लखनऊ। उत्तर प्रदेश और पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 से पहले भारतीय जनता पार्टी ने दलित समाज के बीच अपनी राजनीतिक और सामाजिक पहुंच बढ़ाने की तैयारी तेज कर दी है। गुरु पूर्णिमा के अवसर पर भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ वाराणसी स्थित संत रविदास की जन्मस्थली पहुंचेंगे। यहां से 131 कलशों में पवित्र मिट्टी देशभर के संत रविदास से जुड़े स्थलों तक भेजी जाएगी।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कार्यक्रम केवल धार्मिक आस्था का नहीं, बल्कि दलित समाज, विशेषकर रविदासी समुदाय तक मजबूत संदेश पहुंचाने की रणनीति का भी हिस्सा माना जा रहा है। भारतीय जनता पार्टी पहली बार गुरु पूर्णिमा के अवसर पर इस स्तर का कार्यक्रम आयोजित कर रही है।
वाराणसी में संत रविदास मंदिर परिसर में होने वाले आयोजन में सामाजिक समरसता, संत परंपरा और दलित समाज के सम्मान का संदेश दिया जाएगा। कार्यक्रम के दौरान भारतीय जनता पार्टी नेतृत्व जनसभा को भी संबोधित करेगा।
131 कलशों में मिट्टी, पूरे देश तक पहुंचेगा अभियान
संत रविदास की जन्मस्थली से 131 कलशों में मिट्टी भरकर उन स्थानों तक पहुंचाई जाएगी, जहां संत रविदास का जीवन, प्रवास या आध्यात्मिक जुड़ाव रहा है। भारतीय जनता पार्टी इसे राष्ट्रीय स्तर के सामाजिक संपर्क अभियान के रूप में आगे बढ़ाने की तैयारी कर रही है।
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यूपी के इन इलाकों में असरदार है रविदासी समाज
उत्तर प्रदेश में रविदास (चमार/जाटव उपसमूहों सहित रविदासी परंपरा को मानने वाले) समाज का प्रभाव विशेष रूप से वाराणसी, जौनपुर, चंदौली, मिर्जापुर, भदोही, प्रयागराज, कौशाम्बी, फतेहपुर, कानपुर, लखनऊ, रायबरेली, प्रतापगढ़, अमेठी, सुल्तानपुर, आजमगढ़, गाजीपुर, गोरखपुर, बस्ती, आगरा, अलीगढ़, मेरठ, सहारनपुर और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई जिलों में माना जाता है। कई विधानसभा सीटों पर दलित मतदाता चुनावी नतीजों को प्रभावित करने की स्थिति में रहते हैं। यही वजह है कि सभी प्रमुख दल समय-समय पर संत
रविदास से जुड़े आयोजनों में सक्रिय भागीदारी करते रहे हैं।
यूपी के साथ पंजाब पर भी भारतीय जनता पार्टी की नजर
पंजाब में दोआबा क्षेत्र, विशेषकर जालंधर, होशियारपुर, कपूरथला और नवांशहर (शहीद भगत सिंह नगर)—में रविदासी समाज का महत्वपूर्ण प्रभाव माना जाता है। 2027 में पंजाब और उत्तर प्रदेश, दोनों राज्यों में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं। ऐसे में भारतीय जनता पार्टी इस आयोजन के जरिए दोनों राज्यों के दलित समाज तक एक साझा संदेश पहुंचाने की कोशिश कर रही है।
नितिन नवीन की पहली बड़ी चुनावी परीक्षा
भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद नितिन नवीन के सामने उत्तर प्रदेश और पंजाब के विधानसभा चुनाव पहली बड़ी राजनीतिक परीक्षा माने जा रहे हैं। ऐसे में संगठन सामाजिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से भी अपने जनाधार को मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रहा है।
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2027 की सियासी बिसात पर नजर
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भारतीय जनता पार्टी अब केवल पारंपरिक चुनावी सभाओं तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक प्रतीकों के जरिए भी विभिन्न वर्गों तक अपनी पहुंच बढ़ाने की कोशिश कर रही है। संत रविदास की जन्मस्थली से शुरू होने वाला यह अभियान 2027 के चुनावी माहौल में भारतीय जनता पार्टी की बड़ी राजनीतिक रणनीति के रूप में देखा जा रहा है, हालांकि पार्टी ने इसे सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक सम्मान का कार्यक्रम बताया है।
