इजरायल के संसदीय चुनाव के नतीजे आ गए हैं। कोई भी दल, स्पष्ट बहुमत की स्थिति में नहीं है। बिना गठबंधन सरकार नहीं बन सकती है। बेंजामिन नेतन्याहू के धड़े को ज्यादा सीटें मिली हैं लेकिन स्पष्ट तौर पर उन्हें तत्काल विजेता घोषित नहीं किया जा सकता है। उनके धुर विरोधी दल के नेता गादी आइजेनकोट हैं। अब अरब पार्टियां, सत्ता तक पहुंचने का एक जरिया हो गई हैं।
अरब पार्टियां मजबूत स्थिति में नजर आ रहीं हैं। इजरायल के फिलिस्तीनी नागरिकों ने इस बार खूब वोट किया। अरब न्यूज की एक रिपोर्ट के मुताबिक उन हिस्सों में भी 75 फीसदी वोटिंग हुई, जहां पहले लोग वोट डालने से इनकार करते थे। इजरायल में धुर राष्ट्रवादी दलों का दबदबा रहा है, तब भी फिलिस्तीन से लोगों ने वोटिंग में हिस्सेदारी ली।
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इजरायल में मजबूत हो रहीं अरब पार्टियां
अरब पार्टियां इस चुनाव में 11 से ज्यादा सीटें हासिल करती नजर आ रहीं हैं। इजरायल में फिलिस्तीनी मूल के मुस्लिम बसे हैं, जिन्हें अरब कहा जाता है। धुर राष्ट्रवादी दल, इन्हें इजरायली पासपोर्ट होने के बाद भी बाहर निकालने की मांग करते हैं। इन्हें शक है कि इनका झुकाव हमेशा फिलिस्तीन की ओर ही रहेगा और ये इजरायल की संप्रभुता के लिए खतरा हैं। अलग बात है कि इजरायल के संसद में इनका प्रतिनिधित्व मजबूत है। अब ये ऐसी स्थिति में आ गईं हैं कि इनके बिना किसी का भी सत्ता में आना मुश्किल है।
इजरायल में कौन कितना मजबूत है?
इजरायल में सभी सीटों पर नतीजे अभी तक नहीं आए हैं। BBC ने चैनल 12 के एक एग्जिट पोल के हवाले से लिखा है कि इजराय की 120 सदस्यीय संसद में बेंजामिन नेतन्याहू की अगुवाई वाले गठबंधन को 50 सीटें मिल सकती हैं, नेतन्याहू की विरोधी यहूदी दलों को 52 सीटें और अरब पार्टियों राअम और जॉइंट लिस्ट को मिलकार 18 सीटें मिल सकती हैं। अब बेजामिन नेतन्याहू हों या गादी आइजेनकोट दोनों बिना राअम के समर्थन के इजरायल की सत्ता में नहीं आ सकते हैं।
इजरायल को राअम पर भरोसा कितना है?
ज्यादातर अरब समर्थक पार्टियां मुस्लिम हैं। मुस्लिमों का झुकाव हमेशा से फिलिस्तीन के प्रति रहा है। ये विस्थापित नागरिक, फिलिस्तीनी मूल के भी हैं। इजरायल में हुए कई सर्वे यह इशारा कर चुके हैं कि बहुसंख्यक यहूदी यह चाहते हैं कि इजरायल के फिलिस्तीनी नागरिकों को यहां से बाहर निकाल दिया जाए। फिलिस्तीनी मूल के लोगों के पास इजरायली पासपोर्ट भी है। ज्यादातर इजराइली यहूदी अपने देश में इजराइल के फिलिस्तीनी नागरिकों को नहीं चाहते हैं।
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संसद में कितने मजबूत हैं अरब?
इजरायल के संसदीय चुनाव में अरब दलों को रिकॉर्ड सीटें मिलती दिख रही हैं। मंगलवार को हुए मतदान के बाद की गिनती में दो मुख्य अरब दल, जॉइंट लिस्ट और राअम (Ra’am), मिलकर करीब 19 सीटें जीतते नजर आ रहे हैं। यह मौजूदा संसद में उनकी सीटों का लगभग दोगुना है।
चर्चा में क्यों है राअम?
इजरायल चुनावों के बाद Ra'am की चर्चा सबसे ज्यादा है। राअम पार्टी के नेता मंसूर अब्बास ने साफ कहा है कि वह गादी आइजेनकोट की अगुवाई वाली सरकार में शामिल होने को तैयार हैं। 120 सीटों की संसद में सरकार के लिए 61 सीटें चाहिए। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के गुट को 53 और विपक्षी गुट को 48 सीटें मिलती दिख रही हैं। ऐसे में अरब दलों की 19 सीटें सत्ता का समीकरण तय कर सकती हैं। अंतिम नतीजे अभी आने बाकी हैं।
क्या है रा'अम का इतिहास?
रा'अम को यूनाइटेड अरब लिस्ट भी कहा जाता है। यह एक रूढ़िवादी अरब मुस्लिम पार्टी है और इसकी जड़ें इस्लामी आंदोलन में हैं। 1970 के दशक में शेख अब्दुल्ला निम्र दरविश ने इजरायल में आधुनिक इस्लामी आंदोलन की नींव रखी थी। 1996 में संसद की राजनीति में हिस्सा लेने के सवाल पर यह आंदोलन दो हिस्सों में बंट गया। उत्तरी शाखा ने चुनावों का बहिष्कार जारी रखा। दरविश की अगुवाई वाली दक्षिणी शाखा से राअम निकली और 1996 में पार्टी के रूप में बढ़नी शुरू हुई।
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कौन हैं राअम पार्टी के नेता मंसूर अब्बास?
पार्टी के मौजूदा नेता मंसूर अब्बास 52 साल के हैं। वह पेशे से डेंटिस्ट हैं। 2019 में पहली बार क्नेसेट के लिए चुने गए थे। क्नेसेट, इजरायली संसद का नाम है। मंसूर अब्बास ने अरब राजनीति की दिशा बदल दी है। वह इजरायल-फिलस्तीन विवाद को बातचीत की शर्त बनाने के बजाय अरब नागरिकों के रोजमर्रा के मुद्दों पर जोर दे रहे हैं।
उनकी प्राथमिकता अपराध, आर्थिक असमानता, बुनियादी ढांचा और नगरपालिकाओं के फंड हैं। पार्टी के वोटर ज्यादातर बेदुइन समुदाय से हैं। बेदुइन समुदाय अरब मुस्लिमों का एक समूह है। यह घुमंतु ट्राइब रही है। इजरायल में यह समुदाय भी मजबूत स्थिति में है। इजरायल में करीब 3 लाख लोग इस समुदाय से हैं। इजरायल की कुल आबादी का यह 3 प्रतिशत है।
इजरायल में राअम गठबंधन का दबदबा कैसा है?
राअम के साथ साल 2019 में बलद ने गठबंधन किया था। 4 सीटें आईं थीं। वह जॉइंट लिस्ट की सह-संस्थापक बनी, लेकिन मार्च 2021 के चुनाव से पहले अलग हो गई। 2021 में राअम नफ्ताली बेनेट और यायर लापिद की गठबंधन सरकार का हिस्सा बनी। लगभग 50 साल में पहली बार कोई अरब पार्टी इजरायल की सत्ताधारी गठबंधन सरकार में आई थी। यह सरकार 2021 से 2022 तक चली। नवंबर 2022 के चुनाव में पार्टी को पांच सीटें मिलीं और वह विपक्ष में लौट गई।
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मुसलमानों की इजरायल परस्त पार्टी है राअम?
दिसंबर 2025 में मंसूर अब्बास ने ऐलान किया कि राअम इस्लामी आंदोलन की दक्षिणी शाखा और उसकी शूरा काउंसिल से अलग होकर पूरी तरह नागरिक पार्टी बनेगी। इस बार उन्होंने अपनी सूची में एक यहूदी पूर्व पुलिस अधिकारी को भी जगह दी है। अगस्त 2026 के पार्टी सम्मेलन में अब्बास ने राअम को इजरायली राजनीतिक व्यवस्था का हिस्सा बनाने की बात कही थी। भावी गठबंधन में उसे संभावित साझेदार और किंगमेकर बताया था। पार्टी दो-राष्ट्र समाधान का समर्थन करती है। राअम के घोषणापत्र में कब्जा खत्म करने पर खास जोर नहीं दिखता।
नेतन्याहू या गादी आइजेनकोट, राअम को पसंद कौन है?
मंसूर अब्बास अलग-अलग इंटरव्यू में यह दावा कर चुके हैं कि कि गादी आइजेनकोट गुट के ज्यादातर मतदाता चाहते हैं कि सरकार में राअम शामिल हो। उन्होंने बताया कि गुट के वरिष्ठ नेताओं से चुनाव से पहले ही संभावित समझौते पर बात हुई थी। उनका कहना है कि सिर्फ बदलाव चाहने वाले खेमे ने नहीं, दक्षिणपंथी खेमे के एक बहुत सीनियर सदस्य ने सरकार गठन के लिए संपर्क किया था।
गादी आइजेनकोट ने प्रचार के दौरान किसी भी अरब पार्टी के साथ सरकार बनाने से इनकार किया था। उन्होंने साझा मूल्यों की कमी का हवाला दिया था। अरब समूह इजरायल को यहूदी और लोकतांत्रिक राष्ट्र मानने से इनकार करते रहे हैं। बेंजामिन नेतन्याहू की लिकुद पार्टी के प्रवक्ता गाय लेवी ने कहा कि पार्टी किसी अरब दल से बात नहीं करेगी। उनके मुताबिक इसकी कोई संभावना ही नहीं है।
नेतन्याहू, आइजेनकोट और अरब दलों का भविष्य क्या है?
जॉइंट लिस्ट, अरब बहुल दलों का गठबंधन है। इसे 2015 में अरब नागरिकों के वोट एकजुट करने के लिए बनाया गया था। इसमें हदाश, ताअल और बलद शामिल हैं। इसके नेता यूसुफ जबारीन ने कहा कि पार्टी अपनी करीब 12 सीटों का इस्तेमाल बेंजामिन नेतन्याहू सरकार को हटाने में करना चाहती है। गाजा में इजरायल के सैन्य अभियान और दक्षिणी लेबनान पर कब्जे के समर्थन की वजह से ये दल आइजेनकोट की सरकार में शामिल नहीं होंगे। जबारीन ने बाहर से समर्थन देकर अल्पमत सरकार को टिकाए रखने का रास्ता खुला रखा है।
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इजरायल में कितनी है अरब समुदाय की आबादी?
इजरायल की करीब 20 प्रतिशत आबादी, लगभग 21 लाख लोग अरब नागरिक हैं। स्वास्थ्य क्षेत्र में उनकी बड़ी भूमिका है। देश के 20 प्रतिशत से ज्यादा डॉक्टर और लगभग एक चौथाई नर्स अरब हैं। लाइसेंस प्राप्त फार्मासिस्टों में करीब आधे अरब हैं। दशकों तक अरब दल सरकारों को बाहर से समर्थन देते रहे, जबकि मंत्रिमंडल में अरब प्रतिनिधित्व की भूमिका सीमित रही है।
कौन हैं इजरायल के अरब?
इजरायल में अरब नागरिक देश की सबसे बड़ी जातीय अल्पसंख्यक आबादी हैं। सेंट्रल ब्यूरो ऑफ स्टैटिस्टिक्स इजरायल के मुताबिक साल 2023 में ग्रीन लाइन के अंदर इनकी संख्या करीब 20 लाख 65 हजार थी, जो कुल आबादी का 21 प्रतिशत है। इनमें ज्यादातर मुसलमान हैं, जबकि ईसाई और द्रूज समुदाय भी बड़ी संख्या में है।
ये लोग मुख्य रूप से अरब-बहुल कस्बों और शहरों में रहते हैं और अरबी, हिब्रू दोनों भाषाएं बोलते हैं। 1948 के अरब-इजरायल युद्ध के बाद जो फिलिस्तीनी इजरायल के क्षेत्र में रह गए थे, उन्हें नागरिकता दी गई थी। इनकी पहचान को लेकर स्थिति जटिल बनी हुई है।
अरब नागरिक, अपनी फिलिस्तीनी पहचान को नहीं भूलना चाहते हैं। नागरिकता के स्तर पर वे इजरायली हैं। 1966 तक ये मार्शल लॉ के अधीन रहे। द्रूज, नेगेव और गैलीली के बेदुइन समुदाय इजरायल के प्रति झुकाव रखते हैं लेकन पूर्वी येरूशलम और गोलन हाइट्स के अरबों की स्थिति अलग है, उनका झुकाव फिलिस्तीन की ओर है।
