भारत में बुजुर्गों की बढ़ती आबादी को लेकर कुछ लोग चिंता जाहिर कर रहे हैं। मौजूदा समय में भारत दुनिया में सबसे ज्यादा युवा आबादी वाला देश है लेकिन आने वाले कुछ सालों में युवाओं की तुलना में बुजुर्ग आबादी भी काफी ज्यादा बढ़ जाएगी। इस स्थिति को कुछ लोग भारत के लिए मुश्किल भरी बता रहे हैं लेकिन कुछ जानकारों का कहना है कि इसके साथ सिल्वर इकोनॉमी भी तेजी से उभर रही है। इसमें लोगों को रोजगार ज्यादा मिलेगा और बुजुर्ग आबादी इकोनॉमी पर बोझ नहीं बनेगी।
आसान भाषा में समझें तो सिल्वर इकोनॉमी का मतलब ऐसे कारोबार और सेवाओं से है, जो बुजुर्गों की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किए जाते हैं। इसमें स्वास्थ्य देखभाल से लेकर घर पर मदद, मनोरंजन, यात्रा, वित्तीय सेवाएं और रोजमर्रा के कामों में सहायता जैसी कई सुविधाएं शामिल हैं। जानकारों के मुताबिक, आने वाले समय में यह क्षेत्र रोजगार के बड़े अवसर पैदा कर सकता है।
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क्या है पूरा मामला?
दरअसल, भारत में 60 साल और उससे अधिक उम्र के लोगों की संख्या लगातार बढ़ रही है। ऐसे में बुजुर्गों की देखभाल और उनकी जरूरतों को पूरा करने के लिए ट्रेनड लोगों की मांग भी बढ़ रही है। अकेले रहने वाले बुजुर्गों के लिए घर पर स्वास्थ्य सेवाएं, दवा पहुंचाना, खाना बनाना, साफ-सफाई, अस्पताल ले जाना और रोजमर्रा के कामों में मदद जैसी सेवाओं की जरूरत बढ़ रही है। भारत में अब छोटे परिवारों का ज्यादा चलन बढ़ रहा है जिसके कारण बुजुर्ग अकेले रह रहे हैं। इसके कारण बुजुर्गों की यही जरूरतें सिल्वर इकोनॉमी को एक बड़े रोजगार क्षेत्र में बदल रही हैं।
कहां-कहां मिल सकती है नौकरी?
इस क्षेत्र में सबसे ज्यादा अवसर स्वास्थ्य और देखभाल से जुड़ी सेवाओं में बन सकते हैं। नर्सिंग, फिजियोथेरेपी, मेडिकल अटेंडेंट, होम केयर और बुजुर्गों की देखभाल करने वाले प्रशिक्षित कर्मचारियों की मांग बढ़ सकती है। इसके अलावा बुजुर्गों के लिए फिटनेस, मानसिक स्वास्थ्य, काउंसलिंग और रोज के काम में सहायता देने वाले लोगों की भी जरूरत होगी।
बहुत बड़ी है सिल्वर इकोनॉमी
सिल्वर इकोनॉमी सिर्फ अस्पताल और हेल्थकेयर तक सीमित नहीं है। सीनियर सिटीजन के लिए यात्रा, मनोरंजन, डिजिटल सेवाएं, वित्तीय सलाह, बीमा, कानूनी मदद और घर को बुजुर्गों के अनुकूल बनाने जैसे क्षेत्रों में भी रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं। तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल के साथ ऐसे युवाओं की जरूरत भी बढ़ेगी, जो बुजुर्गों को ऑनलाइन बैंकिंग, डिजिटल भुगतान, मोबाइल और सरकारी सेवाओं का इस्तेमाल करना सिखा सकें।
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किस स्किल की होगी जरूरत
इस क्षेत्र में रोजगार पाने के लिए हर काम में बड़ी डिग्री जरूरी नहीं है। केयरगिविंग, नर्सिंग, फिजियोथेरेपी, पैरामेडिकल, काउंसलिंग और बुजुर्गों की देखभाल से जुड़े शॉर्ट-टर्म कोर्स किए जा सकते हैं। वहीं, अगर किसी को डिजिटल सेवा, वित्तीय सलाह, ट्रैवल या हॉस्पिटैलिटी में रुचि है तो वह भी वरिष्ठ नागरिकों को ध्यान में रखकर इस क्षेत्र में काम कर सकता है। भारत की बदलती उम्र की आबादी सिर्फ स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए चुनौती नहीं है, बल्कि रोजगार का नया बाजार भी तैयार कर रही है।
