महिलाओं में यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन (UTI) होना एक आम समस्या है। इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं। भारत में 50 से 60% महिलाएं अपनी जिंदगी में एक बार यूटीआई का सामना करती हैं। वहीं, 25 से 30% वे महिलाएं हैं जिन्हें बार-बार यूटीआई का इंफेक्शन होता है। खासतौर से मेनोपॉज के बाद महिलाओं में यूटीआई की समस्या होना आम बात है। इसका मुख्य कारण एस्ट्रोजन हार्मोन का स्तर कम होना है।
मेनोपॉज के बाद एस्ट्रोजन की कमी से योनी और मूत्रमार्ग के आस पास की त्वचा पतली और सेवंदनशील हो सकती है। साथ ही योनी में मौजूद बैक्टीरिया का संतुलन बदल सकता है जिससे हानिकारक बैक्टीरिया को बढ़ने का मौका मिलता है। मूत्राशय को पूरी तरह खाली करने में कठिनाई होने पर भी संक्रमण का जोखिम बढ़ सकता है। हमने इसके बारे में नई दिल्ली के कैलाश कॉलोनी में स्थित क्लाउडनाइन अस्पताल की स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉक्टर मंजीत अरोड़ा से बात की।
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यूटीआई के सामान्य लक्षण क्या हैं?
यूटीआई होने पर बार-बार या अचानक पेशाब लगना, पेशाब करते समय जलन या दर्द, थोड़ी-थोड़ी मात्रा में पेशाब आना और पेशाब में बदबू या बदलाव महसूस होना जैसे लक्षण हो सकते हैं। कुछ महिलाओं को निचले पेट या पेल्विक हिस्से में दर्द या भारीपन भी महसूस हो सकता है।
अगर संक्रमण ऊपर जाकर किडनी तक पहुंचता है, तो बुखार, ठंड लगना, कमर या पीठ के एक तरफ दर्द, मतली या उल्टी जैसे लक्षण हो सकते हैं। ऐसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
क्या यूरिनरी इनकॉन्टिनेंस और सेक्शुअल एक्टिविटीज भी वजह बन सकते हैं?
हां, दोनों कुछ महिलाओं में यूटीआई के जोखिम को बढ़ा सकते हैं लेकिन इन्हें अकेला कारण नहीं माना जा सकता। यूरिनरी इनकॉन्टिनेंस यानी पेशाब का अनजाने में निकल जाना, खासकर जब लंबे समय तक नमी बनी रहे, स्वच्छता बनाए रखना मुश्किल कर सकता है और संक्रमण का जोखिम बढ़ा सकता है। मेनोपॉज के बाद कमजोर पेल्विक फ्लोर और मूत्राशय से जुड़ी समस्याएं भी इनकॉन्टिनेंस में योगदान दे सकती हैं।
सेक्सुअल एक्टिविटी के दौरान बैक्टीरिया मूत्रमार्ग के आसपास से मूत्रमार्ग में पहुंच सकते हैं इसलिए कुछ महिलाओं में संभोग के बाद यूटीआई होने की संभावना बढ़ जाती है। पर्याप्त पानी पीना और संभोग के बाद पेशाब करना कुछ महिलाओं के लिए मददगार हो सकता है।
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क्या होता है वेजाइनल एस्ट्रोजन थेरेपी?
मेनोपॉज के बाद एस्ट्रोजन की कमी के कारण योनि और मूत्रमार्ग में होने वाले बदलावों को Genitourinary Syndrome of Menopause (GSM) कहा जाता है। इसमें योनि में सूखापन, जलन, सेक्स के दौरान दर्द और बार-बार यूटीआई जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
वेजाइनल एस्ट्रोजन थेरेपी में कम मात्रा में एस्ट्रोजन को योनि के आसपास स्थानीय रूप से दिया जाता है। यह क्रीम, टैबलेट/इंसर्ट या रिंग जैसे रूपों में उपलब्ध हो सकती है। इसका उद्देश्य स्थानीय ऊतकों को बेहतर बनाए रखना और मेनोपॉज से जुड़े कुछ मूत्र-जनन संबंधी लक्षणों को कम करना है। कुछ महिलाओं में बार-बार होने वाले यूटीआई की रोकथाम में भी डॉक्टर इसे विकल्प के रूप में सुझा सकते हैं। हालांकि, यह हर महिला के लिए उपयुक्त नहीं है और इसे डॉक्टर की सलाह से ही इस्तेमाल करना चाहिए।
डॉक्टर को कब दिखाना चाहिए?
अगर यूटीआई के लक्षण पहली बार दिखाई दें, बार-बार संक्रमण हो रहा हो या लक्षण इलाज के बावजूद बने रहें, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। बार-बार यूटीआई को केवल उम्र या मेनोपॉज का सामान्य हिस्सा मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
बुखार, कंपकंपी, कमर, पीठ में तेज दर्द, उल्टी, पेशाब में खून या अचानक बहुत अधिक कमजोरी जैसे लक्षण हों तो जल्द चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए। बार-बार संक्रमण होने पर डॉक्टर आवश्यकता के अनुसार यूरिन टेस्ट और यूरिन कल्चर कराकर सही कारण और इलाज तय कर सकते हैं।
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यूटीआई से बचाव कैसे करें?
पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं और लंबे समय तक पेशाब न रोकें।
टॉयलेट के बाद सफाई करते समय आगे से पीछे की ओर पोंछें।
पेशाब के बाद मूत्राशय को पूरी तरह खाली करने की कोशिश करें।
संभोग के बाद पेशाब करना उपयोगी हो सकता है।
पेल्विक फ्लोर की कमजोरी या यूरिनरी इनकॉन्टिनेंस हो तो उसका उचित उपचार लें।
अत्यधिक सुगंधित इंटीमेट वॉश या ऐसे प्रोडक्ट्स से बचें जो संवेदनशील त्वचा में जलन पैदा कर सकते हैं।
बार-बार यूटीआई होने पर खुद से एंटीबायोटिक लेने के बजाय डॉक्टर की सलाह लें।
डायबिटीज के कारण यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन (UTI) का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए पेशाब में जलन, बार-बार या तुरंत पेशाब लगना, निचले पेट में दर्द, बुखार या पेशाब में किसी तरह का बदलाव जैसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए और समय पर डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। इलाज में देरी होने पर कुछ मामलों में संक्रमण किडनी और फिर ब्लडस्ट्रीम तक फैल सकता है, जिससे सेप्सिस जैसी गंभीर और जानलेवा स्थिति हो सकती है।
क्रैनबेरी जूस या क्रैनबेरी प्रोडक्ट्स कुछ महिलाओं में बार-बार होने वाले यूटीआई के जोखिम को कम करने में मदद कर सकते हैं, लेकिन मौजूदा संक्रमण के इलाज के लिए इन्हें एंटीबायोटिक का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए। अगर साल में तीन या उससे अधिक बार, या छह महीने में दो या अधिक बार यूटीआई हो रहा है, तो इसे रिकरेंट यूटीआई माना जा सकता है। ऐसे मामलों में डॉक्टर कारण की जांच करने के बाद कुछ मरीजों में संक्रमण की पुनरावृत्ति रोकने के लिए कम मात्रा में या निर्धारित अवधि के लिए एंटीबायोटिक दे सकते हैं। इसे बिना डॉक्टर की सलाह के नियमित रूप से नहीं लेना चाहिए।
