पीरियड्स के दौरान हल्का या सहने लायक दर्द होना सामान्य बात है लेकिन जब दर्द बहुत तेज हो, रोजमर्रा के काम, पढ़ाई या ऑफिस प्रभावित होने लगे और हर महीने दर्द की तीव्रता ज्यादा महसूस हो, तो इसे सामान्य पीरियड पेन मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। इसी दर्दनाक माहवारी की स्थिति को मेडिकल भाषा में डिसमेनोरिया कहा जाता है। इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं।

 

कुछ महिलाएं में यह बीमारी बिना किसी दूसरी बीमारी के होता है। जबकि कुछ मामलों में एंडोमेट्रियोसिस, एडेनोमायोसिस या पेल्विक इंफेक्शन जैसी समस्या भी कारण हो सकती है। इसलिए लगातार या असहनीय दर्द होने पर तुरंत डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है। इसके बारे में हमने जयपुर के आब्सटेट्रिक्स एंड गायनेकोलॉजी कोकून हॉस्पिटल की सीनियर कंसल्टेंट डॉक्टर पंखुड़ी गौतम से बात की। आइए जानते हैं इस बीमारी के लक्षण क्या है और इससे बचाव कैसे कर सकते हैं।

 

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डिसमेनोरिया के लक्षण

डिसमेनोरिया में पेट के निचले हिस्से में तेज दर्द और ऐंठन सबसे आम लक्षण है। यह दर्द कमर और जांघों तक भी पहुंच सकता है। इसके साथ मतली, उल्टी, सिरदर्द, चक्कर, कमजोरी, थकान या दस्त जैसी शिकायत भी हो सकती है। 

बचाव कैसे करें?

इसके लक्षणों को कम करने के लिए नियमित हल्की एक्सरसाइज, वॉकिंग, योग, पर्याप्त नींद और तनाव को नियंत्रित रखना मददगार हो सकता है। पीरियड्स के दौरान पेट के निचले हिस्से पर गर्म पानी की थैली या हीट पैड लगाने से भी दर्द में राहत मिल सकती है। अगर दर्द लगातार बढ़ रहा हो या सामान्य गतिविधियां प्रभावित हो रही हों, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।


 

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किस तरह का खान पान होना चाहिए?

डिसमेनोरिया में संतुलित और पोषण से भरपूर खान-पान पर ध्यान देना चाहिए। डाइट में हरी सब्जियां, मौसमी फल, दालें, साबुत अनाज, पर्याप्त प्रोटीन और पानी शामिल करें। अगर पीरियड्स में ब्लीडिंग ज्यादा होती है तो आयरन से भरपूर खाद्य पदार्थ लेना भी महत्वपूर्ण है। बहुत ज्यादा नमक, पैकेज्ड और तला-भुना भोजन, अधिक मीठी चीजें और जरूरत से ज्यादा चाय-कॉफी का सेवन कम करना बेहतर रहता है। साथ ही पर्याप्त पानी पीना चाहिए। हालांकि खान-पान से लक्षणों में कुछ राहत मिल सकती है लेकिन बहुत ज्यादा या लगातार दर्द होने पर केवल डाइट पर निर्भर रहने के बजाय इसके कारण की चिकित्सकीय जांच कराना जरूरी है।