उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले के ब्रज इलाके में इन दिनों पवित्र 84 कोस परिक्रमा चल रही है। इस परिक्रमा के दौरान मांट क्षेत्र में एक बहू अपनी 90 साल की बुजुर्ग सास को प्लास्टिक के टब में बैठाकर अपने सिर पर उठाकर यात्रा कर रही है। वह इस तेज धूप और गर्मी में अपनी सास को सिर पर उठाकर पैदल परिक्रमा कराने निकली है। रास्ते में जिसने भी इस नजारे को देखा वह दंग रह गया। अब इस घटना की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहे हैं और लोग बहू के इस कदम की तारीफ कर रहे हैं।

 

बुजुर्ग सास का नाम चन्द्री देवी है और उनकी उम्र 90 साल है। चन्द्री देवी की इच्छा थी कि वह ब्रज मंडल की पवित्र 84 कोस परिक्रमा पूरी करें। लेकिन बुढ़ापे और कमजोरी के कारण वह ठीक से चल-फिर नहीं सकती थीं। उनके लिए इतनी लंबी दूरी पैदल चलना मुमकिन नहीं था। वह अक्सर अपनी यह इच्छा अपने परिवार के सामने बताती थीं। जब उनकी बहू काजल ने अपनी सास की इस इच्छा को सुना तो उसने खुद अपनी सास को परिक्रमा कराने का फैसला किया।

 

यह भी पढ़ें: VIP काफिले के लिए रोका ट्रैफिक, प्रेग्नेंट बीवी को लेकर फंसे शख्स ने किया हंगामा

हरियाणा से ब्रज तक का सफर

यह परिवार मूल रूप से हरियाणा का रहने वाला है। बहू काजल हरियाणा के होडल क्षेत्र के पास 'हताना' गांव की रहने वाली है और वह एक हरियाणवी लोक गायिका हैं। अपनी सास की इच्छा पूरी करने के लिए काजल उन्हें लेकर मथुरा के ब्रज इलाके में पहुंची। काजल ने पिछले रविवार को 'बंचारी' गांव से अपनी इस परिक्रमा की शुरुआत की थी। वह अपनी बुजुर्ग सास को प्लास्टिक के टब में बैठाकर अपने सिर पर उठाकर लगातार चलती रही। मंगलवार की दोपहर को यह सास-बहू मथुरा के मांट इलाके में मौजूद 'नसीटी' गांव के पास पहुंचे।

 

 

यह भी पढ़ें: रूस से बहू बनकर भारत आई, ससुराल वालों ने कराए ऐसे काम, बदल गई जिंदगी

रास्ते में लोगों की बातचीत 

रास्ते में चलते हुए जब दूसरे यात्रियों और स्थानीय लोगों ने काजल को देखा तो वे रुक गए। कुछ लोगों ने काजल से बात करने की कोशिश की और उनका नाम-पता पूछना चाहा।  उस समय काजल ने अपना नाम और पहचान बताने से मना कर दिया था क्योंकि वह बिना किसी दिखावे के बस अपनी यात्रा पूरी करना चाहती थी। बाद में लोगों को उनके बारे में पता चला। जब लोगों ने काजल से पूछा कि क्या उन्हें ऐसा करने में कोई परेशानी या दर्द नहीं हो रहा है तो काजल ने कहा कि उन्हें अपनी सास को सिर पर उठाने में कोई परेशानी  नहीं हो रहा है बल्कि मन में इस बात की खुशी है कि उनकी सास की इच्छा पूरी हो रही है।