एक तरफ देश की संसद दूसरी तरफ आकाशवाणी और तीसरी तरफ देश के लिए योजना बनाने वाली संस्था नीति आयोग। तीनों के बीच में राजनीति की ऐसी राजधानी बनी है कि पूरे देश की निगाहें ठहर गईं हैं। अखिलेश यादव और राहुल गांधी दोनों, इसी के आसपास वाले इलाके में हैं लेकिन साथ नजर नहीं आ रहे हैं।

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों से पहले सीट बंटवारे को लेकर दोनों पार्टियों के बीच चल रहे 'शीतयुद्ध' का असर ऐसा दिखेगा, यह पूरे विपक्ष ने नहीं सोचा है।

इंडिया गठबंधन के करीब एक दर्जन दलों के लगभग 150 सांसद मंगलवार को चुनाव आयोग जाने के लिए इकट्ठा हुए।

संसद, आकाशवाणी और नीति आयोग के बीच के इलाके में हुए इस जमावड़े से देश की राजनीति का केंद्र वहीं सिमट गया। सभी सांसद, स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन ( SIR ) को रद्द करने की मांग कर रहे हैं। सांसद मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा भी मांग रहे हैं।

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विपक्ष के प्रदर्शन में कौन सी पार्टियां शामिल हैं?

इस प्रदर्शन में कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, टीएमसी, शिवसेना (UBT), लेफ्ट पार्टियों के सांसद, बीजेडी, आरजेडी आदि दलों के सांसद शामिल रहे। ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग के बीच सबकी निगाहें राहुल गांधी और अखिलेश यादव पर टिकी रहीं। दोनों शीर्ष नेता प्रदर्शन के दौरान एक साथ नहीं दिखे, जबकि सीजेपी के तीन महीने प्रदर्शन में दोनों नेता एक-दूसरे के साथ दिखाई दिए थे।

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क्या यूपी की तल्खी दिल्ली में दिख रही है?

मंगलवार के प्रदर्शन में राहुल और अखिलेश का साथ न दिखना उत्तर प्रदेश की राजनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। कांग्रेस यूपी विधानसभा चुनाव के लिए 200 से ज्यादा सीटों की मांग कर रही है। इससे सपा का शीर्ष नेतृत्व नाराज बताया जा रहा है।

सपा की नाराजगी की वजह यह है कि कांग्रेस ने 2022 के विधानसभा चुनाव में सिर्फ दो सीटें जीती थीं। इसके बावजूद वह 200 सीटें मांग रही है। कांग्रेस के रुख को देखते हुए अखिलेश यादव और सपा कई बार सार्वजनिक तौर पर कह चुके हैं कि उनकी तैयारी अब सभी 403 सीटों पर है। 

कांग्रेस भी कह चुकी है कि उसकी तैयारी 403 सीटों पर है। ऐसे में बड़े विरोध प्रदर्शन में दोनों नेताओं का साथ न दिखना सियासी सवाल खड़े कर रहा है। हालांकि दोनों दलों की ओर से गठबंधन को लेकर अब तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।