समाज और देश की तरक्की की रफ्तार बढ़ाने में महिला-पुरुष की बराबरी यानी जेंडर इक्वेलिटी की एक बड़ी भूमिका होती है। भारत इस मामले में अब भी बहुत पीछे है। यह बात वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) की ताजा ग्लोबल जेंडर गैप रिपोर्ट 2026 में सामने आई है। इस रिपोर्ट में भारत 145 देशों में 131वें स्थान पर है। 2025 में भारत का स्कोर 64.1% था, जो मामूली सुधार के साथ 2026 में 64.5% पहुंच चुका है। पिछले साल के मुकाबले स्कोर में थोड़ा सुधार हुआ है लेकिन सुधार की जो रफ्तार है, अगर वह ऐसे ही रही तो इस गैप को भरने में 120 से भी ज्यादा साल लग जाएंगे। 

 

रिपोर्ट के मुताबिक, शिक्षा और स्वास्थ्य में स्थिति बेहतर है लेकिन नौकरी, कारोबार, राजनीति, नेतृत्व और तकनीक के क्षेत्र में महिलाएं अभी भी पुरुषों बहुत पीछे हैं। इस अंतर को कम करने के लिए महिलाओं को ज्यादा रोजगार के अवसर देने, घर के बिना वेतन वाले काम का बोझ कम करने, उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने और डिजिटल सुविधाओं तक उनकी पहुंच बढ़ाने की जरूरत है।  

 

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भारत में जेंडर इक्वेलिटी में कहां खड़ी हैं महिलाएं? 

रिपोर्ट के मुताबिक भारत में महिलाओं की श्रम बल भागीदारी करीब 34% है, जबकि पुरुषों की करीब 77% है। यानी कामकाजी उम्र की महिलाओं की तुलना में पुरुषों की नौकरी या रोजगार में भागीदारी काफी ज्यादा है। 

 

इसके अलावा कमाई में भी बड़ा अंतर देखने को मिलता है। समान काम के लिए वेतन समानता के मामले में भारत 120वें स्थान पर है। अनुमानित अर्जित आय में महिलाओं की आय करीब 5.03 हजार के मुकाबले पुरुषों की 14.32 हजार है। वहीं, प्रोफेशनल और टेक्निकल नौकरियों में महिलाओं की हिस्सेदारी करीब 33.3% है, वहीं पुरुषों की 66.7% है।

संसद और राजनीति में बड़ा गैप

बात करें राजनीतिक भागीदारी की तो भारत का स्कोर 24.5% है और रैंक 67वीं है। संसद में महिलाओं की हिस्सेदारी अभी भी कम है। रिपोर्ट के आंकड़ों में महिलाओं की हिस्सेदारी 13.84%, जबकि पुरुषों की 86.16% दिखाई गई है। मंत्री पदों पर भी यही तस्वीर नजर आती है, जहां महिलाओं की हिस्सेदारी करीब 5.56% और पुरुषों की 94.44% है।

शिक्षा में स्थिति है बेहतर

हालांकि, शिक्षा में भारत की महिलाएं मजबूत नजर आती हैं। इसमें भारत का स्कोर 96.6% और रैंक 112वीं है। प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा में लड़कियों और लड़कों के बीच अंतर काफी कम है। माध्यमिक शिक्षा में महिलाओं की भागीदारी 78.29% और पुरुषों की 81.02% है।

 

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स्वास्थ्य में बराबरी

इसके अलावा, स्वास्थ्य और जीवन प्रत्याशा के मामले में भारत का स्कोर 95.6% है। स्वस्थ जीवन प्रत्याशा के मामले में महिलाओं का आंकड़ा 57.97 साल और पुरुषों का करीब 58.35 साल है। हालांकि, आंकड़ों के मुताबिक, जन्म के समय लिंग अनुपात में अभी भी अंतर मौजूद है।