गुजरात हाईकोर्ट ने भरूच की ऐतिहासिक 'जामी मस्जिद' को जैन मंदिर घोषित करने की मांग वाली याचिका पर केंद्र सरकार और अन्य केंद्रीय प्राधिकरणों से जवाब मांगा है। जस्टिस निशा एम ठाकोर ने शुक्रवार को हरि शंकर जैन और चार अन्य की याचिका पर सुनवाई की। उन्होंने केंद्र सरकार से पूरे निर्देश लेकर 13 अक्टूबर को जवाब दाखिल करने को कहा। यही अगली सुनवाई की तारीख है।

याचिकाकर्ताओं ने कहा कि वे 'जैन हिंदू समुदाय' से हैं और भगवान मल्लिनाथ की पूजा करते हैं। उन्होंने मांग की है कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के रिकॉर्ड में मस्जिद दर्ज इस संरचना को जैन हिंदू मंदिर घोषित किया जाए। उनका आरोप है कि स्मारक में मूर्तियों, कलाकृतियों और शिल्पों को नुकसान पहुंचा है। उन्हें तीर्थंकर मल्लिनाथ की मूर्ति को और नुकसान होने की आशंका है।

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हिंदू जैन मंदिर होने की दलीलें क्या हैं? 

याचिकाकर्ताओं के वकील ने मूर्ति की तस्वीरें और एक वीडियो कोर्ट के सामने रखा। उन्होंने मूर्ति को और नुकसान की आशंका बताकर तुरंत अंतरिम सुरक्षा मांगी। याचिका में प्राचीन स्मारक और पुरातत्व स्थल और अवशेष अधिनियम, 1958 का हवाला दिया गया है। दलील है कि ASI कानूनन इस संरचना और उसकी सामग्री के संरक्षण के लिए बाध्य है। समर्थन में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के एक फैसले का भी जिक्र किया गया।

केंद्रीय प्राधिकरणों के वकील ने कहा कि संरक्षित स्मारक की देखरेख कानून के मुताबिक की जा रही है। कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता संबंधित प्राधिकरण के पास गए बिना सीधे हाईकोर्ट आ गए। इसके बावजूद कोर्ट ने कहा कि मूर्ति सहित संरचना का संरक्षण ASI की वैधानिक जिम्मेदारी है। कोर्ट ने प्रतिवादियों के वकील से आरोपों पर पूरे निर्देश लेने को कहा।

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कितना पुराना है यह विवाद?

इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक यह विवाद राष्ट्रीय धरोहर संरक्षण समिति के अभियान से जुड़ा है। यह दक्षिणपंथी संगठन मई से भरूच में हस्ताक्षर अभियान और सार्वजनिक कार्यक्रम कर रहा है। मांग है कि सदियों पुरानी मस्जिद को जैन धार्मिक स्थल के रूप में वापस लिया जाए। ASI के वडोदरा सर्किल ने 10 जून को भरूच के जिला कलेक्टर को पत्र लिखा था।

पत्र में कहा गया था कि सोशल मीडिया वीडियो में स्मारक पर बड़ी भीड़ जुटाने की अपील की जा रही है। ASI ने जामी मस्जिद को 26 मई 1909 की गजट अधिसूचना के तहत संरक्षित राष्ट्रीय महत्व का जीवंत स्मारक बताया। एजेंसी ने प्रशासन से अनहोनी, ढांचे को नुकसान और सांप्रदायिक सद्भाव को खतरे की आशंका के मद्देनजर एहतियाती कदम उठाने को कहा था।

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मुस्लिम पक्ष क्या कह रहा है?

मस्जिद के ट्रस्टियों ने जिला प्रशासन और पुलिस से एहतियाती कदम उठाने की मांग की थी। उन्होंने सार्वजनिक जमावड़ों और मस्जिद की धार्मिक पहचान को चुनौती देने वाले अभियान पर चिंता जताई थी। ट्रस्टियों ने 3 मार्च की एक घटना का भी जिक्र किया था। उनके आरोप के मुताबिक एक समूह परिसर में घुसा और दीप जलाने और फूल चढ़ाने जैसे हिंदू अनुष्ठान किए। ट्रस्टियों ने यह भी आरोप लगाया कि पुलिसकर्मियों ने समूह को अंदर जाने में मदद की।