प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महिला आरक्षण से जुड़े विधेयकों के लोकसभा में गिरने के बाद शनिवार को रात 8.30 पर देश के नाम संबोधन किया। राज्यसभा सदस्य कपिल सिब्बल ने प्रधानमंत्री मोदी के राष्ट्र के नाम संबोधन की आलोचना की है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री ने चुनावी भाषण देकर आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन किया है। उनका कहना है कि यह राजनीति में एक नई गिरावट है।

कपिल सिब्बल ने दावा किया कि ऐसी टिप्पणियां प्रधानमंत्री के पद की गरिमा को कम करती हैं और अतीत में किसी भी प्रधानमंत्री ने इस तरह का काम नहीं किया है। उन्होंने देश के नाम संबोधन के समय को लेकर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि जब देश में आचार संहिता लगी हो, चुनावी मु्द्दे पर फोकस करना हो तब प्रधानमंत्री को भारतीय ध्वज वाले बैकग्राउंड में ऐसे संबोधन नहीं देने चाहिए। 

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कपिल सिब्बल, राज्यसभा सांसद:-
यह भारत की राजनीति में एक नई गिरावट है। मुझे पता है कि न तो मुख्य चुनाव आयुक्त और न ही कोई अन्य संस्था इस बारे में कुछ करेगी। प्रधानमंत्री बार-बार आचार संहिता का उल्लंघन करते हैं और चुनाव के दौरान प्रधानमंत्री रहते हुए राजनीतिक भाषण देते हैं।

कपिल सिब्बल ने कहा, 'मैं अपने प्रधानमंत्री से क्या कहूं? आपने प्रधानमंत्री पद का महत्व इस तरह क्यों कम कर दिया है? अतीत में किसी भी प्रधानमंत्री ने ऐसा नहीं किया है। आप चुनाव जीत सकते हैं, लेकिन आपको संस्था को नष्ट नहीं करना चाहिए।'

विपक्षी नेताओं ने क्या कहा है?

विपक्षी नेताओं ने शनिवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के देश के लिए संबोधन की आलोचना की है। विपक्ष का कहना है कि देश के नाम संबोधन भी प्रधानमंत्री राजनीति से प्रेरित होकर दे रहे हैं। विपक्ष ने पीएम के भाषण को सारहीन और लोकतांत्रिक मानदंडों का उल्लंघन बताया है।

मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी  के राज्यसभा सदस्य जॉन ब्रिटास ने कहा, 'किसी भी प्रधानमंत्री ने कभी भी विपक्ष की खुलकर आलोचना करने और उन्हें निशाना बनाने के लिए इस तरह राष्ट्र के नाम संबोधन का सहारा नहीं लिया। इस भाषण में महिला आरक्षण विधेयक को लेकर विपक्ष पर सीधा हमला करके और उनके कार्यों की तुलना भ्रूण हत्या और महिला विरोधी होने से की गई। बीजेपी स्वस्थ संसदीय परंपराओं और संवैधानिक मर्यादाओं को कमजोर करने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार है।'

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संदोष कुमार, राज्यसभा सांसद, CPI:-
प्रधानमंत्री ने कोई स्पष्टीकरण या जवाबदेही पेश नहीं की है, बल्कि केवल एक गढ़े हुए कथानक को दोहराया है जिसका उद्देश्य सरकार की अपनी विफलता को छिपाना है।


राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के राज्यसभा सदस्य मनोज झा ने भी प्रधानमंत्री के संबोधन पर कटाक्ष करते हुए कहा कि यह वास्तव में एक चुनावी भाषण लग रहा है। तृणमूल कांग्रेस के नेता साकेत गोखले ने शनिवार को मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को चुनौती दी कि अगर उनमें हिम्मत है तो वह प्रधानमंत्री के आज रात के संबोधन के खर्च को बीजेपी के चुनावी व्यय खाते में जोड़ें।

 

CPI (M) महासचिव एमए बेबी ने कहा कि यह संबोधन लोकसभा के घटनाक्रम के बाद आया है, जहां विपक्षी एकजुटता की वजह से संविधान संशोधन विधेयक पारित नही हो पाया। संसद और विधानसभाओं में महिला आरक्षण को बिना किसी परिसीमन या जनगणना की शर्तों के तुरंत लागू किया जा सकता है और किया जाना चाहिए।