बहजन समाज पार्टी (BSP) की प्रमुख मायावती ने गुरुवार को अपने भतीजे आकाश आनंद को पार्टी के मुख्य राष्ट्रीय समन्वयक के पद से हटा दिया। उन्होंने कहा कि आकाश को अभी और राजनीतिक परिपक्वता हासिल करने की जरूरत है, इसलिए अभी उन्हें बड़ी जिम्मेदारियां नहीं दी जा सकतीं।
लखनऊ में पार्टी की राष्ट्रीय समिति की बैठक को संबोधित करते हुए मायावती ने बताया कि आकाश आनंद को पार्टी में काम करने की अनुमति तो है, लेकिन अभी उन्हें महत्वपूर्ण पद नहीं सौंपे जा सकते। उन्होंने कहा कि समय के साथ पार्टी को नुकसान से बचाने के लिए यह जरूरी है, क्योंकि विरोधी दल कई तरह के तरीके अपनाकर पार्टी को कमजोर करने की कोशिश कर सकते हैं।
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2027 से पहले झटका दे गईं मायावती?
मायवती का फैसला यह आकाश आनंद के लिए एक झटका है। अगस्त 2025 में मायावती ने उन्हें पार्टी का राष्ट्रीय संयोजक बनाया था, जिससे वह पार्टी में दूसरे नंबर पर आ गए थे और उनके उत्तराधिकारी के रूप में चर्चा होने लगी थी। उस समय मायावती ने उन्हें 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों से पहले पार्टी को मजबूत करने और युवा मतदाताओं से जोड़ने का काम सौंपा था।
मायावती, राष्ट्रीय अध्यक्ष, बहुजन समाज पार्टी:-
आकाश आनन्द को अभी और अधिक परिपक्व होने की जरुरत है। तब तक इनको पार्टी की अभी बड़ी जिम्मेवारी देना उचित नहीं होगा। विरोधियों के साम, दाम, दण्ड, भेद आदि हथकण्डों को इस्तेमाल करके चुनाव में हानि पहुंचाने से बचने के लिये भी समय की जरूरत है।
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आकाश आनंद को पद से क्यों हटाया?
मायावती ने कहा कि पार्टी संस्थापक कांशीराम अपने परिवार के लोगों को पार्टी के काम में सहयोग करने की छूट तो देते थे लेकिन उन्हें चुनाव लड़ाने या सरकार बनने पर कोई पद देने के खिलाफ थे। उन्होंने कहा कि वह भी इसी सिद्धांत पर कायम हैं।
मायावती ने बताया कि उन्होंने आकाश आनंद को पार्टी में काम करने की इजाजत दी है लेकिन उन्हें अभी और परिपक्व होने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि अभी आकाश आनंद को पार्टी की बड़ी जिम्मेदारी देना ठीक नहीं होगा।
आकाश आनंद किस दुविधा में फंस गए हैं?
आकाश आनंद राष्ट्रीय संयोजक के पद तक पहुंचे, फिर उतरे, फिर बनाए गए, अब एक बार फिर बाहर हो गए हैं। मायावती बार-बार आकाश आनंद की परिपक्वता को लेकर सवाल उठाती हैं। आकाश आनंद के तेवर मायावती से बेहद अलग हैं। मायवती जहां अब विपक्ष पर मुखर होकर हमले कम करती हैं, वहीं आकाश आनंद राष्ट्रीय स्वंय सेवक संघ से लेकर समाजवादी पार्टी तक खुला हमला बोलते हैं।
2024 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी पर तीखे हमलों की वजह से उन पर FIR तक हो गई थी। उन्होंने बीजेपी को आतंकी पार्टी बता दिया था। मायावती इसे राजनीतिक अपरिपक्वता बताती हैं। एक वजह, उनके ससुर अशोक सिद्धार्थ भी हैं। मायावती उन्हें पदमुक्त कर चुकी हैं। पसंद नहीं करती हैं। आकाश आनंद पर यह भी आरोप लगते रहे हैं कि पत्नी के प्रभाव में पार्टी में वह गुटबंदी, समानांतर सत्ता केंद्र बनाने और पुरानी व्यवस्था को चुनौती दे रहे हैं, जिसे मायावती पसंद नहीं करती हैं।
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जीरो से आगे मायावती के सहारे बढ़ेगी बहुजन समाज पार्टी?
मायावती का कहना है कि पार्टी अनुशासन पर चलेगी। वह कांशीराम-अंबेडकर आंदोलन के हितों के साथ आगे बढ़ना चाहती हैं। चाहती हैं पार्टी पर पूरा नियंत्रण उनका ही रहे। वह आकाश आनंद को आगे बढ़कर रणनीति संभालने की जगह, हाशिए पर रख रहीं हैं। बहुजन समाज पार्टी साल 2012 के बाद से ही यूपी में हाशिए पर है। साल 2019 में समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन में उन्हें लोकसभा चुनावों में फायदा मिला था लेकिन उसके बाद वह फिर शून्य सीटों पर सिमट गईं हैं।
