आजकल युवाओं के लिए लिंक्डइन सिर्फ नौकरी ढूंढने का जरिया नहीं रहा बल्कि वहां हर वक्त खुद को परफेक्ट दिखाने की एक नई होड़ शुरू हो गई है। इस सोशल मीडिया की वजह से अब घर और काम के बीच की दूरी पूरी तरह खत्म हो गई है। 'जेटी' नाम की कंपनी ने फरवरी 2026 में एक सर्वे किया। इसमें उन्होंने 18 से 27 साल के 919 नौकरी करने वाले युवाओं से बात की। इस सर्वे की 'जेन जी डिजिटल बाउंड्रीज रिपोर्ट' से पता चला कि आजकल के युवा इस बात को लेकर बहुत परेशान रहते हैं कि वे इंटरनेट पर कैसे दिख रहे हैं। हालत यह है कि 95% युवा नौकरी के डर से इंटरनेट पर अपने दिल की बात नहीं लिख पाते। वहीं 90% युवाओं को अपनी किसी पोस्ट की वजह से ऑफिस में डांट खानी पड़ी है वार्निंग मिली है या साथ काम करने वालों से उनका झगड़ा हुआ है।

 

आजकल कंपनियों में सिर्फ यह नहीं देखा जाता कि आप काम कितना अच्छा करते हैं। काम के साथ-साथ यह भी देखा जाता है कि इंटरनेट पर आपकी इमेज कैसी है? अगर सोशल मीडिया पर आपकी किसी बात का लोगों ने गलत मतलब निकाल लिया तो आपकी साल भर की मेहनत खराब हो सकती है। आपका कोई पुराना पोस्ट, कमेंट या एक छोटा सा स्क्रीनशॉट भी आपकी बनी-बनाई इमेज को बिगाड़ सकता है। जब तक ऑफिस और सोशल मीडिया को लेकर कोई साफ नियम नहीं बनते तब तक कर्मचारियों को हमेशा परफेक्ट दिखने के इस दबाव में ही काम करना होगा।

 

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सोशल मीडिया पर दिखने का नया प्रेशर

अब ऑफिस के रिश्ते सिर्फ काम या ऑफिशियल ईमेल तक सीमित नहीं हैं बल्कि ये इंस्टाग्राम और फेसबुक जैसे पर्सनल अकाउंट्स तक पहुंच गए हैं। आंकड़ों के मुताबिक, कर्मचारियों को अपने सोशल मीडिया पर ऑफिस के लोगों को जोड़ना ही पड़ता है। इसमें 57% कर्मचारियों की लिस्ट में उनके साथ काम करने वाले कॉ-वर्कर्स शामिल हैं और ठीक 57% कर्मचारियों ने अपने सीधे मैनेजर को भी जोड़ा हुआ है। इसके अलावा 44% कर्मचारियों ने दूसरे डिपार्टमेंट के मैनेजर्स को और 21% कर्मचारियों ने अपने जूनियर स्टाफ को अपनी फ्रेंड लिस्ट में रखा है। 

खुद को बचाने के लिए युवाओं के नए जुगाड़

इस सोशल मीडिया के डर से बचने के लिए युवा इंटरनेट चलाना बंद नहीं कर रहे हैं। इसके बजाय वे अपनी नौकरी को बचाने के लिए नए तरीके अपना रहे हैं। अब बहुत से लोग अपने अकाउंट को छुपाकर यानी प्राइवेट रखते हैं। वे कुछ भी पोस्ट करने से पहले बहुत सोचते हैं ताकि ऑफिस में कोई गड़बड़ न हो। कई लोग तो घर के लिए और ऑफिस के लिए दो अलग-अलग अकाउंट चलाते हैं। वे अपनी पुरानी फोटो और पोस्ट को भी डिलीट कर देते हैं ताकि कोई पुरानी बात सामने न आए। अब वे अपनी पर्सनल बातें सिर्फ कुछ खास दोस्तों के साथ ही शेयर करते हैं।

 

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इस रिपोर्ट की सबसे बड़ी बात यह है कि जब 95% लोग डर के वजह से अपने सोशल मीडिया पर खुलकर बात नहीं कर पा रहे हैं तो धीरे-धीरे उन्हें चुप रहने की आदत पड़ती जा रही है। जिस सोशल मीडिया को अपनी बात खुलकर कहने के लिए बनाया गया था वही अब ऑफिस के डर की वजह से लोगों को चुप करा रहा है। आज के समय में ऑफिस का टाइम खत्म होने का नियम पूरी तरह खत्म हो चुका है। अलग-अलग ऐप्स और फोन की स्क्रीन के जरिए काम और अच्छी इमेज बनाने का यह प्रेशर कर्मचारियों के पीछे चौबीस घंटे पड़ा रहता है।