मध्य प्रदेश के मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने अल्पसंख्यकों पर एक ऐसा बयान दिया है, जिस पर राज्य की सियासत में हंगामा बरपा है। इंदौर में वह एक विधानसभा क्षेत्र में रविवार को करीब 2.4 करोड़ रुपये के विकास कार्यों का उद्घाटन करने पहुंचे थे, यहीं उन्होंने कुछ ऐसा कहा, जिसके बाद अल्पसंख्यक वर्ग उनसे नाराज हो गया।
कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि जो लोग अपने प्रतिनिधियों को काफिर कहते हैं, उन्हें उनकी बनाई सड़कों पर नहीं चलना चाहिए और सरकारी योजनाओं का लाभ भी नहीं लेना चाहिए। अब लोग कह रहे हैं कि किसी जनप्रतिनिधि की ऐसी भाषा, कितनी असंवैधानिक है।
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कैलाश विजयवर्गीय, मंत्री, मध्य प्रदेश:-
यह सड़क यहां बन रही है। मैं देख रहा हूं कि यहां हिंदू और मुस्लिम दोनों भाई रहते हैं। कई मुस्लिम भाई हमें काफिर कहते हैं। अगर हम काफिर हैं और हमने सड़क बनाई है, तो भाई उस पर मत चलो।
'काफिर हैं हम तो लाडली बहना का लाभ न लो'
कैलाश विजयवर्गीय यहीं नहीं रुके। उन्होंने कहा, 'अगर हम काफिर हैं और लाडली बहना व लाडली लक्ष्मी योजना का पैसा आपके घर आ रहा है, तो उसे भी मत लो।'
'वोट दो या न दो, हम सेवा करेंगे'
कैलाश विजयवर्गीय ने यह भी कहा कि राज्य सरकार किसी भी समुदाय के साथ भेदभाव नहीं करती। उन्होंने 'सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास' को सरकार का मूल मंत्र बताया। कैलाश विजयवर्गीय ने तंज के लहजे में कहा कि चाहे आप हमें वोट दें या न दें, हमारा काम लोगों की सेवा करना है।
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कैलाश विजयवर्गीय के बयान पर विपक्ष ने क्या कहा?
उमंग सिंघार, नेता विपक्ष, विधानसभा:-
मध्यप्रदेश के मंत्री कैलाश विजयवर्गीय द्वारा सार्वजनिक मंच से दिया गया बयान न केवल आपत्तिजनक है, बल्कि यह सत्ता के अहंकार और लोकतांत्रिक मर्यादाओं, संवैधानिक मूल्यों पर गंभीर सवाल खड़ा करता है।
उमंग सिंघार ने कहा, 'काफिर जैसे शब्दों के संदर्भ में समाज को बांटने वाला यह रवैया किसी भी जिम्मेदार जनप्रतिनिधि के लिए उचित नहीं है। विकास कार्यों को लेकर जनता पर इस तरह की भाषा और अप्रत्यक्ष धमकी देना सत्ता के अहंकार को दर्शाता है और जनता के टैक्स से बनी सड़कों को किसी धर्म विशेष से जोड़ना बीजेपी के सबका साथ, सबका विकास मॉडल की पोल खोलता नजर आ रहा है।'
BJP समर्थक उनके इस बयान की तारीफ कर रहे हैं लेकिन सेक्युलर लोग इस बयान की आलोचना कर रहे हैं। मुस्लिम समुदाय के लोगों ने इसे सांप्रदायिक, विभाजनकारी और अनुचित करार दिया है। उन्होंने तर्क दिया कि सड़कें और योजनाएं व्यक्तिगत नहीं बल्कि टैक्सपेयर्स के पैसे से बनी हैं, इसलिए सभी नागरिकों का समान अधिकार है। बयान वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर हिंदू-मुस्लिम को लेकर नई बहस छिड़ गई है। लोगों ने कैलाश विजयवर्गीय के बयान को हिंदू तुष्टीकरण बताया है।


