बिहार विधान परिषद चुनाव के लिए नेशनल डेमोक्रेटिक एलायंस (NDA) के सभी नौ उम्मीदवारों ने अपना पर्चा भर दिया है। इसके साथ ही राज्य की राजनीति में एक नया और बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। सवाल यह है कि आखिर पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश का अगला कदम क्या होगा? चुनाव में टिकट नहीं मिलने के बाद अब इस बात की खूब चर्चा हो रही है कि क्या वह अपने मंत्री पद पर बने रह पाएंगे या नहीं।
दीपक प्रकाश इस समय बिहार सरकार में मंत्री तो हैं लेकिन वह न तो विधानसभा के सदस्य हैं और न ही विधान परिषद के। इस वजह से उनके मंत्री पद को लेकर राजनीतिक हलकों में बातचीत तेज हो गई है। नियम के मुताबिक कोई भी व्यक्ति बिना चुनाव जीते छह महीने तक मंत्री रह सकता है लेकिन इस बीच उसे विधानसभा या विधान परिषद का सदस्य बनना जरूरी होता है। अगर वह छह महीने में सदस्य नहीं बन पाता है तो उसे अपना मंत्री पद छोड़ना पड़ता है।
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छह महीने की समयसीमा
मई में जब मंत्रिमंडल का विस्तार हुआ था तब दीपक प्रकाश को दोबारा मंत्री बनाया गया था। इस हिसाब से उनके छह महीने का समय इस साल नवंबर में पूरा होने जा रहा है। राजनीति के जानकारों का कहना है कि अगर नवंबर तक वह किसी भी सदन के सदस्य नहीं बनते हैं तो उनके लिए मंत्री पद बचाए रखना मुश्किल हो जाएगा। एनडीए ने विधान परिषद चुनाव के लिए बीजेपी, जेडीयू और एलजेपी के बीच सीटें बांटकर अपने सभी नौ उम्मीदवारों के नाम तय कर दिए हैं। भाजपा और जेडीयू ने चार-चार और एलजेपी ने एक उम्मीदवार उतारा है। इस लिस्ट में दीपक प्रकाश का नाम नहीं होने से इस बात को और हवा मिल गई है।
क्या हैं मुश्किलें?
राजनीतिक जानकारों के मुताबिक दीपक प्रकाश के लिए विधान परिषद का चुनाव सदन में पहुंचने का सबसे आसान रास्ता था। अब टिकट नहीं मिलने के बाद यह सवाल उठ रहा है कि एनडीए उन्हें सदन में भेजने के लिए क्या रास्ता निकालेगा। फिलहाल आने वाले समय में विधान परिषद की कोई भी सीट खाली होती नजर नहीं आ रही है जिससे उनके लिए मुश्किलें और ज्यादा बढ़ गई हैं।
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इस्तीफे की चर्चा
इस बीच विपक्षी दल भी इस पूरे मामले पर अपनी नजर रखे हुए हैं। राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी तेज है कि अगर समय रहते कोई रास्ता नहीं निकला, तो दीपक प्रकाश को मंत्री पद छोड़ना पड़ सकता है। कुछ लोगों का यह भी मानना है कि हालात को देखते हुए वह खुद ही अपने पद से इस्तीफा दे सकते हैं। हालांकि अभी तक न तो दीपक प्रकाश न उनकी पार्टी राष्ट्रीय लोक मोर्चा और न ही एनडीए की तरफ से कोई आधिकारिक बयान आया है।
