केंद्र सरकार ने हाल ही में E22 से लेकर E30 तक के एथेनॉल मिले पेट्रोल पर लगने वाला एक्साइज ड्यूटी खत्म करने का फैसला किया है। प्रदूषण कम करने और महंगे कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता घटाने के लिए सरकार का यह कदम काफी बड़ा और बदलाव लाने वाला माना जा रहा है। इसके बाद लोगों के बीच यह सवाल उठने लगा है कि ज्यादा एथेनॉल वाला पेट्रोल कार और बाइक के इंजन के लिए सही रहेगा या इससे गाड़ियों को कोई नुकसान भी हो सकता है।

 

दरअसल, E22 का मतलब 22 प्रतिशत एथेनॉल और 78 प्रतिशत पेट्रोल का मिश्रण है, जबकि E30 में 30 प्रतिशत एथेनॉल और 70 प्रतिशत पेट्रोल होता है। सरकार का उद्देश्य पेट्रोलियम आयात पर निर्भरता घटाना और घरेलू एथेनॉल उद्योग को बढ़ावा देना है। हालांकि, वाहन मालिकों के लिए सबसे बड़ा सवाल इंजन की सुरक्षा को लेकर है।

 

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BIS मानक क्या होते हैं?

इस मामले में सबसे अहम भूमिका भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) की होती है। BIS देश में बनने वाले प्रोडक्ट्स और ईंधन की क्वालिटी और सुरक्षा के मानक तय करता है। हाल ही में BIS ने E22, E25, E27 और E30 पेट्रोल के लिए अलग-अलग तकनीकी मानक जारी किए हैं।

 

इन मानकों में यह तय किया गया है कि पेट्रोल की गुणवत्ता कैसी होगी, उसकी ऑक्टेन रेटिंग कितनी होगी, वह कितनी आसानी से एवापोरेटर होगा, उसमें पानी की मात्रा कितनी होनी चाहिए और उसके दूसरे रासायनिक गुण क्या होंगे। इसका मकसद यह है कि जो भी ईंधन इस्तेमाल हो वह सुरक्षित हो और उसकी गुणवत्ता हर जगह एक जैसी और नियंत्रित रहे।

 

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क्या E22 और E30 से वाहन को नुकसान होगा?

अगर वाहन कंपनी ने पहले से E22 या E30 जैसे एथेनॉल-मिश्रित पेट्रोल के लिए गाड़ी को मंजूरी दी है तो सामान्य हालात में इससे इंजन को कोई नुकसान नहीं होता। BIS के मानक भी यही सुनिश्चित करते हैं कि ऐसा ईंधन सुरक्षित रहे। वहीं दूसरी ओर पुराने वाहनों में ज्यादा एथेनॉल मिला पेट्रोल थोड़ा परेशानी पैदा कर सकता है। एथेनॉल कुछ रबर, प्लास्टिक और धातु के पार्ट्स पर असर डाल सकता है। साथ ही, इसमें पेट्रोल के मुकाबले थोड़ी कम ऊर्जा होती है इसलिए माइलेज थोड़ा कम हो सकता है।

कैसे सुरक्षित करें अपनी गाड़ी?

गाड़ी या बाइक चलाने वालों को सबसे पहले अपनी कंपनी की दी हुई गाइडलाइन देखनी चाहिए। अगर कंपनी ने E20, E22 या उससे ज्यादा एथेनॉल मिले पेट्रोल की अनुमति दी है तो ऐसे एथेनॉल वाले पेट्रोल इस्तेमाल करने में कोई खास दिक्कत नहीं होती। एक्सपर्ट्स के मुताबिक BIS स्टैंडर्ड के तहत बने E22 और E30 पेट्रोल की क्वालिटी ठीक और सुरक्षित मानी जाती है। इसलिए नुकसान का खतरा पेट्रोल से नहीं बल्कि इस बात पर निर्भर करता है कि आपकी गाड़ी उस फ्यूल के लिए बनी है या नहीं। मतलब साफ है अगर सही गाड़ी में सही पेट्रोल डाला जाए तो E22 या E30 से इंजन को नुकसान होने की संभावना बहुत कम होती है।