सरकार ने क्या कदम उठाए, कौन से नए नियम बने?

जून 2025 में गौरीकुंड हादसे के बाद सरकार ने आर्यन एविएशन की चारधाम उड़ानों पर रोक लगा दी। इसके अलावा, खराब मौसम में उड़ान भरने पर ट्रांस भारत एविएशन के दो पायलटों के लाइसेंस 6 महीने के लिए निलंबित कर दिया गया था। 15 और 16 जून को क्षेत्र की सभी चार्टर और शटल उड़ानें भी रोक दी गईं। इसके अलावा UCADA को उड़ानों पर नजर रखने के लिए नियंत्रण कक्ष बनाने का निर्देश दिया गया।

 

इसके बाद सितंबर 2025 में DGCA ने 13 से 16 सितंबर तक सभी हेलीपैड, हेलीकॉप्टर और कंपनियों की तैयारियों की जांच की। इसके बाद 15-16 सितंबर से चारधाम की हेलीकॉप्टर सेवाएं दोबारा शुरू करने की मंजूरी दी गई।

 

2026 की चारधाम यात्रा के लिए पायलटों के पास कम से कम 750 घंटे का पहाड़ी उड़ान अनुभव जरूरी किया गया। इसमें पिछले एक साल के 100 घंटे और केदारनाथ में कम से कम 10 बार उड़ान भरने और उतरने का अनुभव शामिल है। हेलीकॉप्टर में यात्रियों की संख्या उसकी अधिकतम क्षमता के 70 फीसदी तक सीमित की गई। चार्टर उड़ानों पर भी सीमा लगाई गई और पायलटों के ड्यूटी समय की रोजाना निगरानी शुरू हुई।

 

सुरक्षा के लिए सहस्त्रधारा और सेरसी में हवाई यातायात नियंत्रण सेवाएं शुरू की गईं। सीतापुर, केदारनाथ, बद्रीनाथ, झाला और खरसाली में मौसम की निगरानी के उपकरण लगाए गए। 33 कैमरे, दो नियंत्रण केंद्र और तीन अतिरिक्त रेडियो संचार सेट भी लगाए गए। चारधाम यात्रा में चलने वाले हर हेलीकॉप्टर में उसकी स्थिति पर नजर रखने के लिए ट्रैकिंग उपकरण लगाया गया।

 

अगस्त 2025 में संसद की स्थायी समिति ने सरकार के कदमों को काफी हद तक हादसों के बाद उठाई गई कार्रवाई कहा। समिति ने इसपर DGCA और UCADA के बीच जिम्मेदारी को लेकर अस्पष्टता पर सवाल उठाए और इसे 'जिम्मेदारी का शून्य' कहा। रिपोर्ट्स के मुताबिक, समिति ने DGCA की भूमिका को 'निष्क्रिय लाइसेंसिंग प्राधिकरण' बताते हुए पहाड़ी इलाकों में उड़ान भरने वाले पायलटों के लिए खास ट्रेनिंग और प्रमाणन अनिवार्य करने की सिफारिश की थी।