पंजाब के निकाय चुनावों और गुजरात के पंचायत चुनावों में बेहतर प्रदर्शन के बाद आम आदमी पार्टी (आप) ने उत्तर प्रदेश में अपनी राजनीतिक गतिविधियां तेज कर दी हैं। आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए पार्टी ने प्रदेशभर में 50 लाख नए सदस्य बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसके लिए प्रदेश, जिला, तहसील और बूथ स्तर तक संगठन को सक्रिय किया जा रहा है।
पार्टी सूत्रों के अनुसार राज्यसभा सांसद संजय सिंह लगातार उत्तर प्रदेश के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं के साथ बैठकें कर चुनावी रणनीति को अंतिम रूप देने में जुटे हैं। पार्टी दिल्ली और पंजाब मॉडल के आधार पर यूपी में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है। हालांकि पिछले विधानसभा चुनाव में पार्टी को अपेक्षित सफलता नहीं मिली थी।
यह भी पढ़ें: दलित वोट बंटा, OBC में सेंध, अब पश्चिमी यूपी में मुस्लिम चेहरे तलाश रही BSP
मुफ्त बिजली और बेहतर शिक्षा-स्वास्थ्य को बनाएगी मुद्दा
आम आदमी पार्टी उत्तर प्रदेश में भी दिल्ली और पंजाब की तर्ज पर मुफ्त बिजली, बेहतर सरकारी शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को प्रमुख चुनावी मुद्दा बनाने की तैयारी कर रही है। पार्टी नेताओं का मानना है कि बढ़ती महंगाई और रोजगार जैसे मुद्दों पर जनता के बीच भाजपा सरकार को घेरा जा सकता है।
हालांकि राजनीतिक जानकारों का मानना है कि उत्तर प्रदेश की राजनीति में जातीय समीकरणों की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि आप अपने विकास मॉडल और जनकल्याणकारी योजनाओं के दम पर मतदाताओं को किस हद तक प्रभावित कर पाती है।
यह भी पढ़ें: प्रदेश कार्यकारिणी अधूरी, विधान परिषद के चुनाव में उतरी BJP, चेहरे कौन हैं?
गांव-गांव तक संगठन मजबूत करने की तैयारी
पार्टी संगठन विस्तार अभियान के तहत सभी जिलों, तहसीलों, ब्लॉकों और गांवों में नई टीमों का गठन कर रही है। कार्यकर्ताओं को क्षेत्रवार सामाजिक और जातीय समीकरणों का अध्ययन करने की जिम्मेदारी भी सौंपी गई है। पार्टी नेतृत्व विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों की सामाजिक संरचना के आधार पर संभावित उम्मीदवारों के चयन की रणनीति पर भी काम कर रहा है।
छोटे दलों से गठबंधन की संभावनाएं
सूत्रों के मुताबिक उत्तर प्रदेश में भाजपा को चुनौती देने के लिए आम आदमी पार्टी छोटे और क्षेत्रीय दलों के साथ गठबंधन की संभावनाएं भी तलाश रही है। पूर्वांचल से लेकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश तक विभिन्न सामाजिक समूहों और स्थानीय राजनीतिक समीकरणों पर नजर रखी जा रही है। पार्टी नेतृत्व ने संजय सिंह समेत कई वरिष्ठ नेताओं को प्रदेश में संगठन और चुनावी तैयारियों की जिम्मेदारी सौंपी है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि आम आदमी पार्टी अपने सदस्यता अभियान और संगठन विस्तार में सफलता हासिल करती है तो आगामी विधानसभा चुनाव में वह प्रदेश की राजनीति में अपनी मौजूदगी और प्रभाव को मजबूत करने का प्रयास कर सकती है।
