केंद्रीय मंत्रिमंडल में बड़े फेरदबदल की सुगबुगाहट लंबे समय से है। कहा जा रहा है कि बड़े स्तर पर बदलाव हो सकते हैं। इसकी शुरुआत अनौपचारिक तरीके से हो भी चुकी है। रवनीत सिंह बिट्टू इस्तीफा देकर पंजाब चले गए हैं। हाल ही में हरदीप सिंह पुरी और BL वर्मा जैसे मंत्रियों को फिर से राज्यसभा नहीं भेजा गया। अब इसी क्रम में देश के स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा उर्फ जे पी नड्डा के नाम को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है। इन चर्चाओं को जे पी नड्डा की हिमाचल में सक्रियता ने और बल दे दिया है। पूर्व में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के अध्यक्ष रहे जे पी नड्डा के बारे में कहा जा रहा है कि वह हिमाचल प्रदेश में अपने लिए नई संभावनाएं तलाश सकते हैं। संभव है कि यह तलाश हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री की कुर्सी तक जाए। इसकी वजह है कि हिमाचल प्रदेश में अगले साल के आखिर में चुनाव होने हैं।
इस बात की खूब चर्चाएं हैं कि 2029 के चुनाव में जाने से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी केंद्रीय मंत्रिमंडल में बहुत बड़ा बदलाव करेंगे। इसी क्रम में कुछ नेताओं को संगठन में भेजने की कवायद शुरू हो गई है। इंतजार में बैठे कुछ नेताओं को राज्यपाल बनाया जा चुका है और कई अन्य नेताओं के लिए नई भूमिकाएं तलाशी जा रही हैं। इनमें ज्यादातर नाम वैसे हो सकते हैं तो जो दो या तीन बार केंद्रीय मंत्रिमंडल में रह चुके हैं। उम्रदराज नेताओं को भी मंत्रिमंडल से बाहर किया जा सकता है। इन नेताओं की जगह कम उम्र के नेताओं, सामाजिक समीकरण के हिसाब से फिट बैठने वाले नेताओं और गठबंधन सहयोगियों का समायोजन होने की उम्मीद है।
J P नड्डा की चर्चा क्यों?
JP नड्डा देश के स्वास्थ्य मंत्री हैं। उनका संबंध हिमाचल से है, वह पढ़े-लिखे बिहार में लेकिन मौजूदा समय में वह गुजरात से राज्यसभा सांसद हैं। ऐसे में अगर वह केंद्रीय कैबिनेट से बाहर होते हैं तो उनके लिए भी दूसरी भूमिका तलाशी जाएगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह के विश्वस्तों में शामिल जे पी नड्डा को संभवत: नई भूमिका के बारे में इशारा भी कर दिया गया है। बीते दो हफ्ते में ही वह हिमाचल में खूब सक्रिय हो गए हैं।
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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के स्वागत से लेकर सरकारी योजनाओं के उद्घाटन तक में जे पी नड्डा ही नजर आ रहे हैं। बीजेपी के कार्यकर्ताओं से मिल रहे जे पी नड्डा ना सिर्फ हिमाचल की कांग्रेस सरकार पर हमले बोल रहे हैं बल्कि वह 2027 के चुनाव के लिए जुटने का आह्वान भी कर रहे हैं।
सोमवार को वह रोहतांग में बनी अटल टनल के बाहर पहुंचे तो उनके साथ राज्यसभा सांसद संजय सेठ और हिमाचल प्रदेश में नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर भी थे। इसी दिन उन्होंने कुछ सरकारी योजनाओं का शिलान्यास भी किया। केलांग में आयोजित इस कार्यक्रम से पहले जे पी नड्डा मनाली में बीजेपी के वरिष्ठ कार्यकर्ताओं से भी मिले। वह मनाली विधानसभा में आयोजित बीजेपी के एक कार्यक्रम में भी पहुंचे। यह वही विधानसभा है जहां पिछली बार कांग्रेस ने दो बार के बीजेपी विधायक गोविंद सिंह ठाकुर को हरा दिया था।
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11 अक्तूबर को वह कुल्लू में आयोजित जनप्रतिनिधि और कार्यकर्ता सम्मेलन में भी शामिल हुए थे। इससे पहले 9 अक्तूबर को बिलासपुर पहुंचे थे। 6 अक्तूबर को उन्होंने AIIMS बिलासपुर में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का स्वागत करते भी दिखे थे। विधानसभा स्तर की जे पी नड्डा की गतिविधियां ही दिखा रही हैं कि वह अपने लिए दूसरा विकल्प खुद ही तैयार करने में जुट गए हैं। अगर उन्होंने पार्टी की ओर से कहा जाता है तो वह एक बार फिर से बिलासपुर से विधानसभा का चुनाव लड़कर CM पद की रेस में भी शामिल हो सकते हैं।
कैसा रहा जे पी नड्डा का राजनीतिक करियर?
1993 में पहली बार बिलासपुर से विधायक बने जे पी नड्डा इसी सीट पर लगातार दो बार चुनाव जीते। 2003 में वह इसी सीट पर कांग्रेस के तिलक राज से चुनाव हार गए थे। 2007 में वह फिर से जीते और विधायक के साथ-साथ प्रेम कुमार धूमल की सरकार में मंत्री भी रहे। 2012 में ही उन्हें राज्यसभा भेजा गया और तब 2024 तक वह राज्यसभा के सदस्य रहे। इस बीच वह 2014 से 2019 के बीच केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री रहे। बाद में बीजेपी के अध्यक्ष बनने पर उन्होंने केंद्रीय मंत्री का पद छोड़ दिया था। 2020 में वह बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने और 20 जनवरी 2026 तक इस पद पर रहे।
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2024 में तीसरी बार एनडीए की सरकार बनने पर वह फिर से मंत्री रहे। जे पी नड्डा अभी भी राज्यसभा के सांसद हैं और राज्यसभा में नेता सदन हैं। अपने तीन दशक से ज्यादा के करियर में वह विधायक, राज्य सरकार में मंत्री, केंद्र सरकार में मंत्री, राज्यसभा में नेता सदन और बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जैसे पद पर रह चुके हैं। अब कहा जा रहा है कि अगर वह केंद्रीय कैबिनेट से बाहर होते हैं तो वह विधानसभा चुनाव में फिर से उतरेंगे।
