किसी मौसम में खासकर बारिश के मौसम में अक्सर बाहर का खाने या पानी की वजह से फूड पॉइजनिंग और पेट में इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है। कई लोग इसको ठीक करने के लिए दवा खा लेते हैं और एक-दो दिन में ठीक भी हो जाते हैं। कई लोगों के साथ ऐसा नहीं होता है कि वह ठीक हो पाते हैं। उल्टी, दस्त और पेट दर्द शुरूआत में भले ही ठीक हो जाए पर उसके बाद कई महीनों या सालों तक मरोड़, गैस और कब्ज की शिकायत बनी रहती है। इसे साधारण पेट की गड़बड़ी समझने की गलती नहीं करनी चाहिए।
अगर आपके साथ भी ऐसा हो रहा है, तो यह सामान्य समस्या नहीं बल्कि 'पोस्ट-इंफेक्शन इरिटेबल बाउल सिंड्रोम' (Post-Infection IBS) हो सकता है। यह इंफेक्शन खत्म होने के सालों बाद भी परेशान कर सकती है।
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कैसे होता है?
हेल्थ एक्सपर्ट्स ऐसा कहते हैं कि गंभीर पेट के इंफेक्शन से पीड़ित होने वाले हर 10 में से 1 व्यक्ति को आगे चलकर इस बीमारी का सामना करना पड़ता है। आसान शब्दों में समझे तो जब पेट में कोई बैक्टीरिया हमला करता है, तो हमारा शरीर उसे बाहर फेंकने के लिए दस्त और उल्टी जैसी प्रतिक्रिया देता है।
ज्यादातर मामलों में इंफेक्शन खत्म होते ही पेट को बहुत आराम मिलता है। वहीं कुछ लोगों में इंफेक्शन तो चला जाता है पर पेट का नर्वस सिस्टम और इम्यून सिस्टम लंबे समय तक गड़बड़ रहता है। यह बिल्कुल किसी 'हैंगओवर' की तरह है, जहां शराब का असर खत्म होने के बाद भी उसका बुरा असर शरीर पर टिका रहता है।
किन्हें है सबसे ज्यादा खतरा?
- जिन लोगों को लंबे समय के लिए पेट में इंफेक्शन रहता है, इसके होने की बहुत ज्यादा संभावना रहती है। साथ ही पुरुषों से ज्यादा महिलाओं में यह समस्या देखने को मिलती है।
- रिसर्च से पता चलता है कि पैरासाइट से होने वाले इंफेक्शन के बाद इसके होने की संभावना सबसे ज्यादा होती है। इसके बाद बैक्टीरिया और वायरस वाले इंफेक्शन का नंबर आता है।
लक्षण क्या हैं?
इसके प्रमुख लक्षणों में पेट में लगातार दर्द, ऐंठन, गैस, पेट फूलना, बार-बार दस्त लगना या कब्ज होना शामिल है। इसे पकड़ने के लिए कोई एक खास टेस्ट नहीं होता। डॉक्टर जांच करके यह देखते हैं कि पेट में कोई पुराना बैक्टीरिया मौजूद तो नहीं है।
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इलाज और बचाव के उपाय
इस समस्या का इलाज मरीज के लक्षणों के हिसाब से किया जाता है। दस्त रोकने, कब्ज दूर करने और पेट की ऐंठन कम करने के लिए डॉक्टर की सलाह से दवाएं ली जाती हैं। कुछ समय के लिए ऐसा खाना बंद करना पड़ता है जो पेट में गैस या दस्त बढ़ाता है। फाइबर युक्त खाना भी इसमें फायदेमंद माना जाता है।
इस बीमारी से आपको डरने की जरूरत नहीं है। राहत की बात यह है कि पोस्ट-इंफेक्शन IBS से पीड़ित मरीज अपने आप ठीक हो जाते हैं। हालांकि, पूरी तरह उबरने में कुछ महीनों से लेकर कुछ साल तक का समय लग सकता है। कुछ मामलों में यह बीमारी लंबे समय तक बनी रह सकती है लेकिन सही समय पर पहचान और परहेज से इसे आसानी से कंट्रोल किया जा सकता है।
