महाराष्ट्र की सियासत में ठाकरे परिवार की चूलें हिलाने वाला अगर कोई शख्स पैदा हुआ तो वह हैं एकनाथ शिंदे। उन्होंने राज्य की सियासत में दबदबे वाले 'ठाकरे' परिवार को बेबस कर दिया है। पहले सत्ता छीनी, पार्टी छीनी अब और सांसद छीनने की तैयारी है। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के 9 लोकसभा सांसदों में से 6 सांसद अब महाराष्ट्र के डिप्टी चीफ मिनिस्टर एकनाथ शिंदे की गुट में जाने की तैयारी कर रहे हैं।
देश की सियासत में एक बार फिर एक बार दलबदल विरोधी कानून पर चर्चा शुरू हो गई है। हर किसी के मन में यह सवाल है कि क्या न सासंदों को अयोग्य ठहराया जाएगा, दल-बदल कानून इन पर लागू होगा या नहीं होगा। एक सवाल यह भी है कि क्या ये सांसद बिना अयोग्य ठहराए दूसरे गुट में शामिल हो पाएंगे?
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दल बदल कानून क्या कहता है?
सुप्रीम कोर्ट में एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड (AoR) विशाल अरुण मिश्र ने कहा, 'संविधान की 10वीं अनुसूची के तहत अगर कोई विधायक या सांसद अपनी पार्टी छोड़कर दूसरी पार्टी में चला जाता है या पार्टी के व्हिप के खिलाफ वोट करता है तो उसे अयोग्य घोषित किया जा सकता है।'
विशाल अरुण मिश्रा ने कहा, 'पहले एक तिहाई सदस्यों के अलग होने से बचाव हो जाता था। साल 2003 में 91वें संशोधन के बाद यह रक्षा खत्म कर दी गई। अब ऐसे मामलों में पार्टी का विलय ही संवैधानिक बचाव का रास्ता होता है। मर्जर के लिए भी पार्टी के 2 तिहाई सदस्यों की सहमति जरूरी होती है।'
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सुप्रीम कोर्ट का क्या फैसला है?
विशाल अरुण मिश्र ने कहा, 'साल 2023 में शिवसेना मामले में सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा था कि अब सिर्फ 2 तिहाई समर्थन होना कोई बचाव नहीं होता है। सिर्फ तभी सदस्य बच सकते हैं जब मूल पार्टी का दूसरे पार्टी के साथ मर्जर हो और दो-तिहाई सदस्य उसका समर्थन करें। अदालत ने यह भी कहा कि सिर्फ विधायकों की संख्या से नहीं, बल्कि पार्टी के संविधान और नेतृत्व संरचना से तय होता है कि असली पार्टी कौन सी है।'
शिवसेना (UBT) कैसे कर सकती है बचाव?
शिवसेना (यूबीटी) के लोकसभा नेता अरविंद सावंत ने लोकसभा स्पीकर को चिट्ठी लिखकर कहा है कि बागी सांसदों को अलग पहचान न दी जाए। उन्होंने कहा कि संविधान अब सिर्फ 2 तिहाई संख्या में अलगाव को मान्यता नहीं देता। पार्टी ने दिल्ली में संसदीय दल की बैठक बुलाई, जिसमें सिर्फ 3 सांसद पहुंचे, जबकि 6 गैरहाजिर रहे। ऐसा हो सकता है कि सांसदों को अयोग्य ठहराया जा सके।
क्या दल बदलने पर सांसद अयोग्य ठहराए जाएंगे?
सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता विशाल अरुण मिश्र ने कहा, 'अगर ये 6 सांसद दो-तिहाई का आंकड़ा पूरा करते हुए शिंदे गुट में मर्जर का एलान करें तो गोवा हाईकोर्ट के एक फैसले के आधार पर बच सकते हैं।'
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गोवा हाई कोर्ट का फैसला क्या था?
साल 2019 में कांग्रेस के 15 विधायकों में से 10, दो-तिहाई से ज्यादा बीजेपी में शामिल हो गए थे। उन्हें अयोग्य नहीं ठहराया गया था। अदालत ने कहा था कि विधायिका दल के दो-तिहाई सदस्यों द्वारा दूसरे दल में विलय को 10वीं अनुसूची के तहत वैध माना जाएगा। हालांकि यह फैसला विवादास्पद रहा। याचिकाकर्ताओं और कानून विशेषज्ञों के जानकारों का कहना है कि विलय मूल राजनीतिक दल का होना चाहिए, न कि सिर्फ विधायकों का। यह मामला फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है।
शिवसेना के वकील क्या कह रहे हैं?
शिवसेना (यूबीटी) के वकीलों का तर्क है कि मर्जर पार्टी स्तर पर होना चाहिए, सिर्फ सांसद तय नहीं कर सकते। संसदीय दल पार्टी की शाखा मात्र है। इसलिए ये सांसद अयोग्यता से नहीं बच पाएंगे।
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अब आगे क्या हो सकता है?
अगर बागी सांसद एकनाथ शिंदे गुट में चले गए तो शिव सेना (यूबीटी) उन्हें नोटिस देगी और स्पीकर से अयोग्यता की कार्रवाई की मांग करेगी। अंतिम फैसला लोकसभा स्पीकर को करना है, लेकिन यह मुद्दा सुप्रीम कोर्ट में भी लंबित है। कई राज्यों में इसी तरह के विवाद चल रहे हैं, इसलिए हर किसी की नजर, फैसले पर टिकी है। विशाल अरुण मिश्रा ने कहा कि वैसे, सिर्फ कवायदें हो रहीं हैं, सांसदों की सदस्यता बची रहेगी और विलय को मंजूरी भी मिल सकती है।


