चुनाव आयोग के भीतर मतभेद को लेकर चल रहे विवाद के बीच आयोग ने शनिवार सफाई दी। चुनाव आयोग ने कहा कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने कैबिनेट सचिव टीवी सोमनाथन को जो पत्र लिखे थे, वे आयोग या उसके IT डिवीजन के किसी नीतिगत मामले से जुड़े नहीं थे। आयोग के मुताबिक यह पत्र ECI में प्रतिनियुक्ति पर तैनात एक अधिकारी के कामकाज को लेकर भेजा गया था।
चुनाव आयोग ने इस विवाद को लेकर शनिवार को एक अहम बैठक की, जिसके बाद जारी प्रेस नोट में कहा गया कि संबंधित अधिकारी के काम बंटवारे के आदेश दोनों आयुक्तों के निर्देश के बाद वास्तव में लागू नहीं किए गए थे और डिप्टी इलेक्शन कमिश्नर (DEC) की IT डिवीजन पर निगरानी कभी वापस नहीं ली गई।
हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक यह सफाई 'द इंडियन एक्सप्रेस' की उस रिपोर्ट के बाद आई है, जिसमें आंतरिक दस्तावेजों और इंटरव्यू के आधार पर बताया गया था कि सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने काम बंटवारे में बदलाव को लेकर अलग-अलग कैबिनेट सचिव को पत्र लिखे थे।
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ECINet को लेकर क्या है पूरा विवाद?
यह विवाद ECINet से जुड़ा है, जिसे ECI ने 22 जनवरी को एक प्लेटफॉर्म के तौर पर लॉन्च किया था। इसमें 40 से ज्यादा एप्लिकेशन और पोर्टल एक साथ जोड़े गए हैं। लॉन्च के समय मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा था कि यह प्लेटफॉर्म कानून के मुताबिक बनाया गया है, डायरेक्टर जनरल (IT) सीमा खन्ना ने कहा था कि इससे पारदर्शिता और जनता का भरोसा बढ़ेगा।
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक बाद में मतदाता सूची अपडेट करने वाले राज्य स्तरीय अधिकारियों की एक्सेस को लेकर चिंताएं उठाई गई थीं। सुखबीर संधू और विवेक जोशी ने कथित तौर पर मतदाता डेटाबेस के धीरे-धीरे केंद्रीकरण को लेकर सवाल उठाए और पूछा कि क्या ECINet मतदाता सूची तैयार करने और अंतिम रूप देने वाले अधिकारियों की वैधानिक शक्तियों को सीमित कर रहा है।
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किस बात पर बरपा है हंगामा?
रिपोर्ट के मुताबिक दोनों आयुक्तों ने कई बार अपनी चिंताएं जताईं और अपने नोट्स CEC ज्ञानेश कुमार को भी भेजे। विवेक जोशी ने यह सुनिश्चित करने के लिए किसी बाहरी IIT विशेषज्ञ के जरिए ऑडिट कराने का प्रस्ताव रखा था, ताकि यह पता चल सके कि मतदाता डेटाबेस में बदलाव करने का अधिकार सिर्फ संबंधित वैधानिक पदाधिकारियों के पास ही है। वहीं सुखबीर संधू ने एक्सेस कंट्रोल के केंद्रीकरण पर सवाल उठाते हुए वैधानिक प्राधिकारियों को पूरी एक्सेस देने की मांग की थी।
चुनाव आयोग ने क्या सफाई पेश की है?
शनिवार की बैठक में चुनाव आयोग ने कहा कि फील्ड अधिकारियों को उनकी वैधानिक शक्तियों के मुताबिक ही ECINet सिस्टम में भूमिका आधारित एक्सेस दी गई है। आयोग ने बताया कि वरिष्ठ डिप्टी इलेक्शन कमिश्नर की अध्यक्षता में एक समिति बनाई जाएगी, जिसमें IIT या IIIT का एक स्वतंत्र विशेषज्ञ भी शामिल होगा। यह समिति ECINet की समीक्षा कर यह तय करेगी कि यह कानूनों और नियमों के अनुरूप है। रिपोर्ट आयोग को सौंपी जाएगी।
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सुधारों पर चुनाव आयोग ने क्या कहा है?
आयोग ने कहा कि राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों के सुझावों के आधार पर पोर्टल में पिछले कुछ महीनों में कई सुधार पहले ही किए जा चुके हैं। आयोग के मुताबिक अगर फील्ड अधिकारियों को आगे किसी और लचीलेपन की जरूरत होगी तो उसे भी लागू किया जाएगा। साथ ही अब से IT मॉड्यूल और पोर्टल से जुड़ी सभी नई पहलों पर आयोग की मंजूरी से पहले अधिकारियों की समिति (COO) में चर्चा की जाएगी।
अब क्या सफाई दे रहा है चुनाव आयोग?
चुनाव आयोग ने यह सफाई दी है कि ECINet एक डीसेंट्रलाइल्ज्ड प्लेटफॉर्म है। इसके काम फील्ड में तैनात संबंधित अधिकारियों के पास ही रहता है। बूथ लेवल ऑफिसर, सहायक निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी, निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी, जिला निर्वाचन अधिकारी और मुख्य निर्वाचन अधिकारी अपनी-अपनी अलग आईडी और पासवर्ड से काम करते हैं। आयोग के एक अधिकारी के मुताबिक ECI का कोई भी अन्य अधिकारी इन अधिकारियों की वैधानिक जिम्मेदारी नहीं निभा सकता।
