मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्षी दलों ने शनिवार को 'जन महाभियोग' कार्यक्रम का आयोजन किया। खरगे ने एसआईआर पर सवाल उठाया और कहा कि इसका मकसद विपक्षी वोटों को हटाना था। कांग्रेस अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि 2023 में पीएम मोदी और अमित शाह ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को जिंदगी भर की कानूनी सुरक्षा दी। इसका मकसद देश और भारत के संविधान के खिलाफ उनके आपराधिक कामों को छिपाना था।
उन्होंने ज्ञानेश कुमार के खिलाफ छह आरोप भी लगाए। बता दें कि 1 नवंबर को इंडिया ब्लॉक की प्रस्तावित दिल्ली चलो रैली के ठीक एक दिन पहले 'जन महाभियोग' कार्यक्रम का आयोजन किया गया। आइये जानते हैं कार्यक्रम की पांच बड़ी बातें...
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- विपक्ष के मॉक पर्लियामेंट की कार्यवाही की शुरुआत पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार ने की। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के आवास में यह कार्यवाही चल रही है। अपने संबोधन में मीरा कुमार ने कहा, 'हमारी लोकतंत्र दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है। एशिया, अफ्रीका और साउथ अमेरिका के देश हमारी तरफ देखते हैं और लोकतंत्र के हमारे मॉडल को फॉलो करते हैं। हमारा लोकतंत्र चुनाव की ताकत से चलता है। इस इलेक्टोरल ताकत के दिल में वोटर की आत्मा होती है। वोटर पूरे चुनाव प्रक्रिया का सेंटर पॉइंट होता है। अगर एक मतदाता को वोट डालने के अधिकार से रोका जाता है, तो यह हमारे लोकतंत्र की आत्मा पर चोट है।
- मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मल्लिकार्जुन खरगे ने महाभियोग प्रस्ताव पेश किया। उन्होंने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त से हमारी कोई व्यक्तिगत दुश्मनी नहीं है। हम चाहते हैं कि चुनाव आयोग बिना किसी भेदभाव के काम करे। आरोप लगाा कि ज्ञानेश कुमार पीएम मोदी और गृह मंत्री शाह के निर्देश पर चुनाव आयोग चला रहे हैं। खरगे ने आगे कहा, 'अगर ज्ञानेश कुमार जैसे लोग संवैधानिक पद पर बने रहे तो लोकतंत्र के लिए खतरा बढ़ जाएगा। हम सिर्फ यह चाहते हैं कि निर्वाचन आयोग निष्पक्ष तरीके से काम करे और देश के लोगों के मताधिकार की रक्षा हो।'
- खरगे ने दावा किया कि 'वोट चोरी' पकड़े जाने के बाद एसआईआर प्रक्रिया शुरू की गई। उन्होंने कहा कि विपक्ष की लड़ाई मतदाता सूची में घुसपैठियों के नाम जोड़ने की नहीं, बल्कि वास्तविक और पात्र मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में बरकरार रखने की है। सरकार पर चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्था की स्वतंत्रता को प्रभावित करने का आरोप लगाया। कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि विपक्ष जनता के अधिकारों की रक्षा के लिए पूरी ताकत लगाएगा और चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता से कोई समझौता नहीं होने देगा।
- कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग की। यह भी कहा कि उनके खिलाफ देशद्रोह का मुकदमा चलाया जाना चाहिए। खरगे ने कहा, 'दिसंबर 2023 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह ने अपनी सरकार के माध्यम से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को जो आजीवन कानूनी सुरक्षा दी थी, उसका मकसद देश और भारत के संविधान के खिलाफ उनके आपराधिक कार्यों को छिपाना था। इसलिए उन्हें तुरंत पद से हटाया जाना चाहिए। भारत की साठ प्रतिशत से अधिक आबादी का प्रतिनिधित्व करने वाले 'इंडिया' गठबंधन के सांसदों और 31 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में इकट्ठा हुए नागरिकों ने यह संकल्प लिया है कि भारत की जनता के साथ किए गए इस गंभीर विश्वासघात के लिए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर भारतीय संविधान के कानूनी ढांचे के अनुसार देशद्रोह का मुकदमा चलाया जाना चाहिए।'
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- खरगे ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग ने रातों-रात एसआईआर की घोषणा की। इसे पूरे देश में लागू किया गया। इसका असल मकसद बीजेपी के विरोधियों के वोट हटाना था। मोदी सरकार अपनी नाकामियों को छिपाने के लिए बाहरी लोगों और घुसपैठियों का बहाना ले रही है। उनका दावा है कि मोदी सरकार ने सत्ता बरकरार रखने के लिए साजिश रची है और चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश की।
ज्ञानेश कुमार पर खरगे के छह आरोप
- चुनाव चुराने की साजिश रचने का आरोप
- 13.2 करोड़ मतदाताओं को डिलीट किया
- संसद की निगरानी के बिना फॉर्म 6 दोबारा लिखा गया
- ECINet के माध्यम से रोल जब्त किए गए
- पीएम मोदी और शाह के कहने पर सब किया
- बाकी दो चुनाव आयुक्तों को बाहर रखा गया
