आधुनिक युद्ध में ड्रोन का इस्तेमाल लगातार बढ़ रहा है। रूस-यूक्रेन युद्ध में बड़े पैमाने पर ड्रोन के इस्तेमाल के बाद पूरी दुनिया का ध्यान सैन्य ड्रोन पर गया है। स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) के आंकड़ों के अनुसार, 2022 से 2025 के बीच सैन्य ड्रोन आयात के मामले में भारत पाकिस्तान से करीब तीन गुना आगे रहा। वहीं, इस दौरान सैन्य ड्रोन के इस्तेमाल और आयात में यूक्रेन और रूस की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा रही।

 

इस आंकड़े के साथ भारत दुनिया में सैन्य ड्रोन हासिल करने वाले देशों की लिस्ट में छठे नंबर पर रहा। भारत को मिले ड्रोन दुनिया भर में ट्रांसफर किए गए कुल 16,822 सैन्य ड्रोन का करीब 0.7% हैं। इस लिस्ट में यूक्रेन पहले और रूस दूसरे नंबर पर रहा। इन दोनों देशों को मिले ड्रोन दुनिया भर में हुए कुल सैन्य ड्रोन ट्रांसफर का 91% से ज्यादा हैं।

 

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4 साल में भारत औप पाकिस्तान ने कितने ड्रोन खरीदे?

SIPRI के आंकड़ों के मुताबिक, 2022 से 2025 के बीच भारत को विदेशों से 119 सैन्य ड्रोन मिले। वहीं, इस दौरान पाकिस्तान को 40 से भी कम ड्रोन मिले यानी भारत को पाकिस्तान के मुकाबले 86 ड्रोन ज्यादा मिले। इसी वजह से पाकिस्तान इस लिस्ट में 11वें नंबर पर है। हालांकि, SIPRI का यह आंकड़ा दुनियाभर में इस्तेमाल हो रहे सभी तरह के ड्रोन की पूरी संख्या नहीं बताता। इसमें मुख्य रूप से 150 किलोग्राम या उससे ज्यादा वजन वाले बड़े सैन्य ड्रोन, एकतरफा हमले में इस्तेमाल होने वाले ड्रोन और लोइटरिंग म्यूनिशन शामिल किए जाते हैं। छोटे FPV ड्रोन और आम कमर्शियल ड्रोन आमतौर पर इस आंकड़े में शामिल नहीं होते।

भारत-पाकिस्तान के हथियार आयात में भी अंतर

SIPRI के मुताबिक, 2021 से 2025 के बीच भारत दुनिया में दूसरा सबसे बड़ा हथियार आयात करने वाला देश रहा। हालांकि, 2016-20 के मुकाबले इस दौरान भारत के हथियार आयात में 4 फीसदी की कमी आई। भारत के कुल हथियार आयात में रूस की हिस्सेदारी 40 फीसदी रही। इसके साथ ही भारत पश्चिमी देशों से भी रक्षा उपकरणों की खरीद बढ़ा रहा है। वहीं, 2021-25 के दौरान पाकिस्तान के हथियार आयात में 66 फीसदी की बढ़ोतरी हुई। पाकिस्तान ने जितने हथियार खरीदे, उनमें करीब 80 फीसदी चीन से आए। यानी दोनों देशों के हथियार खरीदने के स्रोतों में काफी बड़ा अंतर है।

 

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यूक्रेन और रूस की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा

2022 से 2025 के बीच सैन्य ड्रोन हासिल करने के मामले में यूक्रेन सबसे आगे रहा। इस दौरान उसे 8,664 ड्रोन मिले, जो दुनिया में दर्ज कुल ड्रोन का 51.5 फीसदी है। रूस 6,720 ड्रोन के साथ दूसरे नंबर पर रहा, जिसकी हिस्सेदारी 39.9 फीसदी रही। इसके बाद ताइवान को 291, दक्षिण कोरिया को 190 और अजरबैजान को 154 सैन्य ड्रोन मिले। वहीं, जॉर्जिया को 100, अल्बानिया को 56 और हंगरी और लिथुआनिया को 50-50 ड्रोन मिले। आंकड़ों से पता चलता है कि यूक्रेन और रूस के बाद दूसरे देशों को मिले सैन्य ड्रोन की संख्या काफी कम रही।