अमेरिका के कैलिफोर्निया में रहने वाले एक भारतीय नागरिक पर संगीन आरोप लगे हैं। शख्स पर बैंक से लगभग 10 करोड़ डॉलर यानी लगभग 950 करोड़ रुपये की घपलेबाजी का इल्जाम लगा है। अमेरिका के टैक्स विभाग के अधिकारियों ने दावा किया है कि महेंद्र मखीजानी नाम से इस शख्स ने बैंक पॉलिसी से जुड़े रिकॉर्ड में हेरफेर की थी, जिससे बैंक को भारी नुकसान का सामना करना पड़ सकता था। आरोपी शख्स की कंपनी का बैंक के साथ एक समझौता था, जिसके तहत बैंक महेंद्र की कंपनी को रियल एस्टेट लोन देता था। इसके बदले कंपनी को प्रॉपर्टी गिरवी रखनी होती थी।

 

आरोप है कि उस प्रॉपर्टी के कागजातों में शख्स की कंपनी ने फर्जीवाड़ा किया था। इसी मामले को लेकर आरोपी शख्स को गिरफ्तार किया गया। अमेरिका के कानून के मुताबिक, अगर ये आरोप सिद्ध हो जाते हैं तो आरोपी को 30 साल तक जेल की सजा हो सकती है।

 

इस फर्जीवाड़े के आरोपी महेंद्र मखीजानी है को बुधवार को गिरफ्तार किया गया। महेंद्र मखीजानी कैलिफोर्निया के कोरोना डेल मार में रहते हैं। अमेरिका के संघीय एजेंट वहां पहुंचे और महेंद्र को गिरफ्तार किया। महेंद्र मखीजानी न्यूपोर्ट बीच स्थित कैंटर ग्रुप कैंटर ग्रुप वी एलएलसी कंपनी (Cantor Group V LLC) के मालिक हैं।

 

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कैसे किया गया फर्जीवाड़ा?

महेंद्र मखीजानी की कैंटर ग्रुप वी एलएलसी  (Cantor Group V LLC) नाम की कंपनी है। इस कंपनी का बैंक के साथ एक समझौता था, जिसके मुताबिक बैंक रियल एस्टेट लोन के लिए फंड देता था। इसके बदले बैंक की शर्त थी कि गिरवी रखी गई प्रॉपर्टी पर पहला हक बैंक का होगा।

 

महेंद्र मखीजानी ने एक सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करके प्रॉपर्टी के मालिकाना हक से जुड़े रिकॉर्ड में हेरफेर की। इसमें गिरवी रखी गई प्रॉपर्टी का मालिकाना हक खुद का दिखाया गया। कर विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, सितंबर 2024 में कंपनी ने बैंक में फर्जी कागजात जमा किए थे। इसके बाद अप्रैल 2025 में महेंद्र ने बीमा पॉलिसी में भी फर्जी बदलाव किए। इसमें यह दिखाया गया कि गिरवी संपत्तियों पर पहला अधिकार कैंटर कंपनी का है। फर्जी पॉलिसी के कागजात तैयार करने के बाद उन्हें बैंक में जमा किया गया।

 

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महेंद्र की कंपनी की जांच जारी

महेंद्र को कैलिफोर्निया के सांता एना कोर्ट में पेश किया जाएगा, जहां उन पर लगे सभी आरोपों की सुनवाई होगी। अमेरिका के अधिकारियों ने बताया कि बैंक किसी भी देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाते हैं। ऐसे में बैंक को फर्जी जानकारी देकर बैंकिंग सिस्टम को नुकसान पहुंचता है। अधिकारियों के अनुसार, इस मामले में बैंक को 100 मिलियन डॉलर तक का नुकसान हो सकता था।