दुनिया में विकास की रफ्तार तेजी से बढ़ रही है। विज्ञान नई ऊंचाइयां छू रहा है और तकनीक लोगों का जीवन आसान बना रहा है। मेडिकल की दुनिया में भी लगातार नई खोज हो रही है, जिनसे गंभीर बीमारियों का इलाज आसान हुआ है। हालांकि, इस चमकती तस्वीर के पीछे कुछ ऐसे खतरे भी छिपे हैं, जो आने वाली पीढ़ी की जिंदगी और सेहत के लिए बड़ा खतरा बन सकती हैं। हाल ही में आई द लैंसेट रिपोर्ट में ऐसे ही 17 बड़े खतरों की पहचान हुई है। 

 

ऐसे में साल 2100 तक दुनिया के लोगों की सेहत कैसी होगी, यह केवल नई बीमारियों या इलाज की सुविधाओं पर ही निर्भर नहीं करेगा। जलवायु परिवर्तन, परमाणु युद्ध, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का गलत इस्तेमाल, बढ़ती आर्थिक असमानता और मोटापा जैसे खतरे भी आने वाली पीढ़ियों की जिंदगी पर गहरा असर डाल सकते हैं। 

 

इनमें से मोटापा भविष्य में स्वास्थ्य पर सबसे भारी बोझ डालने वाले खतरों में शामिल है। प्रभावी कदम उठाकर साल 2100 तक मोटापे से जुड़े करीब 23.1 अरब स्वस्थ जीवन-वर्षों के नुकसान को टाला जा सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक, आज लिए जाने वाले फैसले तय करेंगे कि साल 2100 तक दुनिया के लोगों को कितने स्वस्थ साल मिलेंगे और कितने बीमारी, कितने लोग विकलांगता या असमय मौत की भेट चढ़ जाएंगे। 

 

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सेहत और जीवन के लिए 17 सबसे बड़े खतरे

इन 17 खतरों को किसी खास क्रम में नहीं रखा गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, सभी खतरों पर ध्यान देना जरूरी है, क्योंकि एक खतरा दूसरे खतरे को बढ़ा सकता है। 

  • मोटापा: बढ़ता मोटापा भविष्य में स्वास्थ्य संबंधी नुकसान का बड़ा कारण बन सकता है।
  • AI का गलत इस्तेमाल: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का गलत इस्तेमाल बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचा सकता है।
  • परमाणु संघर्ष: परमाणु हथियारों के इस्तेमाल से बड़े पैमाने पर मौतें और स्वास्थ्य संबंधी नुकसान हो सकते हैं।
  • वायु प्रदूषण: प्रदूषित हवा लोगों की सेहत के लिए गंभीर खतरा है, जो आगे गंभी हो सकता है।
  • एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (AMR): रोगाणुओं पर दवाओं का असर कम होना इलाज को मुश्किल बना सकता है।
  • बचपन में कुपोषण: बच्चों को भरपूर पोषण नहीं मिलने से उनके स्वास्थ्य पर लंबे समय तक असर पड़ सकता है।
  • जलवायु परिवर्तन: बढ़ता तापमान और इससे जुड़े बदलाव स्वास्थ्य को प्रभावित करेंगे।
  • युद्ध और संघर्ष: युद्ध के कारण लोगों की जान, स्वास्थ्य और सुरक्षा को नुकसान पहुंचता है।
  • स्वास्थ्य के लिए विकास सहायता में कमी: स्वास्थ्य सेवाओं के लिए मिलने वाली अंतरराष्ट्रीय सहायता घटने से कई देशों में इलाज और रोकथाम की क्षमता प्रभावित हो सकती है।
  • अधिक शराब का सेवन: ज्यादा शराब पीना स्वास्थ्य के लिए एक बड़ा जोखिम है।
  • हाई ब्लड प्रेशर: उच्च रक्तचाप लंबे समय में गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ाता है।
  • आय में असमानता: अमीर और गरीब के बीच बढ़ता आर्थिक अंतर स्वास्थ्य सुविधाओं और जीवन की गुणवत्ता पर असर डाल सकता है।
  • शिक्षा का निम्न स्तर: शिक्षा की कमी का असर स्वास्थ्य संबंधी जानकारी, फैसलों और जीवन की संभावनाओं पर पड़ सकता है।
  • प्राकृतिक रूप से फैलने वाली महामारियां: नई या दोबारा फैलने वाली महामारियां बड़े पैमाने पर स्वास्थ्य संकट पैदा कर सकती हैं।
  • खराब मानसिक स्वास्थ्य: मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं लोगों की जिंदगी और सेहत पर असर डालती हैं।
  • धूम्रपान: तंबाकू का सेवन स्वास्थ्य के लिए एक गंभीर खतरा बना हुआ है।
  • अस्वस्थ तरीके से बढ़ती उम्र: उम्र बढ़ने के साथ स्वास्थ्य और कार्यक्षमता से जुड़ी समस्याएं भी महत्वपूर्ण चुनौती बन सकती हैं। 

इनमें से आयोग ने दो ऐसे खतरों की पहचान की है, जिनमें इंसानों के अस्तित्व को खत्म करने तक की क्षमता है। पहला है आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का गलता इस्तेमाल और दूसरा है परमाणु संघर्ष। रिपोर्ट के मुताबिक, सरकारें, फंड देने वाली संस्थाएं और उद्योग नीतियों में बदलाव, वित्तीय निवेश और नई तकनीकों के जरिए इन खतरों को कम करने के लिए कदम उठा सकती हैं।

खतरों से निपटने का क्या दिया गया सुझाव? 

इन 17 खतरों से होने वाले स्वास्थ्य नुकसान का आकलन करने के लिए सबसे अच्छी और सबसे खराब संभावित स्थिति की तुलना की गई है, जिसके लिए DALYs का इस्तेमाल किया गया, यानी बीमारी, विकलांगता और समय से पहले मौत के कारण गंवाए गए स्वस्थ जीवन का साल, जिन्हें सही कदम उठाकर बचाया जा सकता है। ऐसे में किसी खतरे को गंभीर मानने के लिए साल 2100 तक कम से कम एक अरब DALYs के नुकसान की आशंका, पर्याप्त आंकड़े और उसे कम करने की गुंजाइश जरूरी मानी गई। 

 

आयोग के सह-अध्यक्ष प्रोफेसर क्रिस्टोफर मरे के मुताबिक, आज लिए गए फैसले आने वाली पीढ़ियों की सेहत तय करेंगे और देरी से नुकसान बढ़ेगा। रिपोर्ट के अनुसार, इन खतरों का असर देशों और समाज के कमजोर तबकों पर अलग-अलग हो सकता है। सभी 17 खतरे एक-दूसरे से जुड़े हैं, इसलिए उनसे एक साथ निपटना जरूरी है। 

 

रिपोर्ट के मुताबिक, ज्यादातर स्वास्थ्य खतरों से निपटने के उपाय पहले से मौजूद हैं। जरूरत है उन्हें बड़े स्तर पर लागू करने और नई तकनीकों पर निवेश बढ़ाने की। इसके लिए 3 बड़े सुझाव दिए गए हैं। 

 

1. स्वास्थ्य व्यवस्था मजबूत करना: खतरों की समय रहते पहचान, रोकथाम और उनसे निपटने की तैयारी करें। इसके लिए नियमित फंडिंग जरूरी है, ताकि कमजोर तबकों तक भी स्वास्थ्य सेवाएं पहुंच सकें।

 

2. नई खोजों में निवेश करें: नई वैक्सीन, एंटीबायोटिक्स, मोटापे के इलाज और जलवायु तकनीकों पर शोध बढ़ाएं। इन सुविधाओं को सभी तक पहुंचाना भी जरूरी है।

 

3. खतरों पर नजर रखें: नए जोखिमों की नियमित जांच करें और उनसे जुड़ी जानकारी स्वास्थ्य, वित्त और सुरक्षा से जुड़े विभागों तक पहुंचाएं।