झारखंड राज्य गठन के 25 साल बाद भी झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) केवल 14 संयुक्त सिविल सेवा परीक्षाएं ही आयोजित कर सका है। इनमें से ज्यादातर भर्तियां किसी न किसी विवाद, कोर्ट केस या जांच के दायरे में रही हैं। ऐसे में एक बार फिर JPSC की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में है। इस बार 14वीं संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा के प्रीलिम्स परिणाम के बाद अभ्यर्थियों ने चयन प्रक्रिया में अनियमितता के आरोप लगाए हैं, जिससे आयोग को लेकर नई बहस छिड़ गई है।

 

विवाद बढ़ने के बाद राज्य सरकार ने मामले की जांच के लिए CID की विशेष जांच टीम (SIT) का गठन किया है। इसी बीच JPSC के तत्कालीन चेयरमैन और पूर्व मुख्य सचिव एल खियांगटे के इस्तीफे ने मामले को और राजनीतिक रंग दे दिया है। विपक्ष CBI जांच की मांग कर रहा है, जबकि छात्र संगठन लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।

 

यह भी पढ़ें: NEET आंदोलन के 989 लोगों पर दिल्ली सरकार करेगी कार्रवाई, जानिए कौन हैं ये लोग?

14वीं JPSC परीक्षा में आखिर विवाद क्या है?

विवाद की शुरुआत इसी महीने हुई, जब 14वीं JPSC प्रारंभिर परीक्षा (PT) का रिजल्ट जारी हुआ। आयोग ने 103 पदों के लिए 2,204 उम्मीदवारों को मुख्य परीक्षा (Mains) के लिए सफल घोषित किया लेकिन रिजल्ट  आते ही छात्रों ने चयन प्रक्रिया पर कई सवाल खड़े कर दिए।

  • कट-ऑफ और हस्ताक्षर पर सवाल: छात्रों का कहना है कि JPSC ने रिजल्ट के साथ अलग-अलग कैटेगरी की कट-ऑफ जारी नहीं की। इतना ही नहीं, जो मेरिट लिस्ट जारी की गई उस पर आयोग के संवैधानिक सदस्यों के हस्ताक्षर भी नहीं थे।
  • वायरल हुई OMR शीट: मामला तब और गरमा गया जब सोशल मीडिया पर कुछ OMR शीट वायरल होने लगीं। दावा किया गया कि दूसरे राज्य के एक अभ्यर्थी ने पेपर-1 में सिर्फ 48 सवाल हल किए थे, जिसके हिसाब से उसके अंक क्वालिफाइंग मार्क्स से काफी कम होने चाहिए थे। इसके बावजूद उसे पास घोषित कर दिया गया। हालांकि, इन वायरल OMR शीट की आधिकारिक तौर पर पुष्टि नहीं हुई है।
  • CID जांच के आदेश: छात्रों के लगातार विरोध-प्रदर्शन और बढ़ते विवाद को देखते हुए झारखंड सरकार ने मामले की जांच के लिए CID की विशेष जांच टीम (SIT) गठित कर दी है। अब यह टीम पूरे मामले की जांच करेगी।

यह भी पढ़ें: 'गुरुग्राम में HC की सर्किट बेंच बने', राज्यसभा में संजय भाटिया ने उठाई मांग

ब्लैकलिस्टेड एजेंसी ने करवाई 14वीं JPSC परीक्षा

परीक्षा कराने वाली एजेंसी से जुड़े मामले में CID ने गोड्डा के ब्लॉक सप्लाई ऑफिसर (BSO) अभय तिवारी को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि वह लखनऊ की एजंसी TDPL (TSR Data Processing Pvt. Ltd.) का मार्केटिंग मैनेजर बनकर पूरे गिरोह को चला रहा था। सबसे हैरानी की बात यह है कि TDPL को JSSC पहले ही ब्लैकलिस्ट कर चुका था लेकिन इसके बावजूद उसी एजेंसी को 14वीं JPSC जैसी अहम परीक्षा कराने की जिम्मेदारी दे दी गई।

25 साल से विवादों में घिरी भर्ती प्रक्रिया

झारखंड के छात्रों के लिए यह कोई नई बात नहीं है। साल 2000 में राज्य बनने के बाद से JPSC की लगभग हर परीक्षा किसी न किसी विवाद में फंसी है। सभी पेपर में गड़बड़ी हुई, कभी आंसर-की पर सवाल उठे, कभी रिजल्ट बदला गया तो कभी आरक्षण और कोर्ट केस की वजह से भर्तियां अटक गईं।

 

यह भी पढ़ें: भदोही का नाम फिर से होगा संत रविदास नगर, BJP नेता खुश, कारोबारियों की बढ़ी चिंता

  • पहली-दूसरी JPSC का विवाद आज भी जारी: JPSC की पहली और दूसरी सिविल सेवा परीक्षा में हुई गड़बड़ियों की CBI जांच आज भी चल रही है। पिछले साल पहली JPSC परीक्षा की टॉपर शालिनी विजय की CBI कोर्ट में पेशी से कुछ दिन पहले कोच्चि में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। शुरुआती जानकारी में इसे खुदकुशी बताया गया था।
  • 5 साल तक नहीं हुई एक भी परीक्षा: भर्ती प्रक्रिया की सुस्ती का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि रघुवर दास सरकार के पूरे पांच साल के कार्यकाल में JPSC की एक भी सिविल सेवा परीक्षा नहीं हो सकी।
  • कंबाइंड परीक्षाएं भी विवादों से नहीं बचीं: 2019 में हेमंत सोरेन सरकार ने लंबित भर्तियां पूरी करने के लिए 7वीं से 10वीं और फिर 11वीं से 13वीं JPSC परीक्षाएं एक साथ कराईं। इन परीक्षाओं में भी देरी, कोर्ट केस और छात्रों के जोरदार विरोध-प्रदर्शन जैसे विवाद लगातार सामने आते रहे।