नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट में पश्चिम बंगाल में शिक्षा को लेकर होने वाले खर्च पर बड़े खुलासे हुए हैं। CAG ने 2019-20 से 2023-24 की कंप्लाएंस रिपोर्ट में बताया है कि पश्चिम बंगाल की सरकार ने केंद्र से मिले पैसे ही नहीं खर्च किए। इसका नतीजा यह हुआ कि राज्य को 395 करोड़ रुपये लौटाने पड़े। इन 5 साल में पश्चिम बंगाल की सरकार उपलब्ध पैसों में से सिर्फ 46 से 65 प्रतिशत पैसों का इस्तेमाल ही कर पाई। CAG रिपोर्ट के मुताबिक, 520 स्कूलों में कोई शिक्षक ही नहीं था और दूसरी तरफ कई ऐसे स्कूल भी थे जहां स्टूडेंट-टीचर रेशियो तय मानक से बहुत ज्यादा था।
CAG ने साल 2019-20 से 2023-24 के बीच राज्य में योजना के क्रियान्वयन की जांच की है। इस रिपोर्ट में उच्च प्राथमिक से उच्च माध्यमिक स्तर तक विद्यार्थियों के आगे की कक्षाओं में जाने में 28 से 42 प्रतिशत तक की कमी को प्रमुख चिंता के रूप में जाहिर किया है। ऑडिट टीम ने बीच में ही पढ़ाई छूट जाने के कारणों का पता लगाने के लिए 6 चयनित जिलों के 21 उच्च विद्यालयों में पढ़ाई छोड़ चुके 581 बच्चों का सर्वेक्षण किया। इस रिपोर्ट में कहा गया है, 'सर्वेक्षण में सामने आया है कि विद्यार्थियों के स्कूल छोड़ने के प्रमुख कारण आर्थिक कठिनाइयां, कम उम्र में विवाह और जल्दी कमाई शुरू करने की इच्छा हैं।
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क्यों पढ़ाई छोड़ रहे बच्चे?
रिपोर्ट के अनुसार, गरीबी और आर्थिक परेशानी पढ़ाई छोड़ने का सबसे बड़ा कारण रही। सर्वेक्षण में शामिल 53 प्रतिशत अभिभावकों ने आर्थिक संकट के कारण बच्चों को स्कूल से हटाने की बात कही। वहीं, 14 प्रतिशत ने विद्यार्थियों की पढ़ाई जारी रखने में रुचि नहीं होने, 13 प्रतिशत ने काम के लिए पलायन और 12 प्रतिशत ने कम उम्र में विवाह को शिक्षा छोड़ने का कारण बताया।
खर्च नहीं किए पैसे, लौटाने पड़े
वित्तीय प्रबंधन की समीक्षा करते हुए CAG ने कहा कि पांच वर्षों के दौरान राज्य में योजना के तहत मिले पैसों का इस्तेमाल केवल 46 से 65 प्रतिशत के बीच रहा। इस रिपोर्ट में कहा गया है, 'केंद्र और राज्य सरकारों की ओर से पैसे जारी करने में देरी और निर्धारित कार्यों के क्रियान्वयन में देरी ने वित्तीय अनुशासन को कमजोर किया और योजना के उद्देश्यों को हासिल करने की प्रक्रिया प्रभावित हुई।'
CAG ने बताया कि स्वीकृत निर्माण कार्य पूरे नहीं होने के कारण स्कूलों के बुनियादी ढांचे के लिए निर्धारित 395 करोड़ रुपये राज्य को वापस करने पड़े। इसके अलावा कार्यों के क्रियान्वयन में देरी और कमियों के कारण केंद्र से मिलने वाली 2,428 करोड़ रुपये की राशि भी प्रभावित हुई, जिससे योजना का दायरा सीमित हुआ। CAG की रिपोर्ट पर राज्य के स्कूल शिक्षा विभाग ने अगस्त 2025 में दिए अपने जवाब में कहा कि उच्च कक्षाओं में नामांकन में कमी का कारण यह है कि कुछ विद्यार्थी माध्यमिक शिक्षा पूरी करने के बाद कमाई शुरू कर देते हैं, जबकि कुछ रोजगार के लिए पलायन कर जाते हैं।
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बिना टीचर के चलते रहे 520 स्कूल
CAG रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि राज्य में 500 से ज्यादा स्कूल ऐसे थे, जहां एक भी टीचर तैनात नहीं था। इस रिपोर्ट में सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की नियुक्ति और स्टूडेंट-टीचर रेशियो में गंभीर कमियों को भी उजागर किया गया है। CAG ने कहा है, 'राज्य के 8 प्रतिशत यानी 5,152 स्कूलों में केवल एक टीचर कार्यरत था, जिससे 1,76,491 विद्यार्थी प्रभावित हुए। वहीं 520 स्कूलों में कोई टीचर ही नहीं था, जिससे 8,596 विद्यार्थियों की शिक्षा प्रभावित हुई।' CAG रिपोर्ट में प्रशासनिक असंतुलन की ओर भी इशारा किया गया है। इसमें कहा गया कि 150 से कम विद्यार्थियों वाले स्कूलों में 40,530 प्रधान शिक्षक तैनात थे, जो शिक्षा का अधिकार (RTE) कानून के तहत निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं है।
रिपोर्ट के अनुसार, प्राथमिक स्तर के 29 प्रतिशत और उच्च प्राथमिक स्तर के 30 प्रतिशत स्कूलों में न्यूनतम विद्यार्थी-शिक्षक अनुपात के मानक पूरे नहीं हो सके। इसके पीछे प्राथमिक स्तर पर 31,684 और उच्च प्राथमिक स्तर पर 2,058 शिक्षकों की कमी बताई गई है। वहीं उच्च माध्यमिक स्तर के 79 प्रतिशत स्कूलों में निर्धारित विद्यार्थी-शिक्षक अनुपात से अधिक संख्या पाई गई।
