फ्रांस, बेल्जियम, इटली, पुर्तगाल, स्पेन और अल्बानिया के बाद जर्मनी में जेन-जी प्रोटेस्ट की आग भड़क चुकी है। शनिवार को देश के कई शहरों में युवा पीढ़ी सड़कों पर उतरी। प्रदर्शन में एक लाख से अधिक लोगों ने हिस्सा लिया। अधिकांश जगहों पर प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा, लेकिन फ्रैंकफर्ट में हिंसा देखने को मिली। यहां दंगाइयों ने पेट्रोल बम से हमला किया। दुकानों में लूटपाट की। घरों और दुकानों की खिड़कियां तोड़ दीं। पुलिस पर भी हमला किया।   

 

अधिकांश जगहों पर नकाबपोश लोगों ने हिंसा और आगजनी को अंजाम दिया। कोलोन में झड़प के बाद पांच लोगों को हिरासत में लिया गया है। लूटपाट के बाद फ्रैंकफर्ट में पुलिस ने मेन शॉपिंग स्ट्रीट को बंद कर दिया है। पुलिस का कहना है कि दंगाइयों ने आग लगाने वाली डिवाइस का इस्तेमाल कर रहे हैं। आरोपियों ने एक स्पेशलिस्ट हथियार की दुकान को भी निशाना बनाया। हालांकि इस मामले में कई गिरफ्तारियां की गई हैं।

 

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लेफ्ट-विंग के कार्यकर्ताओं पर हिंसा भड़काने का आरोप

राजधानी बर्लिन, कोलोन, हैम्बर्ग और ब्रेमेन में भी हिंसक झड़पें सामने आईं। हेस्से राज्य के गृह मंत्री ने लेफ्ट-विंग कार्यकर्ताओं को हिंसा भड़काने का जिम्मेदार ठहाया। उन्होंने शक जताया कि करीब 100 वामपंथी उग्रवादियों ने फ्रैंकर्ट में हिंसा भड़काई है। देशभर के कई शहरों में प्रदर्शनकारी पटाखों, पत्थरों और बोतलों से आपात सेवा में लगे लोगों को निशाना बना रहे थे। पुलिस ने इन्हें तितर-बितर करने के लिए पानी की बौछार का इस्तेमाल किया।

जर्मनी में हिंसक प्रदर्शन की वजह क्या?

जर्मनी में युवाओं ने Gen Z रेगेल्टो नाम से एक प्रदर्शन शुरू किया। जिसका मतलब है कि जेन-जी ने जिम्मेदारी ली है। तीन लाख से अधिक लोग विरोध प्रदर्शन में पहुंचे। दिनभर प्रदर्शन शांतिपूर्ण चला, लेकिन शाम को इसे रोके जाने पर हिंसा भड़क उठी। स्कूलों की फंडिंग में कमी, शिक्षा में बढ़ती महंगाई, सरकारी खर्च में कटौती, मिलिट्री सर्विस का विरोध और सामाजिक न्याय को लेकर जर्मनी के युवा सड़कों पर उतरे हैं।

 

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फ्रैंकफर्ट में पुलिस की स्पेशल यूनिट तैनात

जेन-जी रेगेल्ट की प्रवक्ता लीना फ्रेडरिक ने अपने एक बयान में कहा, 'यह प्रदर्शन शांति और आजादी के लिए है। हमारी सबसे जरूरी बात स्वास्थ्य और शिक्षा व्यवस्था के लिए बेहतर सपोर्ट है। हम जरूरी मिलिट्री सर्विस के खिलाफ हैं। हम बोझ को सही तरीके से बांटने के पक्ष में हैं।' उधर, भारी हिंसा के बाद फ्रैंकफर्ट में विशेष पुलिस यूनिट को तैनात किया गया है। बर्लिन में 27 पुलिस अधिकारी घायल हुए हैं। 56 लोगों को हिरासत में लिया गया है। हैम्बर्ग शहर में 120 दंगाइयों को गिरफ्तार किया गया है।