आजकल इलाज का खर्च लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में अगर अस्पताल से डिस्चार्ज के समय हाथ में लंबा-चौड़ा बिल आ जाए तो कई लोग बिना कुछ पूछे पूरा भुगतान कर देते हैं। कई बार मरीजों या उनके परिवार को लगता है कि बिल में कुछ ऐसे चार्ज भी जोड़ दिए गए हैं जिनकी पहले जानकारी नहीं दी गई थी या जिनका इलाज से कोई सीधा संबंध नहीं था। ऐसे मामलों में लोगों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही होता है कि क्या इस तरह के बिल की शिकायत की जा सकती है।

 

अगर आपको भी लगता है कि अस्पताल ने जरूरत से ज्यादा बिल बनाया है तो घबराने की जरूरत नहीं है। सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि हर बड़ा बिल गलत नहीं होता। इलाज, ऑपरेशन, आईसीयू, दवाइयों और जांचों की वजह से बिल बढ़ सकता है लेकिन अगर किसी चार्ज पर आपको शक है तो उसका पूरा हिसाब मांगना आपका अधिकार है। अगर अस्पताल सही जवाब नहीं देता तो आप इसकी शिकायत भी कर सकते हैं। सरकार ने इसके लिए कई शिकायत प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराए हैं।

 

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सबसे पहले अस्पताल से ही पूरी जानकारी लें

अगर आपको अस्पताल का बिल ज्यादा लग रहा है तो सबसे पहले बिलिंग विभाग या अस्पताल के शिकायत अधिकारी (Grievance Officer) से बात करें। उनसे हर चार्ज का अलग-अलग विवरण (Item-wise Bill) मांगें। कई बार बिल बनाते समय गलती हो जाती है या कोई चार्ज दो बार जुड़ जाता है जिसे अस्पताल वहीं ठीक कर देता है। अगर अस्पताल आपकी बात सुनता है और गलती मान लेता है तो नया बिल भी जारी किया जा सकता है। 

PG Portal (CPGRAMS) पर ऐसे करें शिकायत

अगर मामला सरकारी अस्पताल या किसी सरकारी विभाग से जुड़ा है तो आप PG Portal (CPGRAMS) पर शिकायत दर्ज कर सकते हैं।

स्टेप 1: सबसे पहले PG Portal पर जाएं।
स्टेप 2: अगर आपका अकाउंट नहीं है तो पहले रजिस्ट्रेशन करें।
स्टेप 3: लॉग इन करने के बाद "Lodge Public Grievance" विकल्प चुनें।
स्टेप 4: संबंधित मंत्रालय, विभाग या राज्य का चयन करें।
स्टेप 5: अपनी शिकायत पूरी जानकारी के साथ लिखें और अस्पताल का बिल, रसीद या दूसरे दस्तावेज अपलोड करें।
स्टेप 6: शिकायत जमा करने के बाद आपको एक रजिस्ट्रेशन नंबर मिलेगा जिससे आप बाद में उसका स्टेटस भी देख सकते हैं।

निजी अस्पताल के मामले में क्या करें?

अगर मामला किसी निजी अस्पताल से जुड़ा है तो आप National Consumer Helpline (NCH) पर भी शिकायत कर सकते हैं। यहां ऑनलाइन पोर्टल, मोबाइल ऐप, UMANG ऐप, व्हाट्सऐप या हेल्पलाइन नंबर 1915 के जरिए शिकायत दर्ज की जा सकती है। शिकायत दर्ज होने के बाद आपको एक डॉकेट नंबर मिलता है जिससे उसकी स्थिति देखी जा सकती है।

 

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शिकायत करते समय ये दस्तावेज रखें

शिकायत दर्ज करते समय कोशिश करें कि आपके पास ये दस्तावेज जरूर हों:

  • अस्पताल का पूरा बिल
  • भुगतान की रसीद
  • डिस्चार्ज समरी
  • डॉक्टर की पर्ची
  • जांच रिपोर्ट
  • अस्पताल से हुई ईमेल या लिखित बातचीत (अगर हई हो)

मरीजों को भी होते हैं अधिकार

हर मरीज को अपने इलाज और बिल की पूरी जानकारी लेने का अधिकार है। अगर किसी चार्ज को लेकर सवाल है तो अस्पताल से उसका जवाब मांग सकते हैं। अगर फिर भी समस्या का समाधान नहीं होता तो सराकरी शिकायत पोर्टल या उपभोक्ता हेल्पलाइन की मदद ली जा सकती है। सही समय पर शिकायत करने और जरूरी दस्तावेज देने से कई मामलों में समाधान मिल जाता है।