डिजिटल पेमेंट की सबसे बड़ी खूबी अभी तक यह बताई जाती थी कि इसके लिए कोई अतिरिक्त चार्ज नहीं लगता। कुछ कंपनियों ने पैसे लेने की शुरुआत कर दी है लेकिन यूनाइटेड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) के जरिए लेन-देन अभी भी फ्री है। अब ऐसा लगता है कि यह फ्री लेन-देन ज्यादा दिन नहीं चलने वाला है। इसके पीछे की वजह है कि केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार UPI लेन-देन पर 0.25 प्रतिशत से 0.4 प्रतिशत का मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) वसूलने की अनुमति दे सकती है। साथ ही, अनुमान है कि 2000 रुपये से ज्यादा की पेमेंट पर 5 प्रतिशत का शुल्क लगाया जा सकता है। इसका असर यह होगा कि अगर आप किसी कारोबारी/बिजनेस को 2000 रुपये भेजते हैं तो आपको 100 रुपये अतिरिक्त यानी कुल 2100 रुपये खर्च करने पड़ेंगे।
अभी तक के प्रस्ताव के मुताबिक, एक शख्स से दूसरे शख्स को भेजे गए पैसों के लिए यह चार्ज लागू नहीं होगा। यानी अगर आप किसी दुकान पर पेमेंट करेंगे तो पैसे लगेंगे लेकिन अगर आप किसी दोस्त, रिश्तेदार या अन्य इंडिविजुअल को पैसे भेजेंगे तो पैसे नहीं देने होंगे। इसके संबंध में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने द टैक्सेशन एंड अदर लॉज़ (अमेंडमेंट) बिल मंगलवार को संसद में पेश किया। इसी संशोधन के जरिए पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स ऐक्ट, 2007 में बदलाव किया जाना है। प्रस्तावित संशोधनों के जरिए बैंकों और पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स के पैसे वसूलने पर लगी रोक हटाई जानी है। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि इसे कब से लागू किया जा सकता है।
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कितना पड़ सकता है असर?
आधिकारिक अनुमानों के मुताबिक, 2000 से ऊपर के पेमेंट पर 5 प्रतिशत का शुल्क लगाया जाता है। बता दें कि बीते जुलाई महीने में भारत में कुल 2366 करोड़ UPI लेन-देन हुए। इसमें 65 प्रतिशत हिस्सेदारी ऐसे लेन-देन की होती है जो 2000 रुपये से ज्यादा के होते हैं। ऐसे में अगर यह शुल्क लगाया जाता है तो इसका असर आम ग्राहक पर ही पड़ेगा। इसके बारे में एक अधिकारी का कहना है, 'अगर इसे लागू भी किया गया तो 95 प्रतिशत लेन-देन पर MDR लागू नहीं होगा।' चर्चा है कि यह शुल्क सिर्फ उन दुकानदारों पर लागू किया जा सकता है जिनका सालाना कारोबार 1.5 करोड़ या उससे ज्यादा हो।
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अगर यह नियम लागू होता है तो छोटे दुकानदारों, ठेलेवालों और अन्य छोटे स्तर के कारोबारियों को राहत मिल सकती है। बता दें कि मौजूदा वक्त में यह MDR क्रेडिट कार्ड और डेबिट कार्ड पर लागू होता है लेकिन ज्यादातर दुकानदार ग्राहकों से पैसे नहीं वसूलते। हालांकि, कई बार यह देखने को भी मिलता है कि कैश के बजाय कार्ड से पेमेंट करने पर दुकानदार ग्राहक से ही 1.5 से 2 पर्सेंट पैसे अतिरिक्त ले लेते हैं।
क्यों हो रही ऐसी कोशिश?
दरअसल, अभी तक UPI पर कोई पैसा नहीं लिया जाता है और इसके चलते इसका कोई वित्तीय मॉडल नहीं है। UPI लगातार बढ़ता जा रहा है और इसे बढ़ाने के साथ-साथ जारी रखने के लिए भी पैसों की जरूरत है। पेमेंट्ट काउंसिल ऑफ इंडिया (PCI) ने इसी बारे में मार्च 2025 में केंद्र सरकार को एक चिट्ठी लिखी थी और मांग की थी कि वह 'जीरो MDR नीति' पर फिर से विचार करे। PCI ने यह भी कहा था कि UPI सेवाओं के लिए सालाना लगभग 10 हजार करोड़ रुपये खर्च होते हैं और उसकी तुलना में सरकार की ओर से मिलने वाले 1500 करोड़ का इंसेंटिव नाकाफी है। इसी के लिए PCI ने ही प्रस्ताव दिया था कि बड़े कारोबारियों से 0.3 प्रतिशत के MDR को मंजूरी दी जाए।
