UPI से लेनदेन को लेकर केंद्र सरकार ने बड़ी अपडेट दी है। सरकारी संस्था भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) ने जानकारी देते हुए कहा कि 2,000 रुपये से अधिक राशि के यूपीआई लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत की दर से मर्चेंट डिस्काउंट शुल्क लगेगा। वहीं, इसमें कहा गया है कि UPI से पेमेंट लेने वाले व्यापारियों से लिए जाने वाले शुल्क मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) 75,000 रुपये और अधिक के लेनदेन पर 300 रुपये तक सीमित होगा।

 

इसके अलावा लोगों के बीच UPI के जरिए लेन-देन की राशि चाहे जितनी हो, भुगतान पर कोई शुल्क नहीं देना होगा। एनपीसीआई ने कहा कि रेलवे, दूरसंचार, बीमा, ईंधन और कृषि कच्चा माल क्षेत्र में 2,000 रुपये से अधिक के लेन-देन पर पांच रुपये शुल्क लगेगा। 

MDR की अंतिम रूपरेखा तय

वहीं, म्यूचुअल फंड, प्रतिभूति, शेयर ब्रोकर को भुगतान पर 0.02 प्रतिशत शुल्क लगेगा, इसकी अधिकतम सीमा 300 रुपये होगी। एनपीसीआई ने MDR की अंतिम रूपरेखा तय की, सीमा आधारित व्यवस्था 15 अक्टूबर, 2026 से लागू होगी।

 

 

 

 

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शून्य-एमडीआर व्यवस्था खत्म

इसके साथ जनवरी, 2020 से लागू शून्य-एमडीआर व्यवस्था खत्म हो गई है। इस व्यवस्था को डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए लागू किया गया था, लेकिन बैंक और वित्तीय-प्रौद्योगिकी (फिनटेक) कंपनियां लंबे समय से इस पर सवाल उठा रही थीं। आधिकारिक बयान के मुताबिक, नए बदलाव 15 अक्टूबर, 2026 से प्रभावी हो जाएंगे।

 

एमडीआर वह शुल्क है जो डिजिटल भुगतान स्वीकार करने पर व्यापारी से लिया जाता है। एनपीसीआई ने कहा कि रेलवे, दूरसंचार और ईंधन जैसे आवश्यक क्षेत्रों में प्रति लेनदेन पांच रुपये का एकसमान शुल्क लगेगा, जबकि पूंजी बाजार में भुगतान के लिए एमडीआर की दर 0.02 प्रतिशत होगी।

यूपीआई लेनदेन पर कोई असर नहीं 

यूपीआई क्यूआर कोड के जरिये हर महीने एक लाख रुपये तक की आय वाले छोटे व्यापारी नई व्यवस्था के तहत पूरी तरह शुल्क मुक्त रहेंगे। सरकार का कहना है कि इस प्रावधान से व्यापारी लेनदेन के 96 प्रतिशत हिस्से पर नए शुल्क का कोई असर नहीं पड़ेगा। हालांकि, व्यक्ति से किसी व्यापारी को किए जाने वाले 2,000 रुपये से अधिक के यूपीआई भुगतान पर एमडीआर लगाया जाएगा और 75,000 रुपये या उससे अधिक के भुगतान पर इस शुल्क की अधिकतम सीमा 300 रुपये होगी।

 

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वहीं, दो व्यक्तियों के बीच होने वाले पी2पी यूपीआई लेनदेन पर इस बदलाव का कोई असर नहीं पड़ेगा। ऐसे हस्तांतरण यूपीआई लेनदेन की कुल मात्रा का 37 प्रतिशत और मूल्य का 70 प्रतिशत हैं। नई व्यवस्था के तहत भुगतान ऐप प्रदाताओं को अलग से डिजिटल मंच शुल्क लगाने से रोक दिया गया है। बैंकों को यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि व्यापारी एमडीआर की लागत ग्राहकों से न वसूलें। नए शुल्क से मिलने वाली राशि का पांचवां हिस्सा छोटे व्यापारियों के बीच यूपीआई के विस्तार के लिए इस्तेमाल किया जाएगा।