अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका ने डेनमार्क और ग्रीनलैंड के साथ एक समझौता किया है, जिसके तहत ग्रीनलैंड की सुरक्षा पर अमेरिका को स्थायी नियंत्रण मिल गया है। कुछ महीने पहले डोनाल्ड ट्रंप ने इस स्वशासित क्षेत्र पर जबरन कब्जा करने की धमकी दी थी। अब अचानक उन्होंने इस समझौते से दुनिया को चौंका दिया है।
डोनाल्ड ट्रंप ने यह 'ब्रेकिंग न्यूज' खुद अलग-अलग सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर दी है। उन्होंने लिखा कि अमेरिका ने डेनमार्क के साम्राज्य और ग्रीनलैंड के साथ एक समझौता किया है, जो अमेरिका को ग्रीनलैंड की सुरक्षा और बाकी सभी जरूरतों पर स्थायी नियंत्रण देता है।
डोनाल्ड ट्रंप कहा कि इससे अमेरिका की सभी चिंताएं पूरी तरह दूर हो गई हैं और इस पर अमेरिका को कोई खर्च नहीं उठाना पड़ेगा। अमेरिकी राष्ट्रपति ने इस समझौते को 'एन इनफाइनाइट लाइफ डील' नाम दिया है। मतलब यह कि हमेशा के लिए यह समझौता हुआ है।
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डेनमार्क का नियंत्रण बरकरार, अगले हफ्ते होंगे हस्ताक्षर
डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को यह एलान किया है। ग्रीनलैंड अभी भी डेनमार्क के नियंत्रण में रहेगा। अभी इस समझौते का पूरा मसौदा सार्वजनिक नहीं किया गया है, इसलिए यह साफ नहीं है कि यह 1951 के पुराने समझौते से कितना अलग है। 1951 के इसी समझौते के तहत अमेरिका को ग्रीनलैंड में सैन्य उपस्थिति की अनुमति मिली थी।
डेनमार्क ने इस फैसले पर क्या कहा है?
डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सन के दफ्तर की तरफ से जारी बयान के अनुसार, अमेरिका, ग्रीनलैंड और डेनमार्क अगले हफ्ते संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान आर्कटिक और उत्तरी अटलांटिक क्षेत्र की सुरक्षा मजबूत करने वाले समझौते पर हस्ताक्षर करेंगे। फ्रेडरिक्सन ने कहा कि यह समझौता डेनमार्क के साम्राज्य की संप्रभुता और ग्रीनलैंड के लोगों के आत्मनिर्णय के अधिकार को मान्यता देता है।
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गैर-NATO देशों पर लगेगी रोक
CNN की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इस समझौते में अमेरिका को ग्रीनलैंड में स्थायी पहुंच, अड्डा बनाने और उड़ान भरने के अधिकार मिलेंगे। अधिकारी ने बताया कि पहले किसी भी देश को, यहां तक कि विरोधी देशों को भी, ग्रीनलैंड में सैन्य अड्डा बनाने या सैनिक भेजने की छूट थी। अब यह समझौता संवेदनशील क्षेत्रों में निवेश रोकने के लिए जरूरी व्यवस्था तय करेगा। अब गैर नॉर्थ अटलांटिक ट्रिटी ऑर्गेनाइजेशन (NATO) देशों की राह यहां मुश्किल होगी।
ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिका का डर क्या था?
CNN की एक रिपोर्ट के मुताबिक रूस पिछले कई दशकों से आर्कटिक क्षेत्र में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ाता रहा है और चीन ने भी वहां अपनी पकड़ मजबूत की है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि यह समझौता ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा चिंताओं को स्थायी रूप से पूरी तरह खत्म कर देता है।
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NATO खुश क्यों है?
NATO की तरफ से भी इस समझौते का स्वागत किया गया है। NATO के प्रवक्ता ने कहा कि यह समझौता इस अहम क्षेत्र में सुरक्षा, स्थिरता और सहयोग बढ़ाने में मदद करेगा। ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री जेंस-फ्रेडरिक नील्सन ने कहा कि यह समझौता ग्रीनलैंड के हितों और अंतरराष्ट्रीय सहयोग में उसकी जगह को मान्यता देता है, जो सभी के लिए फायदेमंद है।
कैसे समझौते तक पहुंच गई बात?
जनवरी में डेनमार्क और ग्रीनलैंड के अधिकारियों की अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और विदेश मंत्री रुबियो के साथ बैठक हुई थी। उसके बाद अमेरिका, डेनमार्क और ग्रीनलैंड ने एक उच्च स्तरीय कार्यकारी समूह बनाया। मकसद था कि संप्रभुता से जुड़े विवादों पर आगे का रास्ता तलाशा जा सके। लेकिन साल बीतने के साथ यह मुद्दा सार्वजनिक चर्चा से गायब हो गया था। अमेरिका कई दूसरे संकटों में उलझ गया था। अब इस समझौते का तय प्रक्रिया के तहत डेनमार्क की संसद से भी पास होना बाकी है।
