ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (AIUDF) के अध्यक्ष बदरुद्दीन अजमल ने कांग्रेस की तुलना मुस्लिम लीग से की है। असम में कांग्रेस के जीते हुए विधायकों के नाम, यह इशारा कर रहे हैं कि बदरुद्दीन अजमल ने ऐसी बात क्यों कही है, जबकि वह खुद, मुसलमानों की राजनीति करते हैं। कांग्रेस की अल्पसंख्यक राजनीतिक, अब कई राज्यों में कांग्रेस के लिए मुश्किलें पैदा कर रही है। 

भारतीय जनता पार्टी, यह नजरिया लोगों तक पहुंचाने में कामयाब हुई है कि कांग्रेस हिंदू विरोधी राजनीति कर रही है। असम से लेकर पश्चिम बंगाल तक, कांग्रेस को सियासी तौर पर झटका ही मिला है। चुनाव के नतीजे भी इस ओर इशारा कर रहे हैं कि अब कांग्रेस के साथ अल्पसंख्यक ही बचे हैं, जबकि बहुसंख्यक हिंदू समाज, भारतीय जनता पार्टी या अन्य राजनीतिक दलों की तरफ शिफ्ट हो गया है। 

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क्यों मुस्लिम लीग बता रहे हैं बदरुद्दीन अजमल? 

कांग्रेस ने असम की कुल 126 विधानसभा सीटों में 20 से ज्यादा सीटों पर मुस्लिम उम्मीदवारों को उतारा था। साल 2011 की जनगणना के मुताबिक, असम की कुल मुस्लिम आबादी 31 फीसदी के आसपास है। कांग्रेस ने हिंदुत्व की राजनीति को लेकर बीजेपी की आलोचना की। बीजेपी ने तुष्टीकरण पर कांग्रेस को जमकर घेरा।

कांग्रेस को असम में 29 फीसदी से ज्यादा वोट मिले। असम में कांग्रेस पार्टी के 19 विधायक जीते हैं। 19 में से 18 विधायक मुसलमान हैं। पश्चिम बंगाल में कांग्रेस की 2 सीटें आईं हैं, दोनों विधायक मुसलमान हैं। तमिलनाडु में एक मुसलमान विधायक है। केरल में 7 से ज्यादा मुस्लिम विधायक हैं। केरल वही राज्य है, जहां इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग के साथ कांग्रेस का गठबंधन है।

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असम कांग्रेस के जीते हुए मुस्लिम विधायक कौन हैं?

  • परबतझोरा: एमडी अशरफुल इस्लाम शेख
  • गौरीपुर: अब्दुस सोबहान अली सरकार
  • धुबरी: बेबी बेगम
  • वीरसिंह जरुआ: वाजेद अली चौधरी
  • मनकाचार: मोहिबुर रहमान (बप्पी)
  • जलेश्वर: आफताबुद्दीन मुल्ला
  • गोवालपाड़ा ईस्ट: अबुल कलाम राशिद आलम
  • श्रीजनग्राम: एमडी. नुरुल इस्लाम
  • चेंगा: अब्दुर रहीम अहमद
  • पाकाबेटबाड़ी: जाकिर हुसैन सिकदार
  • चामरिया: रेकीबुद्दीन अहमद
  • लहरीघाट: डॉ. आसिफ मोहम्मद नजर
  • रूपहीहाट : नुरुल हुदा
  • समागुरी: तंजील हुसैन
  • सोनाई: अमीनुल हक लस्कर
  • अलगापुर-कटलीचेरा: जुबैर अनाम मजूमदार
  • करिमगंज नॉर्थ: जाकारिया अहमद
  • करिमगंज साउथ: अमीनुर राशिद चौधरी

कांग्रेस के जीते हुए इकलौते हिंदू विधायक डॉ. जय प्रकाश दास हैं। वह नौबेचा से विधायक चुने गए हैं। राज्य में सीएम उम्मीदवार गौरव गोगोई, अपनी विधानसभा जोरहाट तक नहीं बचा सके हैं। 

मुस्लिम लीग वाली कहानी यह है 

बदरुद्दीन अजमल ने कांग्रेस की तुलना मुस्लिम लीग से की है। मुस्लिम लीग कहानी की वजह भी दिलचस्प है। बदरुद्दीन अजमल को कांग्रेस, बीजेपी की बी टीम बताती रही है। कांग्रेस ने चुनाव में बार-बार कहा कि बदरुद्दीन सांप्रदायिक राजनीति करते हैं, जो हिंदू ध्रुवीकरण में मदद करती है। ठीक एक चुनाव पहले कांग्रेस गठबंधन में चुनाव लड़ चुके बदरुद्दीन के लिए यह असहज करने वाला है।

बदरुद्दीन अजमल भी अल्पसंख्यक बांगला भाषी मुसलमानों के नेता हैं। वह अल्पसंख्यक राजनीति भी करते हैं। अब इसी वोटबैंक के एक बड़े वर्ग में कांग्रेस ने सेंध लगा दी है। असम कांग्रेस को अल्पसंख्यकों का साथ मिला है। राहुल गांधी के नारे 'नफरत के बाजार में मोहब्बत की दुकान' का यहां असर दिखा। अलग बात है कि 20 से ज्यादा सिर्फ मुस्लिम उम्मीदवार देखकर, असम कांग्रेस के हिंदुओं का मोहभंग हो गया। 

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क्या असम के मुस्लिमों को साध पाई कांग्रेस?

साल 2011 की जनगणना बताती है कि असम की कुल आबादी में 35 फीसदी मुसलमान हैं। असम में कुल विधानसभा सीटों की संख्या 126 है। 30 से ज्यादा सीटों पर मुसलमान वोटर जीत हार तय करते हैं। इनमें से 19 सीटें कांग्रेस ने जीत लीं। AIUDF ने भी दो सीटों पर जीत दर्ज की। कांग्रेस को अल्पसंख्यक बाहुल सीटों में 10 से ज्यादा सीटों का नुकसान हुआ। असम में कांग्रेस ने दमखम तो दिखाया लेकिन ओवैसी और बदरुद्दीन अजमल वाले फैक्टर ने नुकसान भी कराया। 

असम में कांग्रेस के हिंदू उम्मीदवार हारे क्यों?

असम में भारतीय जनता पार्टी ने घुसपैठ को चुनावी मुद्दा बनाया। कांग्रेस पर आरोप लगाया कि कांग्रेस, घुसपैठियों को शरण देती है, मुस्लिमों का तुष्टीकरण करती है और हिंदू आबादी खतरे में है। हिमंता बिस्व सरमा, सार्वजनिक सभाओं में बार-बार यह राग अलापते नजर आए कि असम की डेमोग्राफी बदल रही है।

 

हिमंता का कहना था कि जिस हिसाब से मुसलमानों की आबादी बढ़ रही है, हिंदुओं की आबादी नहीं बढ़ रही है। असम में जनसांख्यिकी असंतुलन की स्थिति पैदा हो रही है। उन्होंने सीमाई इलाकों में हथियार देने तक की पैरवी कर दी। कांग्रेस इनका मुखर होकर विरोध करती रही। 
 
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री हिमंता बिस्व सरमा जैसे नेता बार-बार दोहराते रहे कि धुबरी, बारपेटा, दरांग, मारिगांव, बोंगाईगांव, नौगांव और गोलपारा जैसे जिले घुसपैठिए बाहुल हो गए हैं। कांग्रेस के 20 साल के अंदर यहां 64 लाख घुसपैठिये की आबादी हो गई है। दिलचस्प बात यह है कि जिन सीटों पर कांग्रेस के उम्मीदवार जीते हैं, वे इन्हीं जिलों से आते हैं।