ऑर्गेनिक खेती में किसान बिना केमिकल खाद और कीटनाशकों के प्राकृतिक तरीके से फसल उगाते हैं। आजकल जैविक फसलों की मांग बढ़ रही है इसलिए कई किसान ऑर्गेनिक खेती की तरफ बढ़ रहे हैं। लेकिन अपनी फसल को जैविक बताकर बाजार में बेचने के लिए रजिस्ट्रेशन और सर्टिफिकेशन कराना जरूरी हो सकता है।

 

ऑर्गेनिक खेती के लिए किसान सरकारी नियमों के तहत रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं। इसके लिए PGS-India और NPOP जैसी प्रमाणन व्यवस्थाएं मौजूद हैं। किसान अपनी खेती और जरूरत के अनुसार सही व्यवस्था चुनकर रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं।

 

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कैसे रजिस्ट्रेशन कराएं?

PGS-India के तहत रजिस्ट्रेशन कराने के लिए किसान PGS-India पोर्टल के जरिए आवेदन कर सकते हैं। इसमें किसान को आमतौर पर पहले अपने क्षेत्र के PGS-India Local Group से जुड़ना होता है। समूह में शामिल किसान अपनी खेती और जैविक खेती के तरीकों की जानकारी साझा करते हैं। इसके बाद खेती और फसल से जुड़ी जानकारी पोर्टल पर दर्ज की जाती है और वेरिफिकेशन की प्रक्रिया पूरी होती है। 

 

वेरिफिकेशन पूरा होने पर किसान को PGS-India का जैविक प्रमाणपत्र मिल सकता है। जिसके आधार पर वह अपनी उपज को प्रमाणित जैविक उत्पाद के रूप में बेच सकता है। इसके लिए जरूरी दस्तावेजों में आमतौर पर किसान का आधार कार्ड, मोबाइल नंबर, जमीन से जुड़े दस्तावेज और खेती की जानकारी शामिल हो सकती है।

वेरिफिकेशन कैसे और कौन करता है?

PGS-India में किसान की खेती का वेरिफिकेशन उसी क्षेत्र के किसानों के समूह द्वारा किया जाता है। इसे Peer Appraisal कहा जाता है। इसके तहत आमतौर पर कम से कम किसानों की टीम खेत का निरीक्षण करती है और खेती में इस्तेमाल होने वाले तरीकों की जांच करती है। निरीक्षण के बाद टीम अपनी रिपोर्ट तैयार करती है। फिर PGS-India Local Group किसान की ऑर्गेनिक स्थिति पर फैसला करता है। इसके बाद जानकारी Regional Council (RC) को भेजी जाती है और मंजूरी मिलने पर प्रमाणपत्र जारी किया जा सकता है।

 

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कौन कर सकता है आवेदन?

PGS-India के तहत ऑर्गेनिक खेती करने वाले किसान आवेदन कर सकते हैं। किसान अकेले भी आवेदन कर सकता है लेकिन आमतौर पर उसे आसपास के PGS-India समूह से जुड़ना होता है। किसान समूह में शामिल होकर भी प्रमाणन के लिए आवेदन कर सकते हैं। इसके लिए किसान को PGS-India के जैविक खेती के नियमों का पालन करना होता है। खेत में प्रतिबंधित रासायनिक इनपुट का इस्तेमाल नहीं करना और खेती से जुड़ी जरूरी जानकारी व रिकॉर्ड उपलब्ध कराना भी प्रक्रिया का हिस्सा है।

NPOP क्या है?

NPOP का पूरा नाम National Programme for Organic Production है। यह भारत में जैविक खेती और जैविक उत्पादों के प्रमाणन के लिए बनाई गई व्यवस्था है। इसे APEDA (Agricultural and Processed Food Products Export Development Authority) लागू करता है। NPOP के तहत किसानों और अन्य जैविक उत्पादकों की खेती की जांच की जाती है। तय जैविक मानकों को पूरा करने पर उन्हें ऑर्गेनिक सर्टिफिकेट दिया जाता है। यह प्रमाणन खासतौर पर जैविक उत्पादों को बाजार में बेचने और निर्यात करने के लिए महत्वपूर्ण है।

 

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NPOP के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कैसे करें 

  • सबसे पहले APEDA के NPOP पोर्टल पर जाएं।
  • वहां I Want to Register as an Organic Operator विकल्प उपलब्ध है। 
  • किसान को NPOP से सर्टिफिकेशन बॉडी चुननी होती है। APEDA ने सर्टिफिकेशन बॉडी की सूची दी है। 
  • चुनी गई सर्टिफिकेशन बॉडी के पास आवेदन और खेती से जुड़ी जरूरी जानकारी जमा करनी होती है।
  • इसके बाद सर्टिफिकेशन बॉडी खेत का निरीक्षण और जरूरी जांच करती है। नियम पूरे होने पर NPOP के तहत ऑर्गेनिक सर्टिफिकेशन दिया जाता है।

NPOP और PGS-India में क्या अंतर है?

NPOP और PGS-India दोनों ही जैविक खेती के प्रमाणन से जुड़ी व्यवस्थाएं हैं लेकिन दोनों की प्रक्रिया अलग है। NPOP में किसान या उत्पादक को सर्टिफिकेशन बॉडी के जरिए प्रमाणन कराना होता है। इसमें खेत का निरीक्षण और तय जैविक मानकों के अनुसार जांच की जाती है। NPOP प्रमाणन का उपयोग घरेलू बाजार के साथ-साथ जैविक उत्पादों के निर्यात के लिए भी किया जाता है। वहीं PGS-India में किसानों का समूह एक-दूसरे की खेती का निरीक्षण और मूल्यांकन करता है। इसे Peer Appraisal कहा जाता है। यह व्यवस्था मुख्य रूप से स्थानीय स्तर पर किसानों को जैविक प्रमाणन उपलब्ध कराने के लिए बनाई गई है। हालांकि,  NPOP में थर्ड-पार्टी सर्टिफिकेशन बॉडी के जरिए प्रमाणन होता है, जबकि PGS-India में किसानों के समूह द्वारा आपसी मूल्यांकन किया जाता है।

 

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आम तौर पर किसान बिना किसी मान्यता प्राप्त प्रमाणन के अपनी फसल को ऑर्गेनिक बताकर बाजार में नहीं बेच सकते। FSSAI के नियमों के तहत ऑर्गेनिक फूड के लिए NPOP या PGS-India जैसी मान्यता प्राप्त प्रमाणन व्यवस्था का पालन करना होता है। हालांकि, छोटे मूल उत्पादक या उत्पादक संगठन जिनका सालाना कारोबार 12 लाख रुपए तक है और जो अपनी उपज सीधे अंतिम ग्राहक को बेचते हैं। उन्हें प्रमाणन की कुछ आवश्यकताओं से छूट दी गई है।

क्या ऑफलाइन प्रक्रिया उपलब्ध है?

ऑर्गेनिक खेती के लिए सर्टिफिकेशन कराने की ऑफलाइन प्रक्रिया भी उपलब्ध है। PGS-India के तहत किसान अपने क्षेत्र के PGS-India Local Group से संपर्क करके रजिस्ट्रेशन और वेरिफिकेशन की प्रक्रिया शुरू कर सकते हैं। वहीं NPOP के तहत किसान किसी मान्यता प्राप्त सर्टिफिकेशन बॉडी से संपर्क कर आवेदन कर सकते हैं। इसके बाद खेत का निरीक्षण किया जाता है और तय नियम पूरे होने पर ऑर्गेनिक सर्टिफिकेट जारी किया जाता है।