दिल्ली स्थित जामिया मिलिया इस्लामिया में छात्र संघ चुनाव कराने का एलान विश्वविद्यालय प्रशासन ने किया है। विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि छात्र संघ संविधान को मंजूरी मिलने के 15 दिनों के भीतर चुनाव कराए जाएंगे। इस घोषणा के बावजूद प्रदर्शनकारी छात्रों ने आंदोलन खत्म करने से इनकार कर दिया। सोमवार को छात्रों और अर्धसैनिक बलों से झड़पें हुईं।
जामिया मिलिया इस्लामिया में पिछले दो हफ्ते से विरोध प्रदर्शन जारी है। सभी कक्षाएं ऑनलाइन संचालित की जा रही हैं। सोमवार को भी प्रदर्शनकारी छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। हालांकि प्रदर्शनकारियों ने उन्हें परिसर में नहीं जाने दिया। झड़प के बाद कुछ छात्रों को हिरासत में लिया गया है। परिसर की सुरक्षा व्यवस्था भी बढ़ा दी गई है।
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उधर, विश्वविद्यालय प्रशासन ने छात्रों को जारी कारण बताओ नोटिस और निलंबन आदेश भी वापस ले लिया है। वहीं एक समिति का गठन भी किया जाएगा। यह समिति छात्रों के साथ सुरक्षाकर्मियों के व्यवहार की जांच करेगी।
किस मुद्दे पर अड़े प्रदर्शनकारी छात्र
प्रदर्शनकारी छात्रों का कहना है कि प्रशासन ने चुनाव की कोई तय तारीख घोषित नहीं की है। 12 दिनों से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे रेहान खान ने प्रशासन पर मांगों से भटकाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि छात्र संघ बहाली और चुनाव की तारीखों का एलान हमारी पहली मांग है।
न्यूज एजेंसी पीटीआई से बातचीत में रेहान खान ने कहा, 'विश्वविद्यालय ने जो नोटिस जारी किया है, वह हमारी मांगों से हमें भटकाने की कोशिश है, लेकिन जब तक हमारी मांगें पूरी नहीं होतीं, हम पीछे नहीं हटेंगे।'
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उन्होंने कहा कि प्रशासन ने प्रदर्शनकारियों को बताया था कि 20 दिसंबर तक छात्र संघ के संविधान का मसौदा तैयार हो जाएगा। इसके बाद इसे मंजूरी दी जाएगी और 15 दिनों के भीतर चुनाव का एलान किया जाएगा। रेहान ने सवाल उठाया कि अगर 20 दिसंबर तक संविधान का मसौदा तैयार भी हो जाता है तो क्या गारंटी है कि प्रशासन इसे मंजूरी देगा। उन्होंने चुनाव की तारीख घोषित करने की मांग की।
