भारत के 'नेशनल सुपरकंप्यूटिंग मिशन' के 11 साल पूरे हो गए हैं। अप्रैल 2015 में शुरू हुए इस मिशन के लिए जो लक्ष्य तय किया गया था, भारत उस लक्ष्य से काफी पीछे है। अब तक नेशनल सुपरकंप्यूटिंग मिशन के तहत सिर्फ 40 सुपर कंप्यूटर लग पाए हैं, जबकि 50 से ज्यादा का लक्ष्य तय किया गया था। इनकी कुल क्षमता 68 पेटाफ्लॉप (PF) है। नेशनल सुपरकंप्यूटिंग मिशन का मकसद, सुपरकंप्यूटिंग के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता लाना और शोध संस्थानों तक हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग (HPC) की पहुंच बढ़ाना है। 

NSM की शुरुआत अप्रैल 2015 में करीब 4,500 करोड़ रुपये की लागत के साथ शुरू हुई थी। इसे डिपार्टमेंट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी (DST) और इलेक्ट्रॉनिक्स और इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी मिनिस्ट्री (MeitY) मिलकर चलाते हैं। नेशनल सुपरकंप्यूटिंग मिशन को पुणे के सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ एडवांस्ड कंप्यूटिंग (C-DAC) और बेंगलुरु के इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस (IISc) लागू कर रहे हैं।

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NSM के लिए भारत ने क्या सपना देखा है?

नेशनल सुपरकंप्यूटिंग मिशन का लक्ष्य अलग-अलग शैक्षणिक और शोध संस्थानों में कुल 50 सुपरकंप्यूटर लगाना है। इनकी कुल क्षमता 123 पेटाफ्लॉप से ज्यादा होगी। पेटाफ्लॉप कंप्यूटर की प्रोसेसिंग स्पीड मापने की एक यूनिट है। इसमें क्लिक स्पीड और कार्यक्षमता को मापा जाता है। भारत अभी तय क्षमता से 55 पेटाफ्लॉप पीछे है। 

देश के सुपर कंप्यूटरों का हाल क्या है?

अभी लगे 40 सिस्टम में 13 ऐसे सुपर कंप्यूटर हैं, जिनकी क्षमता 1 पेटाफ्लॉप से ज्यादा है। 12 मध्यम श्रेणी के हैं, जिनकी क्षमता 500 टेराफ्लॉप (TF) से 1 पेटाफ्लॉप के बीच है। बाकी 15 सिस्टम 500 टेराफ्लॉप से कम क्षमता के हैं। यह भी प्रॉसेसिंग क्षमता मापने की एक यूनिट है।

भारत ने सुपरकंप्यूटर के क्षेत्र में 1991 में C-DAC के 'PARAM 8000' से शुरुआत की थी। इसकी क्षमता 1 गीगाफ्लॉप की थी। यही बातमें एडवांस होकर 'PARAM Yuva' के नाम से आया, जिसे 54 टेराफ्लॉप तक विकसित किया गया। अब देश पूरी तरह स्वदेशी तकनीक पर जोर दे रहा है।

C-DAC ने'Rudra' सर्वर तैयार किया है। इन्हें भारतीय कंपनियां बना रही हैं, जिनमें से 6,000 सर्वर 'PARAM Rudra' सुपरकंप्यूटरों में लग चुके हैं और 1,500 अन्य तैयार हो रहे हैं। भारत ने सुपरकंप्यूटरों के लिए बेहद तेज गति वाले 100 और 200 Gbps के नेटवर्क, स्वदेशी कूलिंग सिस्टम और जरूरी सॉफ्टवेयर भी खुद तैयार कर लिए हैं।

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नेशनल सुपरकंप्यूटिंग मिशन से उम्मीदें क्या हैं?

भारतीय की ओर से तैयार सर्वर और  इस्तेमाल बड़े पैमाने पर हो रहा है। सितंबर 2026 तक NSM के ढांचे से 16,000 से ज्यादा शोधकर्ता जुड़े हैं। इनमें 400 से ज्यादा संस्थानों के 2,900 से ज्यादा PhD स्कॉलर हैं। इन सिस्टम पर 1.5 करोड़ से ज्यादा टास्क और असाइनमेंट पूरे किए गए हैं। अब तक 1,990 से ज्यादा शोध पत्र छपे चुके है।

किस तरह के काम में हो रहा है इनका इस्तेमाल?

सुपर कंप्यूटर से से कई काम हो रहे हैं। इनमें दवा की खोज, मौसम और प्रदूषण का अनुमान, नदी बेसिन में बाढ़ की चेतावनी और जंगल की आग के फैलाव जैसे मॉडल पर काम हो रहा है। यह 2 दिन पहले तक बाढ़ का अनुमान सटीक तौर पर दे रहा है।

NSM कैसा काम कर रहा है?

 NSM संयुक्त राष्ट्र के 11 सतत विकास लक्ष्यों (SDG) में मदद कर रहा है। मिशन के तहत हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग (HPC) की ट्रेनिंग के लिए वर्कशॉप, हैकाथॉन, फैकल्टी ट्रेनिंग और SWAYAM पर कोर्स भी चलाए जा रहे हैं। अब भारत, ज्यादा क्षमता बढ़ाने पर जोर दे रहा है, ज्यादा तेज और कम बिजली खाने वाले सिस्टम बनाने की राह तैयार की जा रही है। MeitY का कहना है कि अब हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग को शोधकर्ताओं, शिक्षण संस्थानों और उद्योग तक पहुंचाने की कोशिश की जा रही है।

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दुनिया की तुलना में भारत कहां खड़ा है?

जून 2026 की TOP500 सूची के अनुसार दुनिया के सबसे शक्तिशाली 500 सुपरकंप्यूटरों में सिस्टम की संख्या के हिसाब से टॉप 5 देश अमेरिका में 161, जापान में 44, जर्मनी में 41, चीन में 31 और फ्रांस में 21 हैं। कुल कंप्यूटिंग क्षमता में भी अमेरिका सबसे आगे है। 

 

चीन का 'लाइनशाइन' दुनिया के सबसे तेज सुपर कंप्यूटर में गिना जा रहा है, इसकी क्षमता 2,198 पेटाफ्लॉप प्रति सेकंड दर्ज की गई है। अमेरिका का एल कैपिटन, फ्रंटियर और ऑरोरा भी दुनिया के सबसे तेज सुपर कंप्यूटर में चुने जाएंगे। भारत इस सूची में 7 सिस्टमों के साथ लगभग 18वें स्थान पर है। भारत का सबसे ताकतवर सुपरकंप्यूटर शक्ति क्लाउड है।