चुनाव आयोग के खिलाफ INDIA गठबंधन ने बीते दिनों हुई मीटिंग में रणनीति बनाई थी और आज सभी सांसद संसद के मकर द्वार से चुनाव आयोग के ऑफिस तक मार्च के लिए निकले। INDIA गठबंधन के इस प्रदर्शन ने दिनभर राजधानी में सियासी हलचल बनाए रखी।  स्पेशल इंटेसिंव रिवीजन ( SIR ) के मुद्दे पर हमलावर विपक्ष कांग्रेस की अगुवाई में अब लड़ाई लड़ने मैदान में उतर चुका है और इसकी एक झलक आज देखने को मिली। INDIA गठबंधन के तमाम सांसदों ने मार्च किया और कई नेताओं को पुलिस ने हिरासत में लिया। इसके बाद राहुल गांधी और प्रियंका गांधी आकाशवाणी भवन में प्रदर्शन पर बैठे और शाम को पुलिस ने उन्हें भी हिरासत में ले लिया। इस पूरे घटनाक्रम पर चुनाव आयोग का भी बयान सामने आया है। 

 

इस प्रदर्शन की रणनीति INDIA गठबंधन की मीटिंग में बन गई थी। प्रदर्शन के लिए तमाम विपक्षी सांसद संसद भवन में इकट्ठा हुए।  राहुल गांधी , प्रियंका गांधी , अखिलेश यादव और अभिषेक बनर्जी समेत तमाम प्रमुख विपक्षी दलों के नेता साथ आए। एक चौंकाने वाली चीज यह दिखी कि अभी तक INDIA गठबंधन से दूर रहने वाले बीजू जनता दल (BJD) के नेता भी प्रदर्शन में शामिल हुए। हालांकि, दिल्ली पुलिस ने पहले से तैयारी कर ली थी और जगह-जगह बैरिगेटिंग कर दी गई थी। कुछ दूर तक मार्च करने के बाद से दिल्ली पुलिस ने सांसदों को हिरासत में लेना शुरू कर दिया। 

 

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बैरिकेड पर चढ़े राहुल गांधी

जब दिल्ली पुलिस ने सांसदों को रोकने की कोशिश की तो सांसद सड़क पर ही बैठ गए। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव, टीएमसी के अभिषेक बनर्जी और डेरेक ओ ब्रायन समेत कई नेताओं को पुलिस ने हिरासत में लिया। राहुल गांधी भी बैरिकेड तक पहुंचे और पुलिस के रोकने के बावजूद वह बैरिकेड के ऊपर चढ़ गए। इसके बाद उन्होंने एक कार्यकर्ता से तिरंगा लिया और बैरिकेड पर से ही तिरंगा लहराया। राहुल गांधी ने दावा किया कि प्रदर्शन में 300 से ज्यादा सांसद शामिल हैं और वह करोड़ों लोगों के प्रतिनिधि हैं। 

आकाशवाणी भवन में घुसे राहुल-प्रियंका

इसके बाद दोपहर में प्रदर्शन का रुख अचानक बदल गया। पुलिस ने रास्ता बंद कर दिया था और विपक्षी नेताओं को चुनाव आयोग के ऑफिस की तरफ जाने की अनुमति नहीं दी जा रही थी। राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, केसी वेणुगोपाल, पवन खेड़ा, इमरान प्रतापगढ़ी और दूसरे नेता आगे बढ़ने की कोशिश करते रहे। इसके बाद राहुल और प्रियंका गांधी समेत कुछ नेता आकाशवाणी भवन परिसर के अंदर चले गए। गौरतलब है कि यह भवन चुनाव आयोग के ऑफिस से कुछ ही मीटर की दूरी पर है। राहुल गांधी को गेट पर मौजूद गार्ड रोकने की कोशिश कर रहे थे लेकिन वे असफल रहे। इसके बाद प्रियंका गांधी, केसी वेणुगोपाल, दीपेंद्र हुड्डा, चरनजीत सिंह चन्नी, पवन खेड़ा समेत कुछ सांसद अंदर पहुंच गए। 

 

 

राहुल गांधी और प्रियंका गांधी आकाशवाणी परिसर में मौजूद बरगद के पेड़ के नीचे बैठ गए। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि उनका उद्देश्य शांतिपूर्ण तरीके से चुनाव आयोग तक पहुंचना और चुनाव आयुक्तों से बात करना है। इसके बाद दिल्ली पुलिस ने राहुल गांधी से वहां से हटने की अपील की लेकिन राहुल गांधी नहीं माने। उन्होंने पुलिस से कहा कि आपके पास दो ही विकल्प हैं। पहला उन्हें चुनाव आयोग के ऑफिस तक जाने दिया जाए और दूसरा उन्हें हिरासत में ले लिया जाए। कुछ समय के बाद कुछ अन्य सांसद भी अंदर चले गए और वहां चट्टाई बिछाकर बैठ गए। चाय और खाने का इंतजाम भी कर लिया गया, जिससे संकेत गया कि अब राहुल गांधी वहां से हटने वाले नहीं है। हालांकि, पुलिस ने माइक से घोषणा की कि इस स्थान पर प्रदर्शन की अनुमति नहीं है। इस बीच टीएमसी समेत अन्य विपक्षी दलों के सांसद भी प्रदर्शन में पहुंचना शुरू हो गए। 

 

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दिल्ली पुलिस ने की कार्रवाई

शाम होते-होते पुलिस ने कार्रवाई शुरू कर दी और करीब नौ घंटे तक चले धरने के बाद आकाशवाणी भवन परिसर में दिल्ली पुलिस पहुंची और प्रदर्शनकारियों को हटाना शुरू किया। राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा, पवन खेड़ा, केसी वेणुगोपाल और अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग समेत कई कांग्रेस नेताओं को हिरासत में लिया गया। इससे पहले युवा कांग्रेस और NSUI के कई कार्यकर्ताओं को भी हिरासत में लिया जा चुका था। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को बसों में बैठाकर अलग-अलग स्थानों पर ले जाने की कार्रवाई की। खबर लिखे जाने तक मिली जानकारी के अनुसार, राहुल गांधी और अन्य सांसदों को किंग्सवे कैंप पुलिस लाइन में रखा गया है। इसके कुछ समय बाद राहुल गांधी और अन्य सांसदों को छोड़ दिया गया। 

 

चुनाल आयोग ने क्या कहा?

चुनाव आयोग के खिलाफ हो रहे इस प्रदर्श को लेकर आयोग ने अपना बयान जारी किया है। आयोग ने कहा कि किसी भी राजनीतिक दल की ओर से आयोग से मिलने के लिए 4 बजे तक कोई औपचारिक अनुरोध नहीं मिला था। आयोग के मुताबिक, दिल्ली पुलिस ने शाम करीब 4 बजे उसे जानकारी दी कि राहुल गांधी के नेतृत्व में सांसदों का एक प्रतिनिधिमंडल आयोग से मिलकर ज्ञापन देना चाहता है। आयोग ने कहा कि 2025 में राजनीतिक दलों और संयुक्त प्रतिनिधिमंडलों से मुलाकात के लिए एक तय प्रक्रिया बनाई गई थी, जिसके तहत संबंधित दल या दलों के अधिकृत प्रतिनिधि को पहले समय लेना होता है और फिर आपसी सहमति से बैठक तय होती है। आयोग का कहना है कि इस प्रक्रिया के तहत मंगलवार शाम 4 बजे तक कोई औपचारिक अनुरोध नहीं मिला था। आयोग ने यह भी कहा कि राजनीतिक दलों को इस प्रक्रिया की जानकारी पहले से दी गई है और सभी दल इसी व्यवस्था के तहत आयोग से मिलते रहे हैं। 

 

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बीजेपी ने क्या कहा?

भारतीय जनता पार्टी विपक्ष के प्रदर्शन को लेकर लगातार हमलावर है। प्रदर्शन शुरू होने से पहले ही पार्टी की ओर से संबित पात्रा ने प्रेस कांफ्रेस की और कांग्रेस पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि बीजेपी की मदद ज्ञानेश जी नहीं बल्कि गणेश जी कर रहे हैं। उन्होंने कांग्रेस पर आरोप लगाते हुए कहा कि कांग्रेस राहुल गांधी को कई बार लॉन्च कर चुकी है और अब वह उन्हें सीधा प्रधानमंत्री बनाना चाहते हैं। इसके साथ ही अन्य नेताओं ने भी मीडिया से बात करते हुए और सोशल मीडिया पर कांग्रेस पार्टी और राहुल गांधी पर अराजकता फैलाने के आरोप लगाए।