भारतीय जनता पार्टी और शिरोमणि अकाली दल का पंजाब में दशकों तक गठबंधन रहा लेकिन किसान कानूनों के कारण अकाली दल गठबंधन से अलग हो गया। इसके बाद दोनों दलों ने एक विधानसभा चुनाव और एक लोकसभा चुनाव बिना गठबंधन के लड़ा लेकिन करारी हार का सामना करना पड़ा। किसान कानूनों को वापस लिए जाने के बाद से दोनों दलों के बीत गठबंधन को लेकर चर्चा चलती रहती है लेकिन कभी अंतिम रूप नहीं दिया गया। अब जब पंजाब विधानसभा चुनाव कुछ महीने दूर हैं तो एक बार फिर दोनों दलों के बीच गठबंधन की चर्चा है।

 

भारतीय जनता पार्टी पश्चिम बंगाल में मिली जीत के बाद अब पंजाब में भी पहली बार अपनी सरकार बनाना चाहती है। पंजाब में पार्टी के लिए मुश्किलें काफी ज्यादा हैं लेकिन संगठन काफी कमजोर। ऐसे में पार्टी के बड़े नेता शिरोमणि अकाली दल के साथ गठबंधन की मांग करते रहे हैं। पार्टी का आधिकारिक स्टैंड है कि राज्य की सभी 117 विधानसभा सीटों पर पार्टी अकेले चुनाव लड़ेगी। हालांकि, राजनीति में जो दिखता है उसके अलावा भी कई कहानियां होती हैं। ऐसा ही दोनों दलों के गठबंधन को लेकर माना जा रहा है कि सीटों पर बात बनते ही गठबंधन की घोषणा हो जाएगी। 

 

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कौन सी 5 बातें कर रहीं इशारा?

गुरुवार को केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने दिल्ली में यमुना पुनरुद्धार योजनाओं के उद्घाटन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि 2027 के विधानसभा चुनाव के बाद पंजाब में NDA की सरकार बनेगी। एनडीए भारतीय जनता पार्टी के नेतृ्त्व वाला गठबंधन है जिससे अकाली दल बाहर हो गया था। इस बयान के बाद गठबंधन को लेकर चर्चाएं तेज हो गई। 

 

शुक्रवार को शिरोमणि अकाली दल के प्रमुख सुखबीर बादल ने चंडीगढ़ में गठबंधन को लेकर अहम बयान दिया। उन्होंने कहा, 'अकाली दल क्षेत्रीय पार्टी है। हमारे लिए पंजाब नंबर वन है। सरकार आए न आए, हम पंजाबियों की लड़ाई लड़ते रहेंगे। हमारे लिए 2 पार्टियां पंजाब की सबसे बड़ी दुश्मन हैं, एक कांग्रेस और दूसरी आम आदमी पार्टी।' उन्होंने आगे कहा कि जो भी पार्टी अकाली दल की विचारधारा और प्रोग्राम से सहमत है, हमने गठजोड़ के ऑप्शन खुले रखे हैं।

 

जून 2026 में बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने पंजाब में अकाली दल के साथ गठबंधन को लेकर कहा था कि बीजेपी फिलहाल गठबंधन के पक्ष में भी नहीं है और विरोध में भी नहीं। इस पर फैसला छह महीने बाद राजनीतिक स्थिति का आकलन करके लिया जाएगा। उनके इस  बयान को अब 6 महीने का समय होने वाला है। ऐसे में पार्टी अपनी स्थिति का आकलन कर गठबंधन पर विचार कर सकती है। 

 

अकाली दल की सांसद हरसिमरत कौर बादल और नेता बिक्रम सिंह मजीठिया भी गठबंधन के पक्ष में बयान दे चुके हैं। हरसिमरत कौर बादल ने बीते दिनों एक रैली में गठबंधन की ओर इशारा करते हुए दिल्ली के साथ अच्छे संबंधों की बात कही थी।

 

भारतीय जनता पार्टी के पूर्व अध्यक्ष सुनील जाखड़, पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह समेत कई बड़े बीजेपी नेता पंजाब में अकाली दल के साथ गठबंधन के पक्ष में हैं। बीजेपी पंजाब में सरकार बनाना चाहती है और इसके लिए उन्हें अकाली दल जैसे मजबूत साथी की जरूरत पड़ेगी। 

 

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कहां फंसा मामला?

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में जीत के बाद भारतीय जनता पार्टी पंजाब में काफी सक्रिय है। अमित शाह ने खुद राज्य की कमान संभाली हुई है और बीते कुछ महीनों में कई बार संगठन में बदलाव भी किए हैं। बीते कल अमित शाह के बयान के बाद पंजाब बीजेपी अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों ने सार्वजनिक तौर साफ पार्टी के स्टैंड को स्पष्ट करते हुए कहा कि पार्टी सभी 117 सीटों पर विधानसभा चुनाव लड़ेगी। बीजेपी नेताओं का कहना है कि उन्हें हाई कमान से फिलहाल सभी 117 सीटों के लिए तैयारी करने का आदेश मिला है। हालांकि, पार्टी नेता गठबंधन को लेकर सही समय पर फैसला लेने की बात कहते रहे हैं।