पाकिस्तान में बड़ी सियासी उथल-पुथल की तैयारी चल रही है। पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने गुरुवार को कहा कि पाकिस्तान का मौजूदा सिस्टम ढह गया है। उन्होंने सिस्टम में बदलाव की वकालत की और सभी सियासी दलों को बंद कमरे में बातचीत करने का न्योता दिया। मोहसिन नकवी का दावा है कि पाकिस्तान को कई सूबों और प्रशासनिक इकाइयों में बांटकर निजाम यानी सिस्टम बदला जा सकता है।

 

अब इसी सिस्टम बदलने वाले उनके बयान पर हंगामा मच गया। नवाज और शहबाज शरीफ की पार्टी सेना के खिलाफ अंदरखाने खड़ी हो चुकी है। आसिफ अली जरदारी की पार्टी पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी ने सिंध में अलग मोर्चा खोल दिया है। सियासत और सेना के बीच शुरू हुई जुबानी जंग से पहले यह समझते हैं कि मोहसिन नकवी ने आखिर कहा क्या था?

 

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नकवी ने सिस्टम पर क्यों उठाय सवाल

मोहसिन नकवी ने अपने ताजा बयान में न केवल सिस्टम पर सवाल उठाया था, बल्कि सरकार को कॉकरोच के नाम पर युवाओं का डर भी दिखाया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के सिस्टम को बदलने की जरूरत है। कॉकरोच कहें या युवा... ये वजीफा और लैपटॉप से नहीं मानने वाले हैं। अगर यह इकट्ठा हो गए तो सबकुछ उलट देंगे। नकवी ने आगे पाकिस्तान में नए सूबे बनाने की वकालत की और कहा, 'चाहे हम इन्हें प्रशासनिक इकाइयां कहें या प्रांत, हमें इसी दिशा में आगे बढ़ना होगा।'

'कॉकरोच से हमें डराइये मत'

पाकिस्तान मुस्लिम लीग के नेता राणा सनाउल्लाह ने मोहसिन नकवी के बयान पर पलटवार किया। उन्होंने, 'हमें कॉकरोच के नाम पर डराइए मत। हमने पहले भी उनसे निपटा है और हम जानते हैं कि भविष्य में उनसे कैसे निपटना है।'

 

राणा सनाउल्लाह के इस बयान को सरकार और सेना के बीच जुबानी जंग के तौर पर देखा जा रहा, क्योंकि मोहसिन नकवी सेना प्रमुख आसिम मुनीर के बेहद खास है। वे वही बोलते हैं, जो सेना चाहती है।

क्या पाकिस्तान की सेना कुछ बड़ा प्लान कर रही

पाकिस्तान के तमाम पत्रकारों और नेताओं का दावा है कि सिस्टम बदलने के नाम पर सेना पाकिस्तान में कई प्रांत बनाने के प्लान पर काम कर रही है। आरोप है कि मोहसिन नकवी ने सेना के इशारे पर ही यह बयान दिया। इस बात को तब और बल मिला जब शुक्रवार को पाकिस्तान की सेना ने मोहसिन नकवी के बयान का समर्थन कर दिया।

 

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नकवी के समर्थन में सेना क्या बोली?

आईएसपीआर मुखिया लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी ने नकवी के बयान पर कहा कि हम पहले भी यह कहते आ रहे हैं कि पाकिस्तान की सुरक्षा और स्थिरता के लिए सुशासन जरूरी है। अब हमारी आबादी 240-250 मिलियन है। हमारे पास अभी चार प्रांत हैं। हमें देखना होगा कि क्या यह सुशासन के उद्देश्य को पूरा कर पा रहे हैं?

सेना का असली प्लान क्या है?

पाकिस्तान सेना का मानना है कि चार सूबों को 32 अलग-अलग प्रशासनिक यूनिटों में बांटने से सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियों से निपटने में मदद मिलेगी। हालांकि इस पर पंजाब के पूर्व सीएम और पत्रकार रह चुके नजम सेठी की राय अलग है। उनका कहना है कि चार सूबे होना पाकिस्तान की असली समस्या नहीं है। मूल समस्या यह है कि लोगों को उनके अधिकार नहीं मिलते हैं। आम जनता को कोई सुविधा नहीं मिलती है। 

 

सेना पाकिस्तान में नए सबे क्यों चाहती हैं? उसके बारे में नजफ सेठी कहते हैं कि सेना ने यह फैसला किया है कि अब बहुत हो चुका है। ये चीजें हमारे हाथों से निकलती जा रही हैं। समाधान खोजने के बजाय समस्याएं बढ़ती जा रही हैं। इसके अलावा गवर्नेंस भी ठीक से नहीं हो रही है। गवर्नेंस का मतलब है कि लोगों के लिए कुछ नहीं किया जा रहा है। वेलफेयर और सिक्योरिटी के बीच विरोधाभास है। हमारी सुरक्षा खतरे में है और वेलफेयर भी, क्योंकि जनता को बहुत कम सुविधाएं मिल रही हैं। इसलिए इसे भी हल करने की जरूरत है। अब सिक्योरिटी और वेलफेयर को मिला दिया गया है। दोनों एक ही सिक्के के दो पहलू हैं और दोनों खतरे में हैं, इसलिए मुझे लगता है कि यह प्रस्ताव सीधे सेना से आया है।

क्या सिस्टम के नाम पर सरकार बदलने का खींचा जा रहा खाका?

पाकिस्तान सेना के पूर्व मेजर और मौजूद समय में इंग्लैंड में शरण ले चुके आदिल रजा बताते हैं कि हाल ही में आसिम मुनीर ने आईएसआई के तमाम अधिकारियों के साथ 7 घंटे मीटिंग की। इसमें पाकिस्तान में मिस्र की तर्ज पर राष्ट्रपति शासन लगाने पर सहमति बनी। आसिम मुनीर को अगला राष्ट्रपति बनाया जाएगा और असली ताकत उन्हीं के पास होगी। मोहसिन नकवी प्रधानमंत्री बनाए जा सकते हैं।

 

मोहसिन नकवी और सेना के बयान के बाद पूरे पाकिस्तान में सरकार बदलने की चर्चा आम हो गई है। कुछ खबरों में दावा किया गया कि मोहसिन नकवी के बयान के बाद शहबाज शरीफ की पार्टी के नेताओं ने एक गुप्त बैठक बुलाई। इसमें डिप्टी प्राइम मिनिस्टर इशाक डार और पंजाब की सीएम मरियम नवाज भी शामिल रही। बैठक में सरकार को बचाने और मौजूदा हालत पर चर्चा हुई।

पाकिस्तान का सियासी समीकरण समझिए

शहबाज शरीफ की पार्टी पाकिस्तान मुस्लिम लीग की पंजाब में हुकूमत में है। बलूचिस्तान में गठबंधन सरकार का हिस्सा है। सिंध में आसिफ अली जरदारी की पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी और खैबर पख्तूनख्वा में इमरान खान की पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ पार्टी सत्ता में है।

 

मरियम नवाज नहीं चाहती हैं कि पंजाब का बंटवारा हो। हालांकि जरदारी और इमरान खान की पार्टी दक्षिण पंजाब प्रांत के पक्ष में है। लेकिन जरदारी की पार्टी सिंध में अलग सूबे का विरोध कर रही है। वहीं उनके साथ सत्ता गठबंधन में शामिल एमक्यूएम-पी कराची को सिंध से अलग कर नया सूबा बनाने के पक्ष में है। सिंध की जनता और तमाम नागरिक संगठन सेना के प्लान के खिलाफ हैं।

मुनीर के सामने चुनौतियां क्या?

सिंध में आम जनता के अलावा सियासी दल भी सेना के प्लान के विरोध में है। पिछले साल पंजाब में नहर बनाने के विरोध में सिंध में खूब हिंसा भड़की थी। यहां लंबे समय से अलग सिंधदेश की मांग उठती रही है। ऐसे में अगर सेना ने प्रांत का विभाजन किया तो यहां भी हिंसा की आग ठीक वैसे ही भड़क सकती है, जैसे बलूचिस्तान में भड़की है। 

 

खैबर पैख्तूनख्वा में इमरान खान की पार्टी और सेना में नहीं बनती है। खबर है कि सेना ने अंदरखाने इमरान खान से समझौता करने का प्रयास किया। लेकिन बात नहीं बनी। बलूचिस्तान में भले ही शहबाज शरीफ की पार्टी गठबंधन सरकार हिस्सा, लेकिन यहां विभाजन करना आसान नहीं है। सूबे के अधिकांश हिस्सों पर सेना का कंट्रोल खत्म हो चुका है। 

क्या अगला रणक्षेत्र बनेगा सिंध?

सिंध हाई कोर्ट बार एसोसिएशन के प्रेसिडेंट मुहम्मद हसीब जमाली ने सिंध के बंटवारे का विरोध किया और पूछा कि क्या पाकिस्तान में लोकतंत्र खत्म हो गया। सिंध एक है और इस पर कोई प्रश्न नहीं है। आप से चार सूबों की सरकार नहीं चलाई जा रही है। आप चाहते हैं कि और सूबे बनाए जाएं। 

 

सिंध के मुख्यमंत्री मुराद अली शाह ने साफ तौर पर कहा कि देश में और प्रशासनिक इकाइयां बनाने का प्रस्ताव मंजूर नहीं है। सिंध के लोग ऐसा कोई भी कदम कभी स्वीकार नहीं करेंगे और प्रांत के प्रशासनिक ढांचे को बदलने की किसी भी कोशिश का पुरजोर विरोध करेंगे। 

 

सिंध सरकार में मंत्री सईद गनी का कहना है कि सिंध में मुस्लिम लीग, पीटीआई, जमात-ए-इस्लामी, एएनपी या जेयूआई की प्रांतीय लीडरशिप में से कोई भी नए सूबे के गठन के पक्ष में नहीं है। एमक्यूएम के लोग भी सिर्फ अपने ही लोगों को धोखा देने के लिए ये बातें कह रहे हैं।

क्या सेना के रडार पर आ चुुके शहबाज शरीफ

पाकिस्तान के नेताओं में सबसे बड़ा खौफ यह है कि किसी भी वक्त शहबाज शरीफ की सरकार गिर सकती है। आसिम मुनीर अपने हाथ में सत्ता की कमान लेने को तैयार है। इसका इशारा मोहसिन नकवी के ही बयान में मिलता है। मोहसिन नकवी कहते हैं कि प्रधानमंत्री 14 घंटे काम करते हैं। वे 18 घंटे भी कर लें, सिस्टम में कोई फर्क नहीं पड़ने वाला है। देश की समस्याओं का समाधान तब तक नहीं होगा, जब तक राजनीतिक सहमति से कोई हल नहीं होगा।

 

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पाकिस्तान में क्या तख्तापलट की उलटी गिनती शुरू?

इमरान खान सरकार में मंत्री रहे फवाद चौधरी कहते हैं कि यह सरकार खत्म हो गई है। इसकी वजह यह है कि आपके तीन मंत्री- गृह मंत्री, संचार मंत्री और स्वास्थ्य मंत्री पीएम को कहते हैं कि आपकी कोई औकात ही नहीं है। इससे पता चलता है कि यह सरकार तो खत्म हो गई। उन्होंने आगे कहा कि हम वर्षों से यह देख रहे हैं कि पाकिस्तान में हुकूमतें आती कैसे हैं और जाती कैसे हैं। उन्होंने पाकिस्तान के मौजूदा सियासी संकट पर कहा कि तीर कमान से निकल चुका है। यह वापस नहीं आ सकता है। 

 

मीडिया, सोशल मीडिया समेत हर जगह सरकार बदलने की चर्चा शुरू होने के बाद गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने कहा कि मौजूदा सरकार अपना संवैधानिक कार्यकाल पूरा करेगी। यह भी कहा कि राष्ट्रपति प्रणाली नहीं लागू होगी। मंत्रिमंडल में कोई विस्तार नहीं होगा। विदेश मंत्रालय संभालने का कोई प्लान नहीं है। मगर नकवी से सवाल यह है कि पाकिस्तान में अभी तक कोई सरकार पांच साल का कार्यकाल पूरा क्यों नहीं कर पाई? अधिकांश लोग इसकी जिम्मेदारी सेना पर डालते हैं।