कांग्रेस ने शुक्रवार को भारतीय हॉकी टीम के पूर्व कप्तान और जालंधर कैंट के मौजूदा विधायक परगट सिंह को पंजाब कांग्रेस का नया अध्यक्ष नियुक्त किया है। यह एलान अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग के पद से इस्तीफा देने के कुछ घंटे बाद हुआ। राजा वड़िंग ने अपने हटने के लिए AICC की पंजाब प्रभारी सचिन पायलट को जिम्मेदार ठहराया था। उन्होंने कहा था कि सचिन पायलट को लगा होगा कि अब राजा को उतारने का समय आ गया है।
परगट सिंह की उम्र 62 साल है। वह पंजाब पुलिस के पूर्व अधिकारी रहे हैं। वह एथिलीट थे, हॉकी में एक जमाने में उनका सिक्का चलता था। चरणजीत सिंह चन्नी के मुख्यमंत्री रहने के दौरान उन्हें कैबिनेट में जगह भी दी गई थी। वह जम्मू-कश्मीर के लिए ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी (AICC) के प्रभारी सचिव हैं।
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क्या है उनके सामने चुनौती?
पंजाब कांग्रेस में दो गुट हैं। एक चरणजीत सिंह चन्नी और दूसरा अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग का। इसके अलावा कई छोटे-छोटे फिके हैं, जिनका कलह, जमीनी स्तर पर दिखता भी है। विपक्ष के नेता प्रताप सिंह बाजवा का भी एक अलग गुट है। नवजोत सिंह सिद्धू राजनीति में सक्रिय नहीं हैं लेकिन उनके भी समर्थक पार्टी में हैं। सुखजिंदर सिंह रंधावा भी नाराज हैं। अब फिरकों में बटी कांग्रेस को एक करना परगट सिंह की सबसे बड़ी चुनौती है।
चन्नी सरकार में क्या जिम्मेदारी निभा चुके हैं?
चन्नी सरकार में वे 26 सितंबर 2021 से 11 मार्च 2022 तक कैबिनेट मंत्री रहे। उनके पास स्कूल शिक्षा, उच्च शिक्षा, खेल, युवा मामले और NRI मामलों के विभाग थे। 2022 के विधानसभा चुनाव में AAP को भारी बहुमत मिला। तब भी परगट सिंह ने जालंधर कैंट सीट कांग्रेस के लिए बचाई। उन्होंने साथी पूर्व हॉकी खिलाड़ी सुरिंदर सिंह सोढ़ी को करीब 5,800 वोटों से हराया।
कौन हैं परगट सिंह?
परगट सिंह का जन्म जालंधर के मिठापुर गांव में हुआ। यह गांव हॉकी खिलाड़ी देने के लिए जाना जाता है। वह फुल-बैक की पोजीशन पर खेलते थे और अपने दौर के भारत के बेहतरीन डिफेंडरों में गिने जाते थे। उन्होंने 1988 के सियोल, 1992 के बार्सिलोना और 1996 के अटलांटा ओलंपिक में भारत के लिए खेला। आखिरी दो ओलंपिक में वे टीम के कप्तान थे। अटलांटा 1996 के उद्घाटन समारोह में वे भारत के ध्वजवाहक भी बने।
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परगट सिंह के नाम क्या रिकॉर्ड हैं?
परगट सिंह ने साल 1986 के सियोल एशियाई खेलों में ब्रॉन्ज और 1990 के बीजिंग एशियाई खेलों में सिल्वर मेडल जीता। उन्हें 1989 में अर्जुन पुरस्कार और 1998 में पद्मश्री मिला। खेल करियर के बाद उन्होंने पुरुष राष्ट्रीय टीम को कोचिंग दी। बाद में उन्होंने पंजाब में हॉकी प्रशासन की भूमिकाएं भी निभाईं। 2017 में वे हॉकी पंजाब के महासचिव रहे।
अकाली दल से रहा है पुराना नाता
परगट सिंह पंजाब पुलिस में अधीक्षक (SP) के पद तक पहुंचे। इसके बाद उन्होंने सेवा छोड़कर 2012 में चुनावी राजनीति में कदम रखा। उन्होंने शिरोमणि अकाली दल के टिकट पर जालंधर कैंट सीट जीती और कांग्रेस के जगबीर सिंह बराड़ को हराया। जुलाई 2016 में अकाली दल ने उन्हें निलंबित कर दिया। इसके कुछ समय बाद उन्होंने पार्टी छोड़ दी।
सुखबीर बादल से क्या है परगट सिंह का पंगा?
परगट सिंह और सुखबीर बादल के रिश्ते खराब होने लगे। उन्होंने सुखबीर बादल पर मतदाताओं का भरोसा तोड़ने का आरोप लगाया। इसके बाद वह नवजोत सिंह सिद्धू और बैंस भाइयों के साथ अल्पकालिक मोर्चे आवाज-ए-पंजाब में शामिल हुए। यह मोर्चा खुद को पंजाब के हितों के लिए नुकसानदेह ताकतों के खिलाफ बताता था। बाद में वह कांग्रेस में आए और 2017 में फिर उसी सीट से जीते।
