ग्रुप कैप्टन अभिनंदन वर्धमान ने भारतीय वायुसेना छोड़ दी है और निजी विमान कंपनी फ्लाई-91 से जुड़ गए हैं। हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट में यह दावा किया गया है। अधिकारियों ने अपना नाम न बताने की शर्त पर बताया कि अभिनंदन वर्धमान ने 31 मार्च को वायुसेना छोड़ी और उसके बाद क्षेत्रीय विमान कंपनी फ्लाई91 से जुड़ गए।
अभिनंदन वर्धमान को 27 फरवरी 2019 को नियंत्रण रेखा पर हुए हवाई संघर्ष में पाकिस्तानी एफ-16 विमान मार गिराने के लिए वीर चक्र से सम्मानित किया गया था। उस समय वह विंग कमांडर थे और उनकी उम्र 35 साल थी।
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कैसे पाकिस्तान पहुंच गए थे अभिनंदन?
14 फरवरी 2019 को जम्मू कश्मीर के पुलवामा में हुए आत्मघाती हमले में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के 40 जवान शहीद हो गए थे। इसके जवाब में भारतीय वायुसेना के मिराज-2000 विमानों ने पाकिस्तान के बालाकोट में ठिकानों पर हमला किया। इसके अगले दिन यह हवाई झड़प हुई थी।
F-16 को तबाह कर चुके हैं अभिनंदन
हवाई झड़प में अभिनंदन वर्धमान ने एक F-16 विमान मार गिराया था। यह अपने आप में सैन्य विमानन के इतिहास में पहली घटना मानी जाती है, जब मिग-21 बाइसन ने एफ-16 विमान को मार गिराया हो। ये दोनों विमान अलग अलग पीढ़ी के लड़ाकू जेट माने जाते हैं। इस दौरान उनका अपना मिग-21 बाइसन विमान भी मिसाइल की चपेट में आ गया, जिसके बाद उन्हें विमान से इजेक्ट होना पड़ा।
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पाकिस्तान में गिर गए थे अभिनंदन
विमान से बाहर निकलने के दौरान वह पाकिस्तानी क्षेत्र में जा गिरे थे। उन्हें पाकिस्तान ने पकड़ लिया था। करीब 60 घंटे तक हिरासत में रखने के बाद पाकिस्तान ने उन्हें 1 मार्च 2019 को भारत को सौंप दिया था।
वीर चक्र क्यों मिला?
वीर चक्र भारत का तीसरा सबसे बड़ा युद्धकालीन वीरता पुरस्कार है। इससे पहले परम वीर चक्र और महावीर चक्र आते हैं। दिसंबर 2019 में भारत के राजपत्र में प्रकाशित अभिनंदन वर्धमान के प्रशस्ति पत्र में कहा गया था कि उन्होंने पाकिस्तानी विमानों की भारी संख्या और तकनीकी बढ़त के बावजूद बहादुरी से मोर्चा संभाला और अपने आक्रामक कौशल से दुश्मन के विमानों को तबाह किया था।
हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक प्रशस्ति पत्र में लिखा गया है कि फरवरी 2019 में अभिनंदन वर्धमान मिग-21 बाइसन स्क्वाड्रन में तैनात थे और श्रीनगर वायुसेना स्टेशन पर ऑपरेशनल रेडीनेस प्लेटफॉर्म ड्यूटी पर थे। जैसे ही पाकिस्तानी वायुसेना के बड़े लड़ाकू विमानों का समूह नियंत्रण रेखा की ओर बढ़ता दिखा उसका पता चलते ही पांच मिनट के भीतर अभिनंदन वर्धमान को रोकने के लिए भेजा गया।
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एफ-16 कैसे मार गिराया गया?
प्रशस्ति पत्र में लिखा है कि अभिनंदन वर्धमान ने पीछे हट रहे दुश्मन के लड़ाकू विमान का पीछा किया और हवाई संघर्ष में एफ-16 विमान मार गिराया। इसमें आगे बताया गया कि इस दौरान दुश्मन के एक विमान ने कई आधुनिक BVR मिसाइलें दागीं जिनमें से एक उनके विमान से टकरा गई जिसके बाद उन्हें दुश्मन के इलाके में विमान से बाहर निकलना पड़ा।
