आर्टिफिशियल पनीर यानी एनालॉग पनीर से जुड़ी समस्याएं लगातार आने के कारण महाराष्ट्र सरकार ने इसे बेचने पर बैन लगा दिया है। महाराष्ट्र सरकार के अधिकारियों ने बताया है कि अगर किसी ने इससे जुड़े नियमों का उल्लंघन किया तो 10 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जाएगा। इतना ही नहीं, इससे जुड़े मामलों में उम्रकैद तक हो सकती है। महाराष्ट्र से पहले छत्तीसगढ़ में भी इसी तरह का बैन लगाया जाए चुका है। अधिकारियों के मुताबिक, यह फैसला खाद्य सुरक्षा मानकों के उल्लंघन और लोगों की स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं के चलते लिया गया है।
राज्य के खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) ने बताया है कि कई होटल, रेस्तरां और अन्य खाद्य प्रतिष्ठान पारंपरिक पनीर के बजाय एनालॉग पनीर का इस्तेमाल कर रहे थे लेकिन इसकी जानकारी मेन्यू, बिल या डिस्प्ले बोर्ड पर नहीं दे रहे थे। महाराष्ट्र के खाद्य सुरक्षा आयुक्त तुकाराम मुंढे की ओर से जारी राजपत्र अधिसूचना के अनुसार राज्य में एनालॉग पनीर के उत्पादन, प्रोसेसिंग, पैकिंग, भंडारण, वितरण, थोक एवं खुदरा बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया गया है।
1 साल का ही बैन क्यों?
FDA के एक अधिकारी ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के तहत इस तरह का प्रतिबंध अधिकतम एक वर्ष के लिए ही लगाया जा सकता है। अधिकारी ने कहा, 'कानून में ऐसे उत्पादों पर केवल एक साल तक ही प्रतिबंध लगाने का ही प्रावधान है। हमारी जानकारी के अनुसार ‘एनालॉग’ पनीर का पोषण मूल्य बहुत कम है। इस तरह के पनीर पर स्थायी प्रतिबंध लगाने के लिए हमारे पास कानूनी आधार नहीं है।’
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FDA ने आगाह किया है कि उपभोक्ताओं को बिना बताए एनालॉग पनीर को डेयरी पनीर के रूप में परोसना खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के तहत अनुचित व्यापार व्यवहार माना जाएगा और इसके लिए दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। FDA के अनुसार, नुकसान की गंभीरता के आधार पर दोषियों को छह महीने के कारावास और एक लाख रुपये के जुर्माने से लेकर, अगर असुरक्षित भोजन के सेवन से किसी की मृत्यु हो जाती है तो आजीवन कारावास और न्यूनतम 10 लाख रुपये के जुर्माने तक की सजा हो सकती है।
क्या है एनालॉग पनीर?
बता दें कि एनालॉग पनीर दूध के फैट के बजाय वनस्पति तेल, स्टार्च, इमल्सीफायर और अन्य योजकों से तैयार किया जाने वाला गैर-डेयरी विकल्प है। इसका उत्पादन पारंपरिक पनीर की तुलना में सस्ता होता है और इसमें आमतौर पर प्रोटीन की मात्रा भी कम होती है। कई बार यह देखा गया है कि खराब तेल और केमिकल से बनाए गए एनालॉग पनीर को खाने की वजह से लोग बीमार पड़े हैं। कई जगहों पर फूड प्वाइजनिंग के मामले भी सामने आए हैं।
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भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के विधायक विक्रम पचपुते ने सरकार के फैसले का स्वागत करते हुए इसे उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य की सुरक्षा की दिशा में अहम कदम बताया। उन्होंने सरकार से ‘चीज़ एनालॉग’ की बिक्री की भी जांच करने का आग्रह किया और आरोप लगाया कि ऐसे उत्पादों को पारंपरिक ‘चीज़’ के रूप में बेचकर उपभोक्ताओं को गुमराह किया जा रहा है।
