हमारे बॉडी में कई तरह के टॉक्सिन (विषैले पदार्थ) होते हैं जो सेहत के लिए खतरनाक है। इन टॉक्सिन को बाहर निकालने में लिवर और किडनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ट्विटर पर एक वीडियो वायरल हो रहा है जिसमें एक व्यक्ति बिजली से चलने वाली मशीन के जरिए टॉक्सिन को निकालने का दावा कर रहा है।

 

इस बारे में हमने मुलुंड के फोर्टिस अस्पताल की त्वचा विशेषज्ञ डॉक्टर  Dr Smriti Naswa Singh से बात की। उन्होंने बताया कि इसका कोई पुख्ता वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है कि त्वचा के संपर्क में आने वाली ऐसी धातु या बिजली से चलने वाली मशीनें शरीर से विषैले पदार्थ बाहर निकाल सकती हैं।

 

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कोई मशीन टॉक्सिन को बाहर नहीं निकलाती है

हमारी त्वचा शरीर की सुरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण परत है और इस तरह शरीर से विषैले पदार्थ बाहर निकालने का काम नहीं करती जैसा कि इन मशीनों में दावा किया जाता है। शरीर से कई तरह के विषैले पदार्थों को बाहर निकालने में हमारे लिवर और किडनी की अहम भूमिका होती है। कुछ मशीनों के इस्तेमाल के बाद पानी या त्वचा में बदलाव जरूर दिखाई दे सकते हैं, लेकिन इसका यह मतलब नहीं है कि शरीर से विषैले पदार्थ बाहर निकल रहे हैं। पैरों को पानी में रखकर इस्तेमाल की जाने वाली ऐसी मशीनों पर हुए अध्ययनों में भी यह साबित नहीं हुआ है कि इनके इस्तेमाल से शरीर से हानिकारक तत्व ज्यादा मात्रा में बाहर निकलते हैं।-  Dr Smriti Naswa Singh

 

क्या फुट पैड फायदेमंद होता है?

मार्केट में फुट पैड मिलते हैं जो शरीर से टॉक्सिन को निकालने का दावा करती है। इसके बारे में बात करते हुए डॉक्टर स्मृति ने कहा कि इसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इस्तेमाल के बाद इन पट्टियों का रंग काला या गहरा हो जाता है और कई बार इसे शरीर से विषैले पदार्थ निकलने का प्रमाण बताया जाता है। लेकिन केवल पट्टी का रंग बदल जाना इस बात का सबूत नहीं है कि शरीर से कोई विषैला पदार्थ बाहर निकला है। फिलहाल ऐसा कोई भरोसेमंद वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है जिससे यह कहा जा सके कि ये पट्टियां अपने बताए गए तरीके से काम करती हैं।

 

त्वचा के लिहाज से भी ऐसी चिपकने वाली पट्टियों का लंबे समय तक इस्तेमाल कुछ लोगों में खुजली, रेडनेस या त्वचा में जलन पैदा कर सकता है। खासकर सेंसिटिव त्वचा वाले लोगों में इसका खतरा अधिक हो सकता है। इसलिए अगर किसी व्यक्ति को वास्तव में शरीर में किसी जहरीले पदार्थ या भारी धातु के पहुंचने की आशंका है, तो ऐसी पट्टियों पर निर्भर रहने के बजाय डॉक्टर से जांच और उचित इलाज करवाना चाहिए।

शरीर टॉक्सिन को कैसे कम करता है?

हमारे शरीर में खुद ही विषैले और अनावश्यक पदार्थों को बाहर निकालने की एक प्राकृतिक व्यवस्था होती है। लिवर शरीर में मौजूद कई पदार्थों को तोड़कर उसे प्रोसेस्ड करता है, जबकि गुर्दे खून को साफ करके विषैले पदार्थों को पेशाब के जरिए बाहर निकालते हैं। फेफड़े और पाचन तंत्र भी शरीर से कुछ पदार्थों को बाहर निकालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

 

इसलिए शरीर को स्वस्थ रखने के लिए किसी विशेष मशीन या टॉक्सिन रिमूवल प्रोडक्ट पर निर्भर रहने के बजाय पर्याप्त पानी पीना, नियमित व्यायाम करना, पूरी नींद लेना और संतुलित आहार लेना ज्यादा जरूरी है। धूम्रपान, अत्यधिक शराब, प्रदूषण और अन्य हानिकारक पदार्थों के अनावश्यक संपर्क से भी बचना चाहिए।

 

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क्या खान-पान से शरीर में मौजूद टॉक्सिन कम हो सकते हैं?

संतुलित और पौष्टिक आहार शरीर को स्वस्थ रखने के साथ-साथ लिवर, गुर्दे और शरीर के दूसरे अंगों को सामान्य रूप से काम करने में मदद करता है। भोजन में हरी सब्जियां, फल, साबुत अनाज, दालें, पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन और रेशेदार खाद्य पदार्थ शामिल करना और पर्याप्त पानी पीना अच्छी आदतें हैं।

 

लेकिन किसी एक खाद्य पदार्थ, पेय या खास तरह की आहार योजना को शरीर में जमा सभी विषैले पदार्थों को बाहर निकालने का तरीका नहीं माना जा सकता। बाजार में मिलने वाले कई टॉक्सिन रिमूवल प्रोडक्ट या केवल फलों के रस पर आधारित आहार के दावों के पीछे पर्याप्त वैज्ञानिक प्रमाण नहीं हैं।

 

अगर किसी व्यक्ति के शरीर में किसी जहरीले पदार्थ के पहुंचने की पुष्टि हुई है, तो केवल खान-पान में बदलाव करना इलाज का विकल्प नहीं हो सकता। ऐसे मामलों में डॉक्टर की सलाह और जरूरत के अनुसार उचित चिकित्सा जरूरी है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि स्वस्थ खान-पान और जीवनशैली शरीर की प्राकृतिक सफाई व्यवस्था को बेहतर तरीके से काम करने में मदद कर सकते हैं, लेकिन बाहर से शरीर के विषैले पदार्थ निकालने का दावा करने वाली मशीनों और पट्टियों को प्रभावी मानने से पहले उनके वैज्ञानिक प्रमाण जरूर देखे जाने चाहिए।