GLP- 1 दवा का इस्तेमाल मोटापे और टाइप 2 डायबिटीज को नियंत्रित करने के लिए किया जाता है। इस दवा को लेने से शुगर कंट्रोल में रहता है और आपको बार-बार भूख नहीं लगती है। कई सेलेब्स भी वजन घटाने के लिए इस दवा का इस्तेमाल कर चुके हैं। कुछ स्टडी में पाया गया है कि इस दवा को लेने से उम्र भी बढ़ती है।

 

आइए जानते हैं GLP- 1 दवाएं शरीर में इन्फ्लेमेशन (सूजन) को कम कैसे कम करती है? भविष्य में इस दवा का कैसे बेहतर तरीके से इस्तेमाल किया जा सकता है?

 

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कैसे बायोलॉजिकल एजिंग और इन्फ्लेमेशन जुड़ा हुआ है?

बायोलॉजिकल एजिंग का मतलब है कि कोशिकाओं (सेल्स) और अंगों की उम्र बढ़ना है जिससे उनके फंक्शन पर प्रभाव पड़ता है। भले ही दो 60 साल के व्यक्ति की उम्र एक हो लेकिन जीवनशैली, जेनेटिक्स और हेल्थ फेक्टर के कारण बायोलॉजिकल एजिंग अलग होता है। उम्र बढ़ने का मुख्य कारण लगातार होने वाला हल्का सूजन हो सकता है, जब ऐसा होता है जो इम्यून सिस्टम लगातार ऐक्टिव रहता है। इस वजह से दर्द, बुखार या अन्य कोई लक्षण नहीं दिखाई देता है।

 

लगतार सूजन होने के मुख्य कारण जीवन शैली से जुड़े होते हैं जैसे पर्याप्त मात्रा में नींद न लेना, कम चलना फिरना, बहुत ज्यादा तनाव लेना। ये चीजें धीरें धीरे आपके सेल्स और अंगों को नुकसान पहुंचती है जिसकी वजह से गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है और शरीर की उम्र तेजी से बढ़ने लगती है।

क्या सूजन को कम करता है GLP-1?

GLP-1 को लेकर सस्टेन (Sustain) और पायनीर (Pioneer) नाम के दो शोध हुए जिसमें वैज्ञानिकों ने पाया कि सेमाग्लूटाइड लेने वालों में सी रिएक्टिव प्रोटीन (CRP) का स्तर काफी कम हो गया। सीआरपी एक ऐसा प्रोटीन है जो सूजन या किसी बीमारी से लड़ने के दौरान बढ़ जाता है। यह शरीर में मार्कर की तरह काम करता है। शोधकर्ताओं ने पाया कि वजन घटने या ब्लड शुगर बेहतर होने पर सीआरपी का लेवल 20% से 60% तक कम पाया गया। इसका मतलब है कि सेमाग्लूटाइड सीधा शरीर में सूजन को कम कर सकता है।

 

इस बात की पुष्टि करने के लिए वैज्ञानिकों ने पायनीर सेकंड ट्रायल किया। इस शोध में सेमाग्लूटाइड लेने वाली की तुलना दूसरे डायबिटक ड्रग एम्पाग्लिफ्लोजिन (Empagliflozin/Jardiance) से की गई। इस अधय्यन में पाया गया है दोनों का वजन 4% तक ही घटा लेकिन जिन लोगों ने सेमाग्लूटाइड लिया उनका सीपीआर 30% तक कम था।  दूसरे ड्रग का इन्फ्लेमेशन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा। इसका मतलब है कि GLP- 1 शरीर को सुरक्षित रखता है।

 

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क्या GLP-1 बायोलॉजिकल एजिंग को कम कर सकता है?

GLP-1 दवाएं दिमाग के उन हिस्सों को सक्रिय करती हैं जो इम्यून सिस्टम को जरूरत से ज्यादा प्रतिक्रिया देने से रोकता है। इससे  हार्ट, लिवर और किडनी जैसे महत्वपूर्ण अंगों में सूजन कम होता है। इन अंगों में सूजन कम होने से फाइब्रोसिस होने का खतरा कम हो जाता है।

 

सेल्स और टिशूज की एजिंग को कम करता है- ये दवाएं सेल्स और टिशूज  को खराब होने से बचाना काम करता है।


2026 में एक स्टडी हुई जिसमें कुछ लोगों को सेमाग्लूटाइड और अन्य लोगों को प्लेसीबो (नकली दवा) 32 हफ्ते तक दिया गया। यह स्टडी नेचर कम्युनिकेशनंस में पब्लिश हुई है। सेमाग्लूटाइड लेने वालों लोगों में कोशिकाओं के उम्र बढ़ने का स्तर 9% तक कम हो गया और बायोलॉजिकल एजे के सबूत बेहतर मिले। डाक्टर्स GLP-1 दवा को सिर्फ टाइप 2 डायबिटीज और मोटापे को कम करने के लिए दे सकते हैं। अभी इस दवा को उम्र बढ़ाने के लिए नहीं दिया जा सकता है। अभी इसमें अधिक शोध करने की जरूरत है।