नेपाल में भोटेकोशी और त्रिशूली नदियों में आई भीषण बाढ़ ने दोनों इलाकों में ऐसी तबाही मचाई है कि कई साल, नेपाल को उबरने में लग सकते हैं। नेपाल सरकार ने आधिकारिक तौर पर कहा है कि अब तक 734 लोगों की मौत हो चुकी है। करीब 2,498 लोग अभी भी लापता हैं। इनमें 589 विदेशी नागरिक भी शामिल हैं।
हिमालय में चट्टान और बर्फ के गिरने से उठी इस बाढ़ को कई लोगों ने हिमालयी सुनामी जैसा बताया है। बाढ़ का पानी नदी के किनारे बसे गांवों, सड़कों, पुलों और जलविद्युत परियोजनाओं को बहा ले गया। सैकड़ों लोग मारे गए और हजारों लापता हो गए। कई शव पानी के साथ दूर-दूर तक बहकर पहुंचे। सरकार और सुरक्षा बलों के अनुसार बचाव कार्य अभी भी चल रहा है, लेकिन नुकसान इतना बड़ा है कि स्थिति पूरी तरह साफ होने में समय लग रहा है।
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नेपाल में कहां कितनी मौतें हुईं, कितने लोग लापता?
नेपाल के चितवन में सबसे ज्यादा 259 शव मिले हैं। इसके बाद नवलपरासी पूर्व में 184 और नवलपरासी पश्चिम में 82 शव मिले हैं। कई शव सैकड़ों किलोमीटर दूर बहाकर आए हैं। रसुवा जिले में सबसे ज्यादा 562 लोग लापता बताए गए हैं। एक जलविद्युत परियोजना से जुड़े 933 लोग भी लापता हैं। 85 सुरक्षाकर्मी भी गायब हैं। अब तक 8,186 लोगों को बचाया जा चुका है।
कैसे नेपाल में चल रहा रेस्क्यू ऑपरेशन?
सेना, पुलिस और सशस्त्र पुलिस के करीब 20 हजार जवान बचाव कार्य में लगे हैं। हेलीकॉप्टर से भी कई लोगों को निकाला गया है। ऊपरी त्रिशूली जलविद्युत परियोजना की सुरंग में दर्जनों मजदूर फंसे होने की आशंका है। सेना ने सुरंग के ऊपरी हिस्से तक पहुंच बना ली है और लोगों तक ऑक्सीजन पहुंचाई जाई रही है लेकिन जवाब नहीं मिल रहा है।
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नेपाल ने क्या गंवाया है?
परिवार वाले हर घंटे इंतजार कर रहे हैं। चीन और भारत से विशेषज्ञ टीमें भी पहुंची हैं। बाढ़ ने रसुवागढ़ी-केरुंग सीमा मार्ग को पूरी तरह नष्ट कर दिया है। चीन के साथ नेपाल का यह मुख्य व्यापारिक रास्ता अब बंद हो गया है। व्यापारियों को त्योहारों से पहले बड़ा नुकसान हो रहा है। वैकल्पिक रास्तों से सामान लाने की कोशिश हो रही है, लेकिन वे भी जोखिम भरे हैं।
क्या नेपाल में फिर आने वाली है बाढ़?
नेपाल-चीन सीमा के पास बनी झील अब प्राकृतिक रूप से खाली हो गई है। इससे और बड़ी बाढ़ का खतरा कम हुआ है। सरकार प्रभावित इलाकों में राहत सामग्री और नकद सहायता बांट रही है। बचाव और पहचान का काम जारी है।
अपनों की तलाश में जुटे लोग क्या कह रहे हैं?
बाढ़ में फंसे जलविद्युत परियोजना के कर्मचारियों के परिवार वाले अब भी उम्मीद लगाए बैठे हैं। काठमांडू पोस्ट से बातचीत में सीता पांडे कहती हैं कि उनके पति जिबलाल अधिकारी पावरहाउस के अंदर काम कर रहे थे और उन्होंने आखिरी बार बुधवार सुबह बात की थी। उन्हें अभी भी पचास प्रतिशत उम्मीद है कि पति जिंदा हैं क्योंकि अंदर ऑक्सीजन की व्यवस्था है, लेकिन हर गुजरते घंटे के साथ यह उम्मीद कम होती जा रही है।
जीवण खड्का कहते हैं कि बचाव कार्य बहुत धीमा चल रहा है और जो काम आज हो रहा है वह दो दिन पहले शुरू हो जाना चाहिए था। वह बताते हैं कि जितना समय लग रहा है, उतनी उनकी उम्मीद मर रही है और हर सेकंड उनके लिए मायने रखता है।
