लद्दाख के पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक एक बार फिर चर्चा में हैं और इस बार मामला उनके संस्थान हिमालयन इंस्टीट्यूट ऑफ अल्टरनेटिव लर्निंग (HIAL) से जुड़ा है। वांगचुक ने आरोप लगाया है कि जब भी वह लद्दाख के लोगों के साथ हो रहे अन्याय के खिलाफ आवाज उठाते हैं, तो उन्हें और उनके संस्थान को निशाना बनाया जाने लगता है। इस मामले में उन्होंने तंज करते हुए सरकारी मीडिया तंत्र को भी घेरा है।
हाल में लद्दाख प्रशासन ने सोनम वांगचुक के संस्थान को दी गई जमीन का आवंटन रद्द करने के फैसले का बचाव किया है। प्रशासन का कहना है कि करीब दो दशकों से नियमों की लगातार अनदेखी की जा रही थी। बकाया पैसा जमा नहीं करने और जमीन के पट्टे से जुड़ी कानूनी प्रक्रिया पूरी नहीं करने के कारण जमीन का आवंटन रद्द हो गया है।
सोनम वांगचुक ने क्या कहा?
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर पोस्ट करते हुए सोनम वांगचुक ने लिखा, 'जब भी मैं लद्दाख में हो रहे अन्याय के खिलाफ आवाज उठाता हूं, तो सरकारी मीडिया तंत्र मुझे और हमारे संस्थान HIAL की जमीन के लीज (पट्टे) को निशाना बनाने के लिए सक्रिय हो जाता है। कृपया संदेश पर ध्यान दें, संदेश लाने वाले को निशाना न बनाएं।'
सोनम वांगचुक ने एक लेटर शेयर करते हुए लिखा, 'इसपर एक नजर डालने से ही उनकी देरी, या शायद उनकी अक्षमता, साफ पता चल जाती है। कुल मिलाकर, जमीन की लीज को समय पर पूरा करने के लिए 5 लिखित अपीलें की गईं, 15 बार मुलाकात की गई और 30 बार फोन कॉल किए गए। कृपया इस बात को उन सभी मीडिया संस्थानों तक पहुंचाने में मेरी मदद करें जिन्होंने इस मुद्दे को कवर किया है।'
क्या है पूरा विवाद?
दरअसल, यह पूरा मामला लद्दाख के फ्यांग थांग इलाके की 1,076 कनाल और एक मरला जमीन से जुड़ा है, जिसे सोनम वांगचुक के संस्थान HIAL को 40 साल के पट्टे पर देने की मंजूरी मिली। साल 2025 को प्रशासन ने इसका आवंटन रद्द कर दिया था। अब लद्दाख प्रशासन ने हाई कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर इस फैसले का बचाव किया है। प्रशासन का कहना है कि संस्थान ने तय समय में जमीन का प्रीमियम और किराया जमा नहीं किया और लीज डीड भी पूरी नहीं की, इसलिए आवंटन मई 2019 में खत्म हो गया था।
इस मामले में आज सोनम वांगचुक ने प्रशासन पर देरी का आरोप लगाते हुए 19 फरवरी 2021 का एक सरकारी पत्र साझा किया। उनके मुताबिक, पट्टे की प्रक्रिया पूरी कराने के लिए पांच लिखित अपीलें की गईं, अधिकारियों के 15 बार चक्कर लगाए गए और 30 बार फोन किया गया। HIAL की CEO गीतांजलि आंग्मो ने भी प्रशासन के दावों को खारिज किया है। अब हाई कोर्ट में यह मामला आगे बढ़ सकता है।
प्रशासन का क्या कहना है?
प्रशासन ने अदालत को बताया कि आवंटन के पहले साल के भीतर शर्तें पूरी नहीं की गई थीं। प्रशासन ने यह भी तर्क दिया कि जमीन का इस्तेमाल उस उद्देश्य के लिए नहीं किया गया जिसके लिए इसे आवंटित किया गया था। साथ ही, प्रशासन का कहना है कि इस बात का भी कोई सबूत नहीं है कि कोई विश्वविद्यालय शुरू किया गया हो, जो कि लीज को लागू करने की एक और शर्त थी।
लद्दाख प्रशासन ने अपने जवाब में वांगचुक पर कई आरोप लगाए हैं। इनमें बिना भुगतान किए सार्वजनिक जमीन पर कब्जा करना, प्रशासन से जवाब मांगे जाने पर उसके खिलाफ झूठा और भड़काऊ प्रचार करना, निर्वाचित परिषद और अधिकारियों को धमकाना, और कर्मचारियों और छात्रों को आंदोलनों (जिसमें हिंसक आंदोलन भी शामिल हैं) के लिए इकट्ठा करना शामिल है।
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जब NSA के तहत सोनम वांगचुक को भेजा गया जेल
प्रशासन ने कहा कि यह सिलसिला सितंबर 2025 में लेह में हुई हिंसा के दौरान चरम पर पहुंच गया था। उस समय सोनम वांगचुक भूख हड़ताल पर थे। प्रशासन का आरोप है कि उनके भड़काऊ बयानों से भीड़ उकसी और प्रदर्शन हिंसक हो गया। इस दौरान राजनीतिक दल और मुख्य कार्यकारी पार्षद के कार्यालय में आग लगाई गई, सुरक्षाकर्मियों पर हमला हुआ और पुलिस की गाड़ी जला दी गई। इसमें 30 से ज्यादा पुलिस और CRPF कर्मी घायल हो गए हैं।
इसके बाद गृह मंत्रालय ने कारण बताओ नोटिस के बाद SECMOL का विदेशी चंदा नियमन कानून (FCRA), 2010 के तहत पंजीकरण रद्द कर दिया गया था। बाद में सोनम वांगचुक को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत हिरासत में लेकर जोधपुर जेल भेज दिया गया।
