दिल्ली के सत्य निकेतन में पांच मंजिला इमारत गिरने से 7 लोगों की मौत के मामले में दिल्ली हाई कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने दिल्ली में PG और हॉस्टलों में रहने वाले छात्रों की सुरक्षा पर चिंता जताते हुए दिल्ली नगर निगम (MCD) को एक हफ्ते के भीतर सुरक्षा ऑडिट कराने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा कि छात्रों की सुरक्षा की जिम्मेदारी केवल मकान मालिकों की नहीं बल्कि संबंधित सरकारी अधिकारियों की भी है।
मामले की सुवाई चीफ जस्टिस डीके उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की बेंच ने की। कोर्ट ने दिल्ली सरकार, MCD, दिल्ली यूनिवर्सिटी और दिल्ली पुलिस से मामले में जवाब मांगा है। संबंधित अधिकारियों को 10 दिनों के भीतर हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया गया है। कोर्ट ने यह भी पूछा कि PG में रहने वाले छात्रों की सुरक्षा के लिए दिल्ली में कोई नियामक व्यवस्था है या नहीं।
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हाई कोर्ट ने लगाई फटकार
हाई कोर्ट ने कहा कि अगर संबंधित अधिकारियों ने अपनी कानूनी जिम्मेदारियां सही तरीके से निभाई होतीं तो ऐसी घटनाओं को शायद रोका जा सकता था। कोर्ट ने PG और निजी हॉस्टलों में नियमों के उल्लंघन और बिना अनुमति निर्माण को लेकर भी चिंता जताई। कोर्ट ने कहा कि कई बार जिस इमारत को दो मंजिल बनाने की अनुमति होती है उसमें बिना नींव मजबूत किए कई और मंजिलें बना दी जाती हैं। ऐसे निर्माण से छात्रों की जान खते में पड़ सकती है।
कोर्ट ने MCD से पूचा कि PG में रहने वाले छात्रों के लिए कोई स्पष्ट नियामक व्यवस्ता मौजूद है या नहीं। साथ ही संबंधित इमारतों के पास वैध निर्माण की अनुमति और स्वीकृत नक्शा था या नहीं, इसकी जानकारी भी मांगी गई है। कोर्ट ने अधिकारियों से यह भी पूछा कि सत्य निकेतन हादसे में किसी तरह की प्रशासनिक लापरवाही हुई है या नहीं। MCD और दिल्ली पुलिस की ओर से कोर्ट को बताया गया कि जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं और बचाव अभियान जारी है।
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HC ने DU से हॉस्टल की जानकारी मांगी
हाई कोर्ट ने दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU) से बाहर से आने वाले छात्रों की संख्या और उनके लिए उपलब्ध हॉस्टल की जानकारी देने को कहा है। कोर्ट ने कहा कि DU में हॉस्टल की सीमित सुविधा के कारण बड़ी संख्या में छात्रों को निजी PG में रहना पड़ता है। कोर्ट ने कहा कि छात्रों के लिए सुरक्षित आवास उपलब्ध कराना जरूरी है। साथ ही PG और निजी हॉस्टलों के लिए एक उचित नियामक व्यवस्था बनाए जाने की जरूरत है, ताकि भविष्य में इस तरह के हादसों को रोका जा सके।
