अमेरिका में 3 नवंबर को हुए मिडटर्म इलेक्शन के नतीजों और रुझानों ने देश के साथ-साथ पूरी दुनिया का ध्यान खींच लिया है। इस चुनाव में भारतीय मूल के उम्मीदवारों का प्रदर्शन काफी चर्चा में है। फ्लोरिडा के 22वें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट से डेमोक्रैटिक उम्मीदवार पिया डांडिया ने अपने रिपब्लिकन प्रतिद्वंद्वी केसी असकार को हराकर हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में जगह बना ली है। पिया को लगभग 51.9 से 52.2 फीसदी वोट मिले। वहीं, पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के सलाहकार रह चुके सुहास सुब्रमण्यम ने वर्जीनिया के 10वें संसदीय क्षेत्र से 61.5 फीसदी से अधिक वोट हासिल कर एक बार फिर से प्रतिनिधि सभा में जगह बना ली है।
दूसरी तरफ, कई प्रमुख भारतवंशी उम्मीदवारों के मुकाबले अभी फंसे हुए हैं। ओहियो के गवर्नर पद के लिए लड़ रहे रिपब्लिकन नेता और डोनाल्ड ट्रंप के समर्थक विवेक रामास्वामी अपनी डेमोक्रेटिक प्रतिद्वंद्वी एमी एक्टन से हार गए हैं। इसके अलावा एरिजोना से अमिश शाह, लॉस एंजिल्स के मेयर पद की दौड़ में नित्या रमन और न्यूयॉर्क के अटॉर्नी जनरल पद की उम्मीदवार सरिता कोमारेड्डी की सीटों पर काउटिंग जारी है। अभी फिलहाल अंतिम नतीजों का इंतजार किया जा रहा है। अन्य प्रमुख नतीजों में इलिनॉय के गवर्नर पद पर डेमोक्रेटिक पार्टी के जे.बी. प्रित्जकर ने जीत दर्ज की है।
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भारतीय मूल के उम्मीदवारों का क्या रहा हाल?
पिया डांडिया ने फ्लोरिडा की ओपन सीट से चुनाव लड़ा है। वह केसी असकार को हरा कर अमेरिकी कांग्रेस की नई भारतीय मूल की सदस्य बनी हैं। इसके बाद सुहास सुब्रमण्यम ने वर्जीनिया के 10वें संसदीय क्षेत्र रिपब्लिकन उम्मीदवार डेव बेकविथ को बड़े अंतर से हराकर दोबारा सांसद चुने गए। वहीं विवेक रामास्वामी ओहियो सीट से शुरुआती रुझानों में एमी एक्टन के मुकाबले 35-36% वोटों के साथ पिछड़ रहे थे। अंतिम नतीजों के हिसाब से विवेक हार गए हैं।
एरिजोना के पहले कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट में रिपब्लिकन जे फीली और अमिश शाह के बीच कांटे का मुकाबला है। लॉस एंजिल्स के मेयर पद के लिए नित्या रमन मौजूदा मेयर कैरेन बास को कड़ी टक्कर दे रही हैं। फिलहाल उन्हें नतीजे का इंतजार है। सरिता कोमारेड्डी को भी फिलहाल इंतजार ही करना पड़ रहा है। वह न्यूयॉर्क अटॉर्नी जनरल पद के लिए मौजूदा अटॉर्नी जनरल लेटिटिया जेम्स की चुनौती का सामना कर रही हैं।
क्यों होता है अमेरिका में मिडटर्म इलेक्शन?
अमेरिका में राष्ट्रपति का कार्यकाल 4 साल का होता है। इसी के साथ हर 2 साल में मिडटर्म चुनाव कराए जाते हैं। इसमें हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स यानी की निचले सदन की सभी 435 सीटों पर हर 2 साल में चुनाव होता है। ऊपरी सदन यानी सीनेट के कुल 100 सदस्यों में से एक-तिहाई पर चुनाव होता है। इस बार 35 सीटों के लिए चुनाव हो रहा है। इसी के साथ ही कई राज्यों में अन्य पदों जैसे गवर्नर और स्थानीय निकायों के लिए चुनाव होते हैं।
ट्रंप की बहुमत दांव पर
यह चुनाव राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनकी रिपब्लिकन पार्टी के लिए बड़ी परीक्षा है। फिलहाल रिपब्लिकन पार्टी का दोनों सदनों में बहुमत है। हाउस में 218 के बहुमत आंकड़े के मुकाबले 219 सीटें और सीनेट में 51 के आंकड़े के मुकाबले 53 सीटें। अगर चुनावी इतिहास की बात करें तो पिछले 20 में से 18 मिडटर्म चुनावों में सत्ताधारी राष्ट्रपति की पार्टी को हार का सामना करना पड़ा है। अभी तक केवल 1998 में बिल क्लिंटन और 2002 में जॉर्ज बुश अपवाद के तौर पर जीते है। अगर रिपब्लिकन पार्टी बहुमत गंवाती है तो राष्ट्रपति ट्रंप के लिए नए कानून पास कराना बेहद मुश्किल हो जाएगा।
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इस बार चुनाव के दिन से पहले ही 5.70 करोड़ से अधिक लोगों ने वोट डाला। यह जो 2022 के 4.60 करोड़ के आंकड़े के मुकाबले से काफी ज्यादा है। इसी बीच, कैलिफॉर्निया के 20 हजार विवादित मेल-इन बैलेट की गिनती रोकने के लिए ट्रंप प्रशासन ने सुप्रीम कोर्ट में एक अपील की थी। इसे अदालत ने खारिज कर दिया।
इस चुनाव में मतदाताओं के बीच बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी, टैक्स में कटौती और इमिग्रेशन सबसे बड़े मुद्दे रहे। इसके अलावा विदेश नीति के मोर्चे पर ईरान युद्ध और इजरायल-फिलिस्तीन संघर्ष को लेकर भी मतदाताओं के बीच असंतोष देखा गया। ऐसा कहा जा रहा है इसी सब का असर नतीजों के रुप में दिख रहा है।
